धर्म संसद से मिली नई दिशा, देश व समाज को आगे ले जाएंगे, आयोजन में शामिल हुए 25 राज्यों के युवाओं ने साझा किए अनुभव
उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद ने देशभर के युवाओं को एक नई राह दिखाई है। इस आयोजन से जंतर मंतर के युवाओं के विद्रोही रुप के बजाए देश के विकास व सकार…और पढ़ें

HighLights
- उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद ने देशभर के युवाओं को एक नई राह दिखाई है
- आयोजन देश को आगे ले जाने में युवाओं की भूमिका में पथ प्रदर्शक के रूप में काम करेगा
- धर्म संसद में देश के 25 राज्यों के सैकड़ों युवा शामिल होने आए हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद ने देशभर के युवाओं को एक नई राह दिखाई है। इस आयोजन से जंतर मंतर के युवाओं के विद्रोही रूप के बजाए देश के विकास व सकारात्मक निर्माण की राह को भी प्रशस्त किया।
युवाओं ने कहा कि यह आयोजन देश को आगे ले जाने में युवाओं की भूमिका में पथ प्रदर्शक के रूप में काम करेगा। गौरतलब है कि इस उज्जैन में आयोजित धर्म संसद कार्यक्रम में देश के 25 राज्यों के सैकड़ों युवा इस आयोजन में शामिल होने आए हैं।
युवाओं को धर्म व देश को समझने की मिलेगी नई राह
जंतर-मंतर पर जो हुआ, उसके जिम्मेदारों को सजा हुई और एफआइआर हुई। उज्जैन में हो रहे आयोजन का उद्देश्य है कि युवा धर्म से जुड़े। इस आयोजन का उद्देश्य है कि कैसे युवाओं व समाज को जोड़कर आगे ले जा सके। जेन जी की मांगे पहले पूरी हो जाती वो नहीं भड़कती। इस तरह के आयोजन से युवाओं को भी धर्म व देश को समझने की एक नई राह मिलेगी। -राम बाबू कुमार, शोधार्थी, महात्मा गांधी केशव विद्यापीठ, बनारस
धर्म की बात करने आय युवा जेन जी ही है
युवाओं की क्या परिभाषा होना चाहिए वो उसकी जानकारी हमें धर्म युवा संसद में मिली। युवा का मतलब यह नहीं कि हर जगह उपद्रव मचाए। अपने भीतर की अग्नि को शांत करना और क्षमता का आंकलन कर व्यवस्थित उपयोग करना ही युवा की असली परिभाषा है। युवा अपने सामर्थ का सही उपयोग करे। जेन जी कोई अलग प्रजाति या पीढ़ी नहीं है। धर्म की बात करने आए युवा जेन जी है। राहुल गांधी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं के साथ जेन जी व अल्फा से भी बात करेंगे। उन्होंने ही समाज में इस तरह भेद खड़ा किया है। -उदयांस पांडे, छात्र भोपाल
धर्म क्या होता है यह सीखा
युवा के जागरुकता के लिए यह आयोजन हो रहा है। हमने सीखा धर्म होता क्या है। इसे किस तरह लागू किया जाता है। धर्म के जो नियम बने हुए उनका अनुसरण किया जाना चाहिए। जिस तरह श्रीराम व श्रीकृष्ण ने धर्म का पालन किया वर्तमान में युवाओं को उसी तरह धर्म का पालन करना चाहिए। -कोमल शर्मा, छात्र केंद्रीय संस्कृति विवि, जयपुर
युवा धर्म को समझना चाह रहा है
धर्म व भारतीयता के विषय में इस आयोजन में बताया जा रहा है। बीते दिनों युवाओं का जो रुझान देखा गया तो उसकी भारत वर्ष में गलत छवि पड़ी। आज युवा धर्म की ओर जागृत हो रहा और समझना चाह रहा है। इस मंच के माध्यम से युवाओं काे मार्गदर्शन मिल रहा है। विद्वतजनों से राष्ट्रवाद, भारत की बेहतरी के बाते जानने को मिली। यह आयोजन युवाओं को काफी प्रेरित करेगा। -शाश्वत त्रिपाठी, विद्यार्थी चित्रकूट
ऐसे आयोजनों से युवाओं को मिलेगी सही दिशा
युवाओं को धर्म के बारे में आयोजन में बताया गया है। धर्म रीलिजन से परे है। दिल्ली की घटना के बाद इस तरह के आयोजन देश के लिए बहुत जरुरी है। युवाओं को भड़काया जाता है, युवा जल्दी दिगभ्रमित हो जाते है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को सही दिशा व राह मिलेगी। युवा अपनी ऊर्जा का बेहतर उपयोग कर पाएंगे। -वरुण मिश्रा, योगा छात्र भोपाल
वक्तव्यों को आचरण में लाने से युवा राष्ट्र स्तर पर लाएंगे परिवर्तन
यदि सारे युवा श्रद्धा, विश्वास, ऊर्जा व चेतना के साथ युवा धर्म संसद के आचरण में लाए तो उनके जीवन में लाए तो एक बड़ा परिवर्तन ला सकता है। सर संघ चालक ने संकल्प दिलवाया कि युवा अपने वक्तव्यों को अपने आचरण में लाए और इस वाक्य को मंत्र मानकर परिपालन करे तो राष्ट्र स्तर पर परिवर्तन आएगा। -मेवा प्रसाद तिवारी, शिक्षार्थी, भोपाल
धर्म, मौलिक कर्तव्य व जिम्मेदारियों को समझने का अवसर
जो दिल्ली में हुआ उससे जागरुकता बढ़ी है। जब युवा अपने हक के लिए लड़ता व कर्तव्य निभाता है तो आगे बढता है। जेन जी ऐसी जनरेशन है जिसने नवाचार माध्यम दिया है। वर्तमान समय तकनीक का है और युवाओं ने इसे आगे बढ़ाया। ऐसे ही अवसर युवाओं को आगे बढ़ाएंगे । यह आयोजन धर्म के साथ मौलिक कर्तव्य व जिम्मेदारियों को समझने का अवसर है। -गगन शर्मा, विद्यार्थी, बिलासपुर
युवाओं को मिलेगी नई दिशा
युवा धर्म संसद ने धर्म को समझने में मदद की है। इस आयोजन ने समझाया कि सिर्फ युवा होना ही काफी नहीं। भारतीय युवा होना जरुरी है। अब तक सिर्फ बाते हाेती थी लेकिन अब मूल वजह पर भी बात हो रही है। आयोजन निश्चित तौर पर युवाओं को नई दिशा दिखाएगा। -शिवांगी सिकरवार, प्रतिनिधि, कोटा
सत्य, करुणा, शुचिता व तपस्या का पाठ पढ़ा
वक्तताओं ने बताया कि सत्य से समझौता नहीं हो सकता है। सत्य के पालन से प्रेम पैदा होता है और उससे करुणा जन्म लेती है। करुणा का पालन भी शुचिता होगा। इसके लिए तपस्या करना होगी। धर्म को धारण करने से युवाओं में बदलाव आएगा। धर्म संसद जैसे विचार प्रवाह युवाओं को नई राह देंगे। -हर्षवर्धन अवस्थी, पीएचडी छात्र रायबरेली
सनातन धर्म संस्कृति को बचाने का है प्रकल्प
युवा धर्म संसद सनातन धर्म संस्कृति को बचाने का प्रकल्प है। जेन जी देश के लिए खतरा नही है। इस तरह के आयोजन मोबाइल तक सीमित पर युवाओं को भी इस ओर लेकर आएंगे। इसके लिए राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रकल्प भी काम करेंगे। -आचार्य आदित्यदेव, हरियाणा
भारतीय ज्ञान परंपरा से युवाओं को जोड़ने का प्रयास
युवा धर्म संसद के माध्यम से प्राचीन भारत की ज्ञान परंपरा को युवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है। देश के युवा व जेन जी भी अब जुड़ाव महसूस करेगी। इस तरह के आयोजन एक बड़ा बदलाव लाएंगे। -अनुभव पांडे, छात्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय
यह भी पढ़ें- रायपुर : धर्म संसद के बाद फिर से होगा सनातन धर्म को लेकर बड़ा आयोजन