भगवामय भारत का सपना साकार, अब संस्कृति से जुड़ें युवा, युवा धर्म संसद में बोले मनोज मुंतशिर
युवा धर्म संसद में लेखक मनोज मुंतशिर ने कहा कि वर्ष 1940 में डा. हेडगेवार ने कहा था कि एक दिन ऐसा अवश्य आएगा, जब पूरा देश भगवामय हो जाएगा। आज वह दिन आ…और पढ़ें

HighLights
- युवाओं से किया आह्वान : धर्म को समझें, गीता-रामायण पढ़ें
- अब युवाओं को अपनी संस्कृति से जुड़ना होगा
- अपने धर्म और संस्कृति को समझने की आवश्यकता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : युवा धर्म संसद में लेखक मनोज मुंतशिर ने कहा कि वर्ष 1940 में डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि एक दिन ऐसा अवश्य आएगा, जब पूरा देश भगवामय हो जाएगा। आज वह दिन आ गया है। 90 प्रतिशत भारत भगवा हो गया है। अब युवाओं को अपनी संस्कृति से जुड़ना होगा। युवा भारत का भविष्य हैं, लेकिन उन्हें अपने धर्म और संस्कृति को समझने की आवश्यकता है। श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण पढ़ने से उन्हें नई दिशा मिलेगी।
‘धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व’ विषय पर संवाद के दौरान मुंतशिर ने कहा कि 133 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद ने शिकागो सम्मेलन में ‘सिस्टर्स एंड ब्रदर्स आफ अमेरिका’ कहकर संबोधन किया था। उस समय विदेशियों को समझ नहीं आया कि वे उन्हें भाई-बहन क्यों कह रहे हैं। स्वामी विवेकानंद बता रहे थे कि पूरा विश्व ही हमारा परिवार है। उन्होंने युवाओं से भारतीय परंपरा से जुड़ने का आह्वान किया।
तीन पीढ़ियां सभ्यता से दूर रहें तो राष्ट्र नष्ट हो जाता है
मनोज मुंतशिर ने महर्षि अरविंद के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई राष्ट्र तीन पीढ़ियों तक सभ्यता से दूर रहता है तो वह नष्ट हो जाता है। हमारी दो पीढ़ियां अंग्रेजों से लड़ते हुए बीत गईं। अब हमें अपनी संस्कृति से जुड़ना होगा। हमें यह तय करना है कि भारतीय परंपरा से जुड़ना है या बाबरी परंपरा से। उन्होंने कहा कि युवाओं को धर्म को केवल जानना नहीं, बल्कि उसे समझकर जीवन में उतारना होगा। भारत की परंपराओं और ग्रंथों से जुड़कर युवा अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
युवाओं को बताना होगा क्यों करना है : श्रीनिवास बरखेड़ी
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीनिवास बरखेड़ी ने कहा कि हमें इंडिया से भारत की ओर लौटना होगा और यह युवा ही कर सकते हैं। युवाओं से केवल यह कहने के बजाय कि क्या करना है, उन्हें यह भी बताना होगा कि क्यों करना है। हमें सिर्फ धर्म को जानना ही नहीं, बल्कि धर्म को जीना भी है।
उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि युवा धर्म को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जब हम उन्हें बताएंगे कि क्या करना है और क्यों करना है, तब वे बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। युवा चाहें तो हर वह काम कर सकते हैं, जो असंभव नजर आता है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से अपनी बात रखी।
भारत ने शून्य ही नहीं, पूरा डिजिटल सिस्टम दिया : स्मृति अनंतलक्ष्मी
अनादि फाउंडेशन की स्मृति अनंतलक्ष्मी ने एआइ के दुष्प्रभावों पर कहा कि डीपफेक में पता नहीं चलता कि क्या सही है और क्या गलत। कुछ दिन पहले ही ब्रिक्स सम्मेलन हुआ। इसके समाप्त होते ही फर्जी संदेश आना शुरू हो गए। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी भारतीय विज्ञानियों के बारे में जानते तक नहीं हैं। उन्हें पता ही नहीं कि भारत ने सिर्फ शून्य ही नहीं, बल्कि पूरा डिजिटल सिस्टम दिया है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकों में मुगलों के बारे में कई पृष्ठ मिल जाते हैं, लेकिन भारतीय विज्ञानियों के बारे में केवल कुछ पंक्तियां होती हैं। इस स्थिति को बदलना होगा। एआइ को लेकर उन्होंने कहा कि इससे उन लोगों को खतरा है, जो इसे नहीं जानते। हमें एआइ को समझना होगा, तभी इसके प्रभावों से निपट सकेंगे। भारतीय पंचांग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे यहां हर तिथि का विश्लेषण है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर में ऐसा नहीं है।