महाकाल मंदिर में एक हजार साल पुरानी स्थापत्य शैली में पत्थरों को तराश रहे कलाकार, उज्जैन में आकार ले रहा प्राचीन शिव मंदिर


ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भूगर्भ से प्राप्त एक हजार साल पुराना शिव मंदिर एक बार फिर अपने पुरातन स्वरूप में नजर आने लगा है। राजस्थान के कुशल कलाकार …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 11:35:41 AM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 11:35:41 AM (IST)

महाकाल मंदिर में एक हजार साल पुरानी स्थापत्य शैली में पत्थरों को तराश रहे कलाकार, उज्जैन में आकार ले रहा प्राचीन शिव मंदिर
एक हजार साल पुरानी स्थापत्य शैली में आकार ले रहा प्राचीन शिव मंदिर। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. ज्योतिर्लिंग महाकाल : दो माह में करीब 20 फीट आकार ले लेगा प्राचीन शिव मंदिर
  2. महाकाल मंदिर में भूगर्भ से प्राप्त एक हजार साल पुराना शिव मंदिर फिर अपने पुरातन स्वरूप में नजर आने लगा है
  3. राजस्थान के कलाकार पुनर्निर्माण में एक हजार साल पुरानी उसी स्थापत्य शैली का उपयोग कर पत्थर तराश रहे हैं

नईदुनिया प्रातिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भूगर्भ से प्राप्त एक हजार साल पुराना शिव मंदिर एक बार फिर अपने पुरातन स्वरूप में नजर आने लगा है। राजस्थान के कुशल कलाकार मंदिर के पुनर्निर्माण में एक हजार साल पुरी उसी स्थापत्य शैली का उपयोग करते हुए पत्थरों की कार्बिन (तराश) कर रहे हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार आने वाले दो माह में मंदिर की करीब 20 फीट आकर ले लेगा। मंदिर की अधिकतम ऊंचाई करीब 36 फीट रहने का अनुमान है।

त्रिवेणी कला संग्रहालय के संग्रह अध्यक्ष योगेश पाल ने बताया पुराविद डॉ. रमेश यादव के निर्देशन में प्राचीन शिव मंदिर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। डॉ. यादव स्थापत्य कला के विशेषज्ञ हैं, उनके निर्देशन में प्रदेश में कई मंदिरों का पुनर्निर्माण किया गया है। एक हजार साल पुराने इस शिव मंदिर की पुर्नस्थापना में भी उसी कालखंड की शिल्प शैली तथा पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है।

पूरे मंदिर को एक हजार साल पुराना रूप प्रदान किया जा रहा है

खोदाई के समय प्राचीन शिव मंदिर का आधार भाग प्राप्त हुआ था, उसे देखकर पूरी योजना बनाई गई तथा यह निश्चय किया गया कि पुनर्निर्मित मंदिर एक हजार साल पुराना ही दिखाई दे। इसलिए आधार भाग के सारे पत्थरों पर नंबरिंग कर उन्हें खोल लिया गया और राजस्थान से मंगवाए गए पत्थरों को उसी स्थापत्य शैली में तराश कर नख से शिखर तक पूरे मंदिर को एक हजार साल पुराना रूप प्रदान किया जा रहा है।

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पत्थरों को तराशते राजस्थान के कलाकार। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

बारिश में भी जारी रहेगा निर्माण

डॉ. पाल ने बताया प्राचीन शिव मंदिर का पुनर्निमाण बारिश के दिनों में भी जरी रहेगा। क्योंकि पत्थरों को तराशने का काम गढ़कालिका माता मंदिर के समीप स्थित श्री विष्णु चतुष्टिका मंदिर परिसर में किया जा रहा है। महाकाल मंदिर में जिस जगह मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, वहां सभी सुविधाएं उपलब्ध है तथा फर्श भी पक्का है ऐसे में बारिश में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आएगी।



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