590 करोड़ का बजट मिला, टेंडर खुला, मगर काम नहीं हुआ शुरू
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन एयरपोर्ट का काम अभी धरातल पर शुरू नहीं हो सकता है। घोषणा, बजट, टेंडर के बाद भी यहां रनवे या टर्मिनल निर्माण के लिए जमीन पर एक ईंट न रखी जा सकी है। भूमि अधिग्रहण अधूरा है, कार्यादेश बाकी है और भूमिपूजन की तारीख भी तय नहीं हुई है। परिणाम स्वरूप सिंहस्थ-2028 से पहले एयरपोर्ट शुरू करने के दावे के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती समय बनता जा रहा है।
मालूम हो कि उज्जैन एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि सिंहस्थ-2028 की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं में शामिल है। सरकार का उद्देश्य करोड़ों श्रद्धालुओं को सीधे उज्जैन तक हवाई सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी सोच के तहत प्रदेश मंत्रिमंडल ने महीनों पहले 590 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने परियोजना को दो चरणों में आगे बढ़ाया।
पहले चरण में 147 करोड़ 36 लाख रुपये से वर्तमान दताना-मताना हवाई पट्टी का पूरी तरह कायाकल्प करने को मौजूदा पुराने और कमजोर पेवमेंट को हटाकर नया रनवे- 13/13 बनाया जाना तय किया। इसके लिए 20 जनवरी 2026 को ठेकेदार तय करने को प्रक्रिया शुरू की। तय किया कि ठेकेदार 1800 मीटर लंबा रनवे बनाएगा, जिस पर एटीआर-72 जैसे व्यावसायिक विमान उतर सकेंगे।
सुरक्षा के लिहाज से 7.8 किलोमीटर लंबी आपरेशनल बाउंड्रीवाल बनाएगा। इसमें सुरक्षा के लिए कंक्रीटिना काइल और कटीले तार लगाएगा। विमानों के खड़े होने और मुड़ने के लिए लिंक टैक्सी-वे, एप्रन और आइसोलेशन-वे का निर्माण करेगा। एयरपोर्ट के अंदरूनी हिस्से में पेरिफरल रोड बनाएगा।
ये काम एक वर्ष की निश्चित समय सीमा में होगा ताकि सिंहस्थ से पहले ट्रायल लैंडिंग सुनिश्चित हो सके। ये काम करने के लिए डीआरए इंफ्राकॉन, रवि इन्फ्राबिल्ड, गावर कंस्ट्रक्शन और अशोका बिल्डकान सहित छह बड़ी कंपनियों ने निविदाएं जमा की हैं। टेंडर निकले करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन तकनीकी और वित्तीय परीक्षण के बाद भी अब तक किसी कंपनी को वर्क आर्डर जारी नहीं हुआ है।
दो महीने पहले दूसरे चरण में 125 करोड़ रुपये से अंतरराष्ट्रीय स्तर का डोमेस्टिक टर्मिनल भवन बनान तय किया। इसके लिए निविदा जारी की। तय किया कि परियोजना अंतर्गत 107 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों पर और 17.44 करोड़ रुपये अगले दस वर्षों के रखरखाव पर खर्च किए जाएंगे। 15 महीने की समय सीमा में यहां एक भव्य डोमेस्टिक टर्मिनल बिल्डिंग के साथ नया एटीसी टावर, तकनीकी ब्लाक और अत्याधुनिक फायर स्टेशन का निर्माण किया जाएगा।
यात्रियों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट पर उन्नत आईटी और सुरक्षा सिस्टम के साथ-साथ शानदार पार्किंग और एप्रोच रोड विकसित की जाएगी। इसी बीच एयरपोर्ट विस्तार के लिए नरवर क्षेत्र की 111.87 हेक्टेयर (करीब 276 एकड़) भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की। प्रशासन ने सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (एसआईए) शुरू कर पांच सदस्यीय समिति गठित की है। प्रभावित किसानों से संवाद और कानूनी प्रक्रिया जारी है। अधिग्रहण पूरा होने, मुआवजा वितरण और भूमि हस्तांतरण के बाद ही निर्माण एजेंसी को साइट सौंपी जा सकेगी। यानी परियोजना की नींव रखने से पहले सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया अभी अधूरी है।
पर्यटन, उद्योग, निवेश और वीआईपी आवागमन बढ़ेगा
एयरपोर्ट से धार्मिक पर्यटन, उद्योग, निवेश, आपदा प्रबंधन और वीआईपी आवागमन को नई गति मिलने की उम्मीद है। सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह परियोजना गेम चेंजर मानी जा रही है। लेकिन फिलहाल तस्वीर यह है कि मंजूरियां आगे बढ़ चुकी हैं, बजट उपलब्ध है और टेंडर भी निकल चुके हैं, जबकि निर्माण का पहला चरण भी शुरू नहीं हो पाया है। अब पूरी परियोजना समय के खिलाफ दौड़ में है। यदि अगले कुछ महीनों में भूमि अधिग्रहण, ठेकेदार चयन और कार्यादेश की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो सिंहस्थ-2028 से पहले एयरपोर्ट संचालन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। दूसरे शब्दों में, अब इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती पैसा नहीं, बल्कि समय है।