महाकाल की चौथी सवारी में आज भक्तों को बांटे जाएंगे बेल, रुद्राक्ष और पारिजात के पौधे
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। श्रावण-भाद्रपद मास में सोमवार को भगवान महाकाल की चौथी और श्रावण मास की आखिरी सवारी निकलेगी। इस बार सवारी सिर्फ आस्था का उत्सव नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगी। वन विभाग सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं को बेलपत्र, रुद्राक्ष और पारिजात के तीन हजार से अधिक पौधे वितरित करेगा।
पौधे लेकर जाने वाले श्रद्धालुओं को इनके संरक्षण का संकल्प भी दिलाया जाएगा। उद्देश्य है कि महाकाल की सवारी से घर पहुंचने वाला एक पौधा आने वाले वर्षों में हरियाली के साथ पूजा की सामग्री का आधार भी बने।
चार स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा
सवारी शाम चार बजे महाकाल मंदिर से शुरू होगी। चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव और नंदी पर उमा-महेश स्वरूप में भगवान नगर भ्रमण करेंगे। सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बख्शी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। यहां शिप्रा जल से भगवान का अभिषेक और पूजन होगा। इसके बाद सवारी विभिन्न मार्गों से होते हुए शाम करीब सात बजे महाकाल मंदिर पहुंचेगी।
उमा-महेश देंगे संतुलन का संदेश
चौथी सवारी में उमा-महेश स्वरूप को विशेष महत्व दिया गया है। शिव और शक्ति का यह संयुक्त स्वरूप जीवन और सृष्टि के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इसी भाव को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए इस बार सवारी की थीम पर्यावरण संरक्षण रखी गई है।
तीन पौधे, तीन धार्मिक मान्यताएं
बेलपत्र : शिव पूजा का प्रिय
भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है। इसके तीन पत्तों को त्रिदेव, त्रिनेत्र और प्रकृति के तीन गुणों का प्रतीक माना जाता है। वन विभाग श्रद्धालुओं को बेल के पौधे देकर इसे घर-आंगन में लगाने के लिए प्रेरित करेगा।
रुद्राक्ष : शिव से जुड़ी आस्था
रुद्राक्ष को भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसकी उत्पत्ति महादेव के आंसुओं से हुई। श्रद्धालुओं को रुद्राक्ष के पौधे देकर इसे संरक्षित करने का संदेश दिया जाएगा।
पारिजात : देववृक्ष की मान्यता
पारिजात के फूल भगवान शिव को प्रिय माने जाते हैं। वन विभाग का उद्देश्य है कि भविष्य में पारिजात के पौधे और फूल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों।
सवारी में यह खास
- 5 किलोमीटर लंबा सवारी मार्ग
- 5 ड्रोन संपूर्ण मार्ग की करेंगे चौकसी
- 1500 जवान सुरक्षा में रहेंगे तैनात
- 250 कैमरों से रखी जाएगी निगरानी
- 3 हजार पौधे बांटेगा वन विभाग
- 9 पारंपरिक मंडल भी शामिल रहेंगे
अब भाद्रपद मास में निकलेगी सवारी
- 31 अगस्त : भाद्रपद मास की पहली सवारी
- 7 सितंबर : भाद्रपद मास की दूसरी और राजसी सवारी
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