शिल्प, शास्त्र, संस्कृति व इतिहास का जीवंत दस्तावेज हैं उज्जैन की दरों दीवारें


नगर में आज भी यहां के दरों दीवार इसकी गवाही दे रहे हैं। शहर में यत्र-तत्र दीवारों में उद्धृत मूर्तियां भारतीय सनातन संस्कृति व सभ्यता का दर्शन करा रही …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 19 May 2026 10:57:06 AM (IST)Updated Date: Tue, 19 May 2026 10:57:06 AM (IST)

विश्व संग्रहालय दिवस: शिल्प, शास्त्र, संस्कृति व इतिहास का जीवंत दस्तावेज हैं उज्जैन की दरों दीवारें
रामघाट पर तांत्रिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है नृत्यरत ईशन (शिव) की दुर्लभ मूर्ति । दूसरी तस्वीर में महाकाल मंदिर में कोटितीर्थ कुंड समीप स्थापित प्राचीन प्रतिमा। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. यहां चार दीवारी में नहीं प्राकृतिक परिवेश में प्रदर्शित है कला, संस्कृति
  2. शहर में यत्र-तत्र दीवारों में उद्धृत मूर्तियां भारतीय सनातन संस्कृति व सभ्यता का दर्शन करा रही है
  3. घाट क्षेत्र की दीवारों में प्राचीन मूर्तियां संरक्षित हैं

राजेश वर्मा, नईदुनिया उज्जैन। प्राचीन वस्तुओं का संकलन और संग्रह इतिहास बनाता है। इसका संरक्षण जिन स्थानों पर किया जाता है उसे हम सभी संग्रहालय के नाम से जानते हैं।

मगर खुले संग्रहालय के रूप में शिल्प, शास्त्र, संस्कृति व इतिहास को चार दीवार के भीतर बंद रखने के बजाय खुले आसमान के नीचे उनके प्राकृतिक परिवेश में संजोने की कला उज्जैन से सीखी जा सकती है। यह नगर अनादिकाल से इस हुनर में माहिर है, आज भी यहां के दरों दीवार इसकी गवाही दे रहे हैं। शहर में यत्र-तत्र दीवारों में उद्धृत मूर्तियां भारतीय सनातन संस्कृति व सभ्यता का दर्शन करा रही है। विश्व संग्रहालय दिवस पर नईदुनिया की खास रिपोर्ट…

शिप्रा के तट बने कला दीर्घा

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रामघाट की दीवारों में संरक्षित एक हजार साल से अधिक पुरानी मूर्तियां। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट, नृसिंह घाट, सुनहरी घाट, भैरवगढ़ के आसपास का संपूर्ण क्षेत्र कला दीर्घा बना हुआ है। घाट क्षेत्र की दीवारों में प्राचीन मूर्तियां संरक्षित हैं। विक्रम विश्व विद्यालय के पुरातत्व वेत्ता प्रो. डा. रमण सोलंकी ने बताया उज्जैन हजारों साल से मूर्ती शिल्प, स्थापत्य कला, जल संरचनाओं के निर्माण में अग्रणीय रहा है। टेराकोटा से खिलौने, पात्र बनाने की कला में भी हमारी कुशलता ओरों के लिए सीखने की विषय वस्तु हुआ करती थी, जो आज भी यहां के मंदिर तथा ऐतिहासिक स्थलों पर प्रदर्शित है।

महाकाल का कोटितीर्थ कुंड भी गवाह

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर का कोटितीर्थ कुंड खुला संग्रहालय व दीवारें कलाविथिका के रूप में भारतीय सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास को प्रदर्शित कर रहे हैं। मंदिर समिति ने कुंड के आसपास पेडल स्टैंड पर प्राचीन मूर्तियों को संरक्षित कर रखा है। इनके साथ इनके परिचय भी है, जो आने वाले भक्तों को इतिहास से परिचित करा रहा है। कोटितीर्थ कुंड के आसपास छोटे-छोटे कमरों में भी मूर्तियों का भंडार है। मंदिर समिति की हरसिद्धि धर्मशाला में भी सैकड़ों साल पुरानी मूर्तियां संरक्षित हैं।

उज्जैन में शिप्रा परिक्रमा और गंगा दशहरा स्थल का निरीक्षण करने अपनी-अपनी कार से पहुंचे अफसर



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