15 जून को सोमवती अमावस्या पर अमृत सिद्धि योग का महासंयोग, शिप्रा व सोमकुंड में होगा पर्व स्नान, अधिक मास का होगा समापन


इस दिन अमृतसिद्धि योग का महासंयोग रहेगा। विशेष यह भी है कि इस दिन अधिकमास का समापन हो रहा है। इस दुर्लभ योग में शिप्रा व सोमकुंड में स्नान तथा दान पुण …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 14 Jun 2026 11:39:47 AM (IST)Updated Date: Sun, 14 Jun 2026 11:39:47 AM (IST)

15 जून को सोमवती अमावस्या पर अमृत सिद्धि योग का महासंयोग, शिप्रा व सोमकुंड में होगा पर्व स्नान, अधिक मास का होगा समापन
सोमकुंड में पड़े विद्युत पोल। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. सालों बाद ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या पर योगों का महासंयोग बन रहा है
  2. पहला ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या सोमवार के दिन होने से यह सोमवती अमावस्या कहलाएगी
  3. दूसरा इस दिन अमृतसिद्धि योग का महासंयोग रहेगा, इस दिन अधिकमास का समापन भी हो रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सालों बाद ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या पर योगों का महासंयोग बन रहा है। पहला ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या सोमवार के दिन होने से यह सोमवती अमावस्या कहलाएंगी। दूसरा इस दिन अमृतसिद्धि योग का महासंयोग रहेगा। विशेष यह भी है कि इस दिन अधिकमास का समापन हो रहा है। इस दुर्लभ योग में शिप्रा व सोमकुंड में स्नान तथा दान पुण्य करने से अश्वमेघ यज्ञ करने से भी कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया 15 जून को सोमवार के दिन अमावस्या का संयोग बन रहा है। इस दिन मृगशिरा नक्षत्र, शुल उपरांत गंड योग, वृषभ उपरांत मिथुन राशि के चंद्रमा की साक्षी रहेगी। पंचांग के यह पांच अंग धार्मिक दृष्टिकोण से स्नान,दान,देव दर्शन तथा किसी विशेष कामना की पूर्ति से किए जा रहे धर्म अनुष्ठान की पूर्णता के लिए विशेष माने गए हैं।

महासंयोग से इस दिन ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णता हो रही है। गत एक माह से धर्म, आराधना, तीर्थाटन तथा नियमन कर रहे श्रद्धालुओं के लिए यह दिन महाफल प्रदाता माना गया है। मान्यता है इस दिन तीर्थ स्नान, श्री सोमेश्वर महादेव के दर्शन तथा दान पुण्य करने से भक्तों के समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं।

मध्यान्ह में सूर्य का मिथुन में प्रवेश

पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या दिवस पर्यंत रहेगी। साथ ही साधना उपासना आराधना के मन से यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस दिन दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर सूर्य का वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश होगा। अमावस्या पर ईष्ट सिद्धि व पितरों की प्रसन्नता के लिए पितृ कर्म का विशेष महत्व धर्मशास्त्र में बताया गया है।



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