रामायणकाल में भी था एआई, मारीच ने रचा था डीपफेक, युवा धर्म संसद में बोले स्वामी अवधेशानंद गिरि
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : एआई के युग में सत्य और असत्य के अंतर को समझाने के लिए स्वामी अवधेशानंद गिरि ने रामायण के मारीच प्रसंग का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि रामायणकाल में भी एआइ था। मारीच ने छल से ऐसी आवाज निकाली कि माता सीता भी भ्रमित हो गईं। यह डीपफेक जैसा था। हालांकि जो सत्य है, वह सत्य ही रहेगा। एआई कभी सत्य को पकड़ नहीं सकेगा।
स्वामी अवधेशानंद गिरि शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद के दौरान अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि एआई असत्य है और माया केवल माया है। हमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
सत्य को परिभाषित करने वाला ही धर्म
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि धर्म के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। हमारे शास्त्र धर्म पर ही आधारित हैं। जो धारण करता है, उसे धर्म कहते हैं। सत्य को जो परिभाषित करता है, वही धर्म है। जो शाश्वत है, जो सनातन को परिभाषित करता है, उसी को धर्म कहते हैं। वह अनंत है। सनातनता को सनातनता ही संभालकर रखती है। उन्होंने कहा कि रूप अस्थिर है और बदलता रहता है। कौन-सी ऐसी भोर है, जो दोपहर न बनी हो। सत्य केवल ब्रह्म है। जो बदल रहा है, वह सत्य नहीं है।
जहां से प्रपंच शुरू होता है, वह मन
मन की परिभाषा समझाते हुए उन्होंने कहा कि जहां से प्रपंच शुरू होता है, वह मन है। हमें ‘मैं’ और ‘मेरा’ में अंतर समझना होगा। जो नित्य और अनित्य, सत्य और असत्य में अंतर कर दे, वही विवेक है।
एआई को लेकर उन्होंने कहा कि यह उन्हें मारीच की काया में भी दिखाई देती थी। मारीच ने रावण को समझाते हुए कहा था कि तू कहता है कि मैं मायावी बन जाऊं, लेकिन जिसे तू अपना प्रपंच कहता है, वह माया कहीं ईश्वर की रची हुई तो नहीं है। उन्होंने कहा कि पश्चिम के लोग जिसे एआइ कह रहे हैं, वह वर्तमान में बहुत शैशव अवस्था में है, लेकिन हमारे यहां तो रामायणकाल में भी एआइ था। क्या ऐसी माया नहीं रची गई थी कि माता सीता मारीच का स्वर तक नहीं पहचान सकीं।
जब मारीच ने कहा कि हे लक्ष्मण, मुझे बचाओ, मेरे प्राण संकट में हैं, तो माता सीता ने इसे राम का स्वर समझा और लक्ष्मण को भेज दिया। जो था ही नहीं, उसकी चिंता माता सीता ने की। यह डीपफेक था।
सत्य हमेशा सत्य ही रहेगा
भारतीय विद्वता की प्रशंसा करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि हमारे पास सर्वश्रेष्ठ विज्ञानी हैं, इसलिए हमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। लंका का अहित करने वाला व्यक्ति तो दूर, विचार भी वहां नहीं जा सकता था, लेकिन हनुमान वहां पहुंचे। उन्होंने वहां के पूरे तंत्र को समझ लिया। हनुमान के आवागमन को कोई पकड़ नहीं सका। उन्होंने कहा कि हमारे पास विश्व का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान है। हमारे यहां माया को परिभाषित करते हुए मन को भी माया बताया गया है।
वामपंथियों से बचाए राम
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि हमारे पास ज्ञान की कमी नहीं है, लेकिन पश्चिम के लोग हमारे पीछे पड़े हैं। ये वामपंथी हमें परेशान करने में लगे रहते हैं। राम हमें इससे बचाएं। उन्होंने कहा कि वे पिछले वर्ष कैलिफोर्निया में थे। वहां एक बच्चे ने उन्हें बताया कि हमें पढ़ाया जाता है कि हनुमान आतंकवादी थे। हमारे देवी-देवताओं का मजाक बनाया जा रहा है। बच्चों को भ्रमित किया जा रहा है। यह सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि हालांकि अब स्थिति सुधर रही है। एक समय था, जब कुछ लोग जम्मू के लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे थे, लेकिन उन्हें रोका गया। अब स्थिति यह है कि कुछ दिन पहले ही वहां 10 हजार लोगों ने तिरंगा फहराया। एक समय था, जब स्कूलों में सरस्वती की पूजा नहीं हो सकती थी। हाल ही में हरियाणा में स्कूलों में गीता पढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
आम के रस की रक्षा के लिए छिलका जरूरी
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि हम किसी का अहित नहीं करते। हम तो ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ कहने वाले हैं। कुछ लोगों को वंदे मातरम् से परहेज था, लेकिन आज कानून बन गया है, सारे अंतरे गाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि हमें धर्म को संभालकर रखना होगा। कुछ लोग कहते हैं कि छिलके की क्या आवश्यकता है, लेकिन हमें समझाना होगा कि आम के रस की रक्षा के लिए छिलका जरूरी है। हमें अपने प्रतीकों को संभालकर रखना होगा। जयकारे लगाने होंगे।