उज्जैन में ईंधन बचाने को बस में सवार हुए अफसर, 9 किमी शिप्रा तट की पदयात्रा की
कच्चे रास्तों, झाड़ियों और निर्माणाधीन क्षेत्रों के बीच से गुजरते हुए त्रिवेणी क्षेत्र तक निर्माणाधीन घाट का मुआयना किया। पांच दिन में कुल 29 किमी लंब …और पढ़ें

HighLights
- अफसर बोले- पार्किंग से घाट तक की दूरी डेढ़ किमी से ज्यादा नहीं होगी
- एक निश्चित जगह पहुंचकर उन्होंने आगे की 9 किमी लंबी यात्रा पैदल की
- घाट तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान बनाने को 140 स्थान सड़क बनाने को चिह्नित किए
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर बुधवार को स्थानीय अधिकारियों के निरीक्षण में देखने को मिला। संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, यूडीए के सीईओ सहित विभिन्न विभाग के अधिकारी अलग-अलग अपनी कार में सवार न होकर एक बस में सवार होकर शिप्रा नदी के तट का निरीक्षण करने पहुंचे।
एक निश्चित जगह पहुंचकर उन्होंने आगे की 9 किमी लंबी यात्रा पैदल की। शुरुआत गऊघाट से की। कच्चे रास्तों, झाड़ियों और निर्माणाधीन क्षेत्रों के बीच से गुजरते हुए त्रिवेणी क्षेत्र तक निर्माणाधीन घाट का मुआयना किया। बताया कि पांच दिन में कुल 29 किमी लंबे घाट निर्माणाधीन घाट का निरीक्षण किया और घाट तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान बनाने को 140 स्थान सड़क बनाने को चिह्नित किए।
योजना ऐसी बनाई जा रही है कि पार्किंग से घाट तक की दूरी डेढ़ किमी से ज्यादा न हो। यानी श्रद्धालुओं को स्नान करने के लिए डेढ़ किलोमीटर से अधिक पैदल नहीं चलना पड़े। इन एप्रोच रोड्स के निर्माण से घाटों पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं का प्रवाह व्यवस्थित रहेगा और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
संभागायुक्त आशीष सिंह के अनुसार, एप्रोच रोड के लिए चिन्हित स्थानों की सूची अब पुलिस विभाग को सौंपी जाएगी ताकि यातायात और भीड़ नियंत्रण का सटीक प्लान तैयार किया जा सके। इस निरीक्षण में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप सोनी और अन्य विभागीय अधिकारी भी शामिल रहे।
यह भी जानिये
- मध्यप्रदेश की सरकार उज्जैन में शिप्रा नदी पर 29.21 किलोमीटर लंबे नए घाट बना रही है।
- घाट तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को कम से कम पैदल चलना पड़े और वे सुरक्षित स्नान कर पाए, इस व्यवस्था पर प्रशासन का फोकस है।
- शिप्रा नदी को शिप्रा के ही जल से भरने के लिए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी बांध परियोजना अंतर्गत बांध का निर्माण किया जा रहा है।
- शिप्रा नदी में कान्ह नदी का दूषित पानी न मिले, इसके लिए कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना काे धरातल पर उतारा जा रहा है।
- शिप्रा के दोनों किनारों को घाट से जोड़ने के लिए मुख्य सिक्सलेन सड़क बनाने को उज्जैन विकास प्राधिकरण कार्रवाई कर रहा है। इसी सड़क से घाट तक पहुंच के लिए एप्रोच रोड़ बनाने के लिए अधिकारियों ने पांच दिन पैदल भ्रमण कर 140 पाइंट चिह्नित किए हैं।
- वर्तमान 9 किलोमीटर लंबे घाटों की मरम्मत एवं सुंदरीकरण का काम वर्षाकाल के बाद प्रारंभ होने की उम्मीद है।