इस साल उज्जैन के महाकाल महालोक से दुनिया में जाएगा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का संदेश
मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को साफ निर्देश दिए कि इस बार योग दिवस को प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों से जोड़ा जाए। उन्हाेंने सुझाव दिया क …और पढ़ें

HighLights
- स्थानीय प्रशासन ने इसे एक राष्ट्रीय स्तर का भव्य आयोजन बनाने की योजना बनाई है
- मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि योग दिवस को प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों से जोड़ा जाए
- सुझाव दिया कि उज्जैन का मुख्य आयोजन ‘महाकाल महालोक’ में कराया जाए
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) पर एक अद्भुत और ऐतिहासिक नजारा दिखने वाला है। भारत के गौरवशाली इतिहास और अध्यात्म का सबसे बड़ा संदेश इस बार कहीं और से नहीं, बल्कि ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर परिसर के नवविस्तारित ‘महाकाल महालोक’ से जाएगा। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन के सुझाव पर स्थानीय प्रशासन ने इसे एक राष्ट्रीय स्तर का भव्य आयोजन बनाने की योजना बनाई है।
दरअसल, बुधवार को एक उच्च स्तरीय ‘वर्चुअल क्लास’ बैठक में मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को साफ निर्देश दिए कि इस बार योग दिवस को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम न बनाकर, इसे देश की प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों से जोड़ा जाए।
उन्हाेंने स्वयं यह सुझाव दिया कि उज्जैन का मुख्य आयोजन ‘महाकाल महालोक’ में कराया जाए। इस पर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि शीघ्र ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं अफसरों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रुपरेखा जारी की जाएगी।
क्यों खास है महाकाल महालोक में सामूहिक योग
भगवान शिव को सृष्टि का ”आदियोगी” यानी पहला योग गुरु माना गया है, जिन्होंने योग का ज्ञान सप्तऋषियों को दिया था। ऐसे में स्वयं महाकाल के दरबार और महालोक की दिव्य ऊर्जा के बीच जब हजारों लोग एक सुर में प्राणायाम और योग करेंगे, तो वह केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि अध्यात्म और आरोग्य का एक महा-उत्सव बन जाएगा। महालोक की भव्यता के बीच होने वाले इस आयोजन की तस्वीरें जब वैश्विक पटल पर जाएंगी, तो देश और मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक साख को एक नया मुकाम मिलेगा।
यह भी जानिये
अब तक उज्जैन का जिला स्तरीय योग कार्यक्रम दशहरा मैदान या कालिदास संस्कृत अकादमी में होता आया था, लेकिन इस बार प्रशासन ने व्यावहारिक और तकनीकी वजहों से एक बड़ा और समझदारी भरा फैसला लिया है। कालिदास संस्कृत अकादमी में फिलहाल डोम निर्माण का काम चल रहा है, जिसकी वजह से वहां के पेवर ब्लाक उखाड़ दिए गए हैं। ऐसे में वहां इतने बड़े स्तर पर योग मैट बिछाना और लोगों का बैठना मुमकिन नहीं। जून का महीना यानी प्री-मानसून की दस्तक। पिछले कुछ सालों का कड़वा अनुभव रहा है कि दशहरा मैदान पर अचानक होने वाली बेमौसम बरसात की वजह से ऐन वक्त पर योग दिवस की पूरी व्यवस्थाएं पानी-पानी हो जाती थीं। इन सभी दिक्कतों को पीछे छोड़ते हुए प्रशासन ने मुख्य सचिव के सुझाव को अमल में लाने के लिए ”महाकाल महालोक” में कार्यक्रम करने की योजना बनाई है।
उज्जैन में श्री महाकाल महालोक से मिली गति, सिंहस्थ-2028 से मिलेगा वैश्विक क्षितिज