भीषण गर्मी में पानी के लिए आधा शहर हो रहा परेशान, पार्षदाें ने मुस्कुराकर सौंपा ज्ञापन
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। आधा शहर पानी के लिए तरस रहा है। कहीं नलों में गंदा पानी आ रहा है तो कहीं सप्लाई इतनी कम हो गई है कि लोगों को रोजमर्रा की जरुरतें पूरी करना मुश्किल पड़ रहा है।
मार्ग चौड़ीकरण वाले इलाकाें में हालात सबसे ज्यादा खराब है। यहां के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। इसी समस्या को लेकर सोमवार को कांग्रेस पार्षद दल नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपने पहुंचा, लेकिन वहां का दृश्य लोगों की पीड़ा से बिलकुल उलट नजर आया। जिस मुद्दे पर जनता परेशान है, उसी मुद्दे का ज्ञापन पार्षदों ने हंसते-मुस्कुराते दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पानी जैसा गंभीर संकट भी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है।
नेता प्रतिपक्ष डा. रवि राय ने आयुक्त को बताया कि महाकाल की नगरी में जल संकट विकराल रूप ले चुका है। शहर के कई इलाकों, विशेषकर चौड़ीकरण प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति भयावह है। वहां नलों में पानी आना जैसे सपना हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जहां सप्लाई हो भी रही है, वहां मात्र 15 मिनट पानी दिया जा रहा है। वह पानी इतना दूषित और मटमैला है कि पीना तो दूर, हाथ धोने में भी डर लगे।
लोग निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं
पार्षदों ने आरोप लगाया कि निगम की लापरवाही के कारण लोग निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं। एक तरफ जनता टैक्स भर रही है, दूसरी तरफ पानी खरीदकर गुजारा कर रही है। शहर की टंकियां पूरी क्षमता से नहीं भरी जा रही हैं, जिससे प्रेशर की समस्या बनी हुई है। डॉ. राय ने कहा, “ठेकेदार निविदाओं में रुचि नहीं ले रहे, पाइपलाइनें फूटी पड़ी हैं और अधिकारी केवल कुर्सी पर बैठकर आश्वासन दे रहे हैं।
डेढ़ साल का पानी सात महीने में खत्म, आखिर कहां गया पानी
शहर में जल आपूर्ति का मुख्य केंद्र गंभीर में 2250 एमसीएफटी यानी मिलियन क्यूबिक फीट जल संग्रहण की क्षमता है। अक्टूबर- 2025 तक ये लबालब भरा था। उज्जैन शहर की आबादी 7 लाख है, जिसकी आधी आबादी पानी के लिए निजी बोरिंग और कुएं आदि पर निर्भर है। वजह, 90 से अधिक कालोनियों में पानी की पाइपलाइन न बिछना है।
केंद्र सरकार के अनुसार 135 लीटर पानी प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिदिन की जरूरत है। इस हिसाब से सारे प्राकृतिक लास घटाने के बाद शहर की दैनिक जरुरत 4.5 एमसीएफटी के आसपास होती है। इस हिसाब से 2250 एमसीएफटी पानी शहर में डेढ़ वर्ष प्रदाय किया जा सकता है मगर ये बीते सात महीने में ही हर साल की तरह उम्मीद से अधिक खाली हो गया है। बांध में अभी 494 एमसीएफटी पानी है, जबकि पिछले साल इसी समय 519 एमसीएफटी पानी था। सवाल यह है कि आखिर करोड़ों लीटर पानी गया कहां। क्या यह केवल वाष्पीकरण है या कुप्रबंधन की कोई बड़ी साजिश।
चेतावनी: व्यवस्था सुधारे वरना होगा उग्र आंदोलन
ज्ञापन सौंपने के दौरान पार्षद माया त्रिवेदी, सपना सांखला सहित अन्य पार्षदों ने स्पष्ट किया कि यदि हैंडपंपों की मरम्मत और नई मोटरों का काम तुरंत शुरू नहीं हुआ, तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। इस दौरान अपर आयुक्त पवन सिंह व संतोष टैगोर सहित तकनीकी अमला भी मौजूद रहा। यहां बता दे कि जब बांध का गला सूखने लगा है, तब निगम प्रशासन 16 लाख रुपये का टेंडर जारी कर बांध के छोटे गड्ढों में बचे पानी को इकट्ठा करने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञ इसे ‘प्यास लगने पर कुआं खोदने’ जैसी कवायद बता रहे हैं।
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