उज्जैन में सती गेट का पिलर तक निगल गए कब्जे, बुलडोजर चला तो खुली ‘संरक्षित अतिक्रमण’ की पोल
सतीगेट मार्ग चौड़ीकरण के दौरान जैसे ही किनारे की दुकान पर कार्रवाई हुई, वैसे ही शहर की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर देने वाला दृश्य साम …और पढ़ें

HighLights
- महाकाल सवारी मार्ग पर वर्षों से गेट के भीतर दबी थी दुकान
- चौड़ीकरण में टूटी दीवार तो सामने आया प्रशासनिक सिस्टम का सच
- भगवान महाकाल की शाही सवारी जहां से गुजरती है, उसी मार्ग पर अतिक्रमण
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। भगवान महाकाल की शाही सवारी जिस ऐतिहासिक मार्ग से गुजरती है, उसी मार्ग पर स्थित प्राचीन सतीगेट वर्षों तक अतिक्रमण की कैद में दबा रहा और जिम्मेदार विभाग देखते रहे। सतीगेट मार्ग चौड़ीकरण के दौरान जैसे ही किनारे की दुकान पर कार्रवाई हुई, वैसे ही शहर की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर देने वाला दृश्य सामने आ गया। पता चला कि प्राचीन सतीगेट के एक पूरे पिलर को पड़ोसी निर्माण ने अपने भीतर समेट लिया था। पिलर के सामने स्थायी दुकान संचालित हो रही थी।
तस्वीर अब केवल अतिक्रमण की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की है जिसकी जिम्मेदारी शहर को अतिक्रमण मुक्त रखने की है। सवाल यह है कि क्या नगर निगम, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन को यह दिखाई नहीं दिया कि ऐतिहासिक धरोहर का मूल ढांचा तक निजी कब्जे में बदल चुका है? यदि दिखाई दिया तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि नहीं दिखाई दिया तो फिर शहर में अतिक्रमण नियंत्रण की पूरी व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
500 से अधिक दुकानें और मकान जद में
दरअसल, कोयला फाटक से छत्री चौक तक 15 मीटर चौड़ीकरण परियोजना के तहत सतीगेट क्षेत्र में तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी है। इस परियोजना की जद में 500 से अधिक दुकानें और मकान आ रहे हैं। बीते दिनों प्रभावितों ने महापौर, निगम आयुक्त और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया था कि कार्रवाई निष्पक्ष नहीं हो रही। उनका कहना था कि जिन परिवारों ने 1930 के दशक में ही मार्ग चौड़ीकरण के लिए अपनी जमीन छोड़ दी थी, आज सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं को उठाना पड़ रहा है। प्रभावितों ने दस्तावेजों के साथ दावा किया कि सतीगेट के उत्तरी हिस्से में कई मकान पहले से 15 फीट पीछे हैं, जबकि दक्षिणी हिस्से में निर्माण सीधे पिलरों से सटे हुए हैं। अब कार्रवाई के दौरान जब एक दुकान टूटी और पिलर पूरी तरह खुलकर सामने आया, तो यह आरोप भी मजबूत हो गया कि वर्षों तक प्रभावशाली लोगों के कब्जों पर आंखें मूंदी गईं।
निष्पक्ष कार्रवाई होती तो आज ऐतिहासिक सतीगेट का यह हाल नहीं होता
क्षेत्र के व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई होती तो आज ऐतिहासिक सतीगेट का यह हाल नहीं होता। धीरे-धीरे गेट के आसपास निर्माण बढ़ते गए और प्रशासनिक फाइलों में सब सामान्य चलता रहा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि महाकाल सवारी मार्ग जैसी संवेदनशील और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़क पर भी ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित नहीं रह सकी।
नगर निगम ने इस मार्ग चौड़ीकरण कार्य को 18 महीने में पूरा करने का अनुबंध किया है। करीब नौ महीने गुजर चुके हैं और अब भी बड़ा हिस्सा अधूरा है। बारिश शुरू होने से पहले काम पूरा करना चुनौती बना हुआ है। लेकिन सतीगेट से सामने आई तस्वीर ने चौड़ीकरण परियोजना को अब केवल विकास कार्य नहीं रहने दिया है। यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही, राजनीतिक संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा से सीधे जुड़ गया है।
एमआईसी में उठा सती गेट का मुद्दा
शनिवार को हुई एमआईसी की बैठक जल कार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा ने सती गेट चौड़ीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार सड़क को सतीगेट के सेंटर से लाइन खींच, दोनों तरफ से 15 मीटर चौड़ा किया जाना चाहिए। अधिकारी इसका प्रस्ताव दें, हम स्वीकृति देंगे।
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