लाखों रुपये खर्च… उज्जैन में वन विभाग की टीम आठ घंटे में पकड़ पाई सिर्फ चार नीलगाय
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नीलगाय की मौजूदगी बनी हुई है। झुंड में विचरण करने वाले वन्य प्राणी खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं। नीलगाय फसलों क …और पढ़ें

HighLights
- हांका तकनीक फेल : पहली बार हेलीकॉप्टर की जगह चलाया था मैनुअल ऑपरेशन
- वन विभाग का दल व ग्रामीण कड़ी मशक्कत के बाद आठ घंटे में सिर्फ चार नीलगाय को पकड़ पाए
- जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नीलगाय की मौजूदगी बनी हुई है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। वन विभाग द्वारा शुक्रवार को ब्रजराजखेड़ी में ऑपरेशन नीलगाय की शुरुआत की। सुबह 5 बजे से शुरू हुआ अभियान दोपहर 1 बजे तक चला। वन विभाग का दल व ग्रामीण कड़ी मशक्कत के बाद आठ घंटे में सिर्फ चार नीलगाय को पकड़ पाए। बता दें बोमा पद्धति से नीलगाय को सुरक्षित पकड़ने के इस अभियान में पहली बार हेलीकॉप्टर की जगह हांका का उपयोग किया गया था। सूत्र बताते हैं लाखों रुपये खर्च करने के बाद यह योजना फेल रही।
जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नीलगाय की मौजूदगी बनी हुई है। झुंड में विचरण करने वाले वन्य प्राणी खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं। नीलगाय फसलों को तो नुकसान पहुंचा ही रही है, ग्रामीण मार्गों पर रात्रि के समय वाहन दुर्घटना का भी बड़ा कारण बन रही है।
लंबे समय से ग्रामीण शासन, प्रशासन से नीलगाय पर नियंत्रण की गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए वन विभाग ने नीलगाय के विस्थापन की योजना बनाई। इसके अफ्रीकन बोमा पद्धति का उपयोग किया गया।
हालांकि जिले में पहली बार मूल योजना में संशोधन करते हुए हेलीकाप्टर की जगह हांका पद्धति का उपयोग किया गया। वन विभाग के अफसरों का कहना था कि भारतीय वन्य जीवों के विस्थापन में हांका प्राचीन पद्धति है, यहां इसका उपयोग ज्यादा सफल माना गया है। लेकिन शुक्रवार को वन विभाग का यह अभियान आशातीत सफलता प्राप्त नहीं कर पाया और लाखों रुपये के संसाधन तथा आठ घंटे की कड़ी मेहनत के बाद सिर्फ चार नीलगाय पकड़ी गई। बता दें इसके पहले भी वन विभाग दो बार बोमा लगाकर नीलगाय पकड़ने का प्रयास कर चुका है।
ग्रामीणों ने काफी मेहनत की
डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया पहली बार नीलगाय को पकड़ने का अभियान हांका पद्धति से चलाया था। ग्रामीणों ने बहुत मेहनत की, वेे ट्रैक्टर व दो पहिया वाहनों से हांका लगाते हुए नीलगायों को घेरकर बोमा में लाने का प्रयास करते रहे, लेकिन नीलगाय की रफ्तार तेज है और खेतों में उतनी तेजी से वाहनों को चला पाना संभव नहीं होता है, ऐसे में चार नीलगाय को पकड़ा जा सका है।
एक दो दिन बाद फिर शुरू होगा अभियान
जिला वन मंडल अधिकारी ने बताया वन्य क्षेत्र में इस प्रकार की मानवीय गतिविधि से वन्य प्राणी दूर चले जाते हैं और वापसी में समय लगता है। नीलगाय जल्दी वापस लौटे इसके लिए हमने ग्रामीणों को इस क्षेत्र से दूर रहने को कहा है। साथ ही नीलगाय के लिए महुआ, जामफल, पीने के पानी आदि का भरपूर इंतजाम कर दिया है। महुआ और जामफल नीलगाय को बहुत पसंद होते हैं, इनकी खुशबू से वे तुरंत उस स्थापन पर आ जाते हैं। इस प्रकार से एक दो दिन में स्थिति सामान्य होने के बाद फिर से अभियान चलाया जाएगा।
गांव वालों ने हाथ से पकड़ ली नीलगाय
इधर हांका लगाने के कारण जंगल में हलचल मची हुई है। व्यस्क नीलगाय तो फर्राटा भरते हुए बोमा स्थल के आसपास से दूर चले गए। लेकिन छोटे वन्य जीव आसपास मौजूद है। ग्रामीण उन्हें हाथ से पकड़ कर रस्सियों में बांधकर वन विभाग के सुपुर्द कर रहे हैं।
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