उज्जैन में 914 गांवों की प्यास बुझाने वाली ‘नर्मदा-गंभीर परियोजना’ की टेस्टिंग शुरू
गंभीर बांध पर नया विशाल इंटकवेल और झिरन्या गांव में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो गया है। जल निगम ने अब जलप्रदाय का परीक्षण भी प्रारम्भ कर दिया है। …और पढ़ें

HighLights
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था 1275 करोड़ रुपये की परियोजना का भूमिपूजन
- ‘नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना’ अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है
- जल निगम ने अब जलप्रदाय की टेस्टिंग भी प्रारम्भ कर दी है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मालवांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट काे स्थायी रूप से खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भूमिपूजित 1275 करोड़ रुपये की ‘नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना’ अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है।
उज्जैन के गंभीर बांध पर नया विशाल इंटकवेल और झिरन्या गांव में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया है। सिस्टम की मजबूती जांचने के लिए जल निगम ने अब जलप्रदाय का परीक्षण (टेस्टिंग) भी प्रारम्भ कर दिया है। अब केवल बची हुई पाइपलाइन जोड़ने का काम शेष है। अफसर से पूछा गया कि घर-घर पानी नियमित रूप से कब से मिलेगा, इस पर जवाब मिला- बहुत जल्द।
तस्वीरें दे रही हैं गवाही, ढांचागत काम लगभग पूरा
योजना के धरातल पर आने की तस्वीर इन दो निर्माण कार्यों से साफ देखी जा सकती है। पहली तस्वीर घटि्टया विकासखंड के ग्राम झिरन्या (उन्हेल रोड) में बने अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) की है, जिसका काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं दूसरी तस्वीर गंभीर बांध के जल भंडारण क्षेत्र में बने नए विशाल इंटकवेल की है, जो पानी की लिफ्टिंग के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है।
परियोजना की वर्तमान स्थिति को लेकर जब मध्य प्रदेश जल निगम के अधिकारियों से बात की गई, तो उनका कहना है कि योजना के मुख्यतः समस्त अवयव जैसे—इंटेक वेल, जल शोधन संयंत्र, एम बी आर (मास्टर बैलेंसिंग रिज़ैवर), आई पी एस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन) और टंकियां इत्यादि लगभग पूर्ण हो गए हैं। अफसरों के मुताबिक, अब केवल कुछ पाइपलाइन बिछाने और जोड़ने का कार्य ही शेष बचा है, जिसे बहुत शीघ्रता से पूर्ण किया जा रहा है।
2023 में हुआ था प्रोजेक्ट शुरू, 2025 में हो जाना था पूरा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का जमीनी स्तर पर काम सितंबर-2023 में शुरू हुआ था। काम शुरू होने के चार महीने बाद 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका विधिवत भूमि पूजन किया था। जल निगम ने इस काम को पूरा करने की अंतिम तारीख 7 नवंबर 2025 तय की थी।
गंभीर बांध के पास 20 मीटर गहरा और 14 मीटर व्यास वाला इंटकवेल, पंप हाउस तो समय पर आकार ले चुका था मगर परियोजना की असली रीढ़- झिरन्या का जल शोध संयंत्र और ग्रामीण इलाकों में आंतरिक पाइपलाइन बिछाने तथा पानी की टंकियों का निर्माण कार्य सबसे अधिक लंबित रहा। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में 1856 करोड़ रुपये की नर्मदा–शिप्रा बहुउद्देशीय परियोजना की पाइपलाइन भी बाधा बनी।
‘नर्मदा-गंभीर परियोजना’ के लटकने से उन हजारों ग्रामीण परिवारों का इंतजार लंबा हुआ है, जो बरसों से घरों में नर्मदा जल आने की आस लगाए बैठे हैं। योजना के तहत दो जिलों (उज्जैन के 830 और इंदौर के देपालपुर विकासखंड के 84) के कुल 914 गांवों में घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाना है।

यह भी जानिये
- योजना के तहत 354 गांवों में जल निगम द्वारा खुद नई पाइपलाइन और टंकियां बनाकर सीधे घर-घर पानी पहुंचाया जाएगा। जबकि शेष बचे गांवों में पीएचई विभाग द्वारा ”जल जीवन मिशन” के अंतर्गत पहले से बनाई गई पानी की टंकियों को इस नर्मदा जल से भरकर सप्लाई दी जाएगी।
- गंभीर बांध के जल भंडारण क्षेत्र में एक इंटकवेल चार दशक पहले 25 एमजीडी का बनाया गया था, जिसके माध्यम से वर्तमान में उज्जैन शहर में जल प्रदाय किया जाता है। इसकी गहराई 20 मीटर और व्यास 25 मीटर है। इसके अलावा, जल प्रदाय व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए एक अन्य इंटकवेल गऊघाट पर शिप्रा नदी के किनारे भी बनाया गया है, जिसकी गहराई 15 मीटर और व्यास 12 मीटर है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह नया (दूसरा) इंटकवेल मिल जाने से पानी का संकट हमेशा के लिए दूर होने का दावा है। बहरहाल, टेस्टिंग शुरू होने से गांवों में उम्मीद तो जागी है, लेकिन जनता चाहती है कि अफसर अब तारीख छिपाने के बजाय जल्द से जल्द नलों में पानी चालू करें।