अब हर भक्त को मिलेगा महाकाल के भांग शृंगार का अवसर, बुकिंग आम श्रद्धालुओं के लिए भी खुली


इस बार मंदिर प्रबंधन समिति ने व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इसे अधिक पारदर्शी और सर्वसुलभ बनाने का निर्णय लिया है। अब केवल पुजारी ही नहीं, बल …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 07:12:05 PM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 07:12:05 PM (IST)

अब हर भक्त को मिलेगा महाकाल के भांग शृंगार का अवसर, बुकिंग आम श्रद्धालुओं के लिए भी खुली
अब हर भक्त को मिलेगा महाकाल के भांग शृंगार का अवसर (AI Generated Image)

HighLights

  1. अब आम भक्त भी कर सकेंगे भांग शृंगार के लिए आवेदन, प्रक्रिया शुरू
  2. शृंगार बुकिंग के लिए संबंधित पुजारी का सहमति पत्र होगा अनिवार्य
  3. ज्योतिर्लिंग संरक्षण के लिए भांग की मात्रा घटाकर की गई साढ़े तीन किलो

राजेश वर्मा, नईदुनिया, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास के दौरान होने वाले भगवान महाकाल के भांग श्रृंगार की बुकिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बार मंदिर प्रबंधन समिति ने व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इसे अधिक पारदर्शी और सर्वसुलभ बनाने का निर्णय लिया है। अब केवल पुजारी ही नहीं, बल्कि आम भक्त भी शृंगार के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि आवेदन के साथ संबंधित पुजारी का सहमति पत्र संलग्न करना अनिवार्य रहेगा।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, 30 जुलाई से 28 अगस्त तक श्रावण मास की सभी तिथियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद चयन समिति द्वारा तिथियों का निर्धारण किया जाएगा। पिछले वर्षों में पुजारी अपने यजमानों के लिए सीधे बुकिंग करा लेते थे, जबकि इस बार पूरी प्रक्रिया मंदिर समिति की निगरानी में होगी।

शृंगार का महत्व और अनुमानित खर्च

उल्लेखनीय है कि महाकाल मंदिर में प्रतिदिन संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल का भांग और सूखे मेवों से विशेष श्रृंगार किया जाता है। देशभर के श्रद्धालु अपनी मनोकामना, जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा अन्य विशेष अवसरों पर इस शृंगार का संकल्प लेते हैं। एक भांग श्रृंगार में औसतन 10 से 12 हजार रुपये तक का खर्च आता है। मंदिर समिति का मानना है कि नई व्यवस्था से तिथियों के आवंटन को लेकर विवाद की संभावना समाप्त होगी और सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिल सकेगा।

निराकार से साकार रूप के दर्शन

शिवलिंग भगवान शिव का निराकार स्वरूप माना जाता है। संध्या आरती के दौरान भांग, मावा, हल्दी और चंदन से किया जाने वाला शृंगार भक्तों को भगवान महाकाल के साकार स्वरूप के दर्शन कराता है। विशेष पर्वों पर भगवान का गणेश, श्रीकृष्ण, सूर्य, चंद्रमा और शेषनाग सहित विभिन्न स्वरूपों में भी शृंगार किया जाता है, जबकि सामान्य दिनों में वे राजाधिराज के रूप में दर्शन देते हैं।

सुरक्षा के लिए घटाई गई भांग की मात्रा

महाकाल के भांग श्रृंगार में वर्तमान में अधिकतम साढ़े तीन किलो भांग का उपयोग किया जाता है। पहले यह मात्रा पांच से सात किलो तक होती थी। ज्योतिर्लिंग संरक्षण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा के बाद भांग सहित पूजन सामग्री की मात्रा सीमित की गई है, ताकि ज्योतिर्लिंग की संरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

भांग श्रृंगार से जुड़े प्रमुख तथ्य

  • श्रावण मास : 30 जुलाई से 28 अगस्त
  • भक्त भी कर सकेंगे आवेदन
  • पुजारी का सहमति पत्र जरूरी
  • चयन समिति करेगी तिथि आवंटन
  • एक शृंगार पर औसतन 10-12 हजार रुपये खर्च
  • साढ़े तीन किलो तक भांग का उपयोग
  • संध्या आरती में प्रतिदिन होता है शृंगार

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