उज्जैन सिंहस्थ-2028 बनेगा मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का टर्निंग प्वाइंट


उज्जैन सिंहस्थ-2028 मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे ‘विकसित मध्य प्रदेश’ से जोड़ा है। श्रीमहाकाल महालोक मॉडल को व्यापक रूप से लागू किया जाएगा। उज्जैन में बुनियादी ढांचे और पर्यटन सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद है।

Publish Date: Thu, 09 Oct 2025 11:53:10 AM (IST)

Updated Date: Thu, 09 Oct 2025 11:55:44 AM (IST)

उज्जैन सिंहस्थ-2028 बनेगा मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का टर्निंग प्वाइंट
उज्जैन में महाकाल महालोक। फाइल फोटो

धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि उज्जैन सहित संपूर्ण मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित होने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इस आयोजन को ‘श्रद्धा और परंपरा’ की सीमाओं से आगे ले जाकर ‘विकसित मध्य प्रदेश’ की परिकल्पना से जोड़ा है। इसी रणनीति के तहत उज्जैन के ‘श्रीमहाकाल महालोक’ माडल को व्यापक रूप से लागू करने की योजना बनाई गई है।

मालूम हो कि वर्ष 2022 में श्रीमहाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद से अब तक करीब सात करोड़ श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल दर्ज हुआ। रोजगार के अवसर बढ़े, व्यापार फला-फूला। यही माडल सिंहस्थ-2028 में भी आयोजन की आर्थिक रीढ़ बनेगा। भोपाल में मंगलवार को हुई कलेक्टर–कमिश्नर कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस आयोजन की रूपरेखा पर स्पष्ट दिशा दी है।

10 अक्टूबर के बाद सिंहस्थ की योजनाएं धरातल पर तेजी से उतरने की उम्मीद है। उज्जैन को केंद्र में रखकर सड़क, अधोसंरचना, यातायात, घाटों के सुंदरीकरण और धार्मिक-पर्यटन गतिविधियों को विश्वस्तरीय स्वरूप दिया जा रहा है।

अफसरों का साफतौर पर कहना है कि इस बार का सिंहस्थ, केवल एक महाकुंभ नहीं बल्कि उज्जैन सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संपन्नता को दुनिया के सामने लाने का बड़ा अवसर भी है, इसलिए उज्जैन को इस पूरी योजना का केंद्रीय बिंदु बनाते हुए यहां बुनियादी ढांचे, आवागमन और पर्यटक सुविधाओं को विश्वस्तरीय रूप दिया जा रहा है।

‘श्रीराम वन गमन पथ’ और ‘श्रीकृष्ण पाथेय’ योजना

मुख्यमंत्री से मिले निर्देशों के बाद अब श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय धरातल पर तेजी से उतरेगी। मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ से पहले योजना पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। मतलब साफ है उज्जैन सहित प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मार्ग, घाट और मंदिरों के सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से होंगे। ज्ञात रहे कि प्रदेश सरकार ‘राम वन गमन पथ’ नामक 1450 किलोमीटर लंबे पथ का निर्माण कर भगवान राम के वनवास मार्ग का विकास करना चाहती है और और इसी तर्ज पर ‘श्रीकृष्ण पाथेय योजना’ के तहत भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों जैसे उज्जैन में सांदीपनि आश्रम, नारायणा गांव को पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। इस योजना का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और धार्मिक स्थलों को तीर्थयात्रियों के लिए सुगम बनाना है।

यह भी जानिए

  • दो चरणों में 700 करोड़ रुपये से श्रीमहाकाल महालोक का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को प्रथम चरण के कार्यों का लोकार्पण किया था। प्रथम चरण में महाकाल मंदिर के विस्तारित क्षेत्र में भगवान शिव सहित विभिन्न देवी-देवताओं की 127 मूर्तियां विशाल स्थापित की गईं और 820 मीटर लंबी दीवार पर शिवमहापुराण में उल्लेखित घटनाओं को शैल चित्रों के माध्यम से बतलाया गया।
  • उज्जैन में ढाई वर्ष बाद 2028 में महाकुंभ सिंहस्थ लगना है, जिसमें 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान सरकार ने लगाया है और इतने लोगों को शिप्रा नदी में सुरक्षित स्नान कराने, भीड़ का प्रबंधन करने के लिए 23 हजार करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित की है, जिसमें शामिल 153 में से 42 योजनाएं धरातल पर प्रारंभ हो चुकी है। 111 योजनाएं अभी कागजी प्रक्रिया में है।

महाकाल महालोक मॉडल को व्यापक रूप से लागू करेंगे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में सिंहस्थ में श्रीमहाकाल महालोक मॉडल को व्यापक रूप से लागू किया जाएगा। श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय योजना को जल्दी ही धरातल पर उतारा जाएगा। – रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर।



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