उज्जैन का ‘पंचायत फॉर्मूला’ अब पूरे मध्य प्रदेश को राह दिखाएगा, नरवर ग्राम पंचायत ने की एक करोड़ की टैक्स वसूली


धीरज गोमे, नईदुनिया। सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने वाली पंचायतों की तस्वीर अब बदलने की तैयारी है और इसकी शुरुआत उज्जैन से होती दिखाई दे रही है। जिले के चार ऐसे मॉडल सामने आए हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि स्थानीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और नवाचारों को बढ़ावा मिले तो ग्राम पंचायतें अपनी आय बढ़ाकर विकास की नई इबारत लिख सकती हैं।

नरवर ग्राम पंचायत की एक वर्ष में एक करोड़ रुपये से अधिक की कर वसूली, जिले की सभी ग्राम पंचायतों में सौर ऊर्जा व्यवस्था, महिलाओं द्वारा संचालित कायथा टोल प्लाजा और गांवों के विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रशिक्षण अब पूरे प्रदेश की पंचायतों के लिए प्रेरणा बनने जा रहे हैं।

नई राह दिखाने वाला मॉडल

इन चार मॉडलों ने छठवें राज्य वित्त आयोग का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। आयोग प्रदेशभर में ऐसे सफल प्रयोगों का अध्ययन कर अगले पांच वर्षों के लिए अपनी अनुशंसाएं तैयार कर रहा है। संकेत हैं कि उज्जैन के सफल प्रयोगों को अन्य जिलों की पंचायतों में भी अपनाने की सिफारिश की जा सकती है। यही वजह है कि अब उज्जैन का ‘पंचायत फॉर्मूला’ पूरे प्रदेश के लिए नई राह दिखाने वाला मॉडल बनकर उभरा है।

सबसे अधिक चर्चा जनपद पंचायत नरवर की ग्राम पंचायत की रही, जिसने वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये से अधिक का कर संग्रह कर प्रदेश में स्व-राजस्व का नया मानक स्थापित किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश ग्राम पंचायतें आज भी सरकारी अनुदान पर अधिक निर्भर हैं।

स्थानीय कर संग्रह, वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन से नरवर ने साबित किया है कि पंचायतें चाहें तो अपनी आर्थिक स्थिति स्वयं मजबूत कर सकती हैं। उज्जैन की दूसरी बड़ी उपलब्धि जिले की सभी ग्राम पंचायतों में सौर ऊर्जा व्यवस्था स्थापित करना है।

इससे बिजली पर होने वाला खर्च कम हुआ है और पंचायतें ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ी हैं। इसके साथ ही 43 ग्राम पंचायतों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था ने ग्रामीण स्वच्छता और सेवा प्रबंधन का नया मॉडल प्रस्तुत किया है।

महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी उज्जैन की अलग पहचान

महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी उज्जैन ने अलग पहचान बनाई है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित कायथा टोल प्लाजा ने तीन वर्षों में 1.80 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर यह साबित किया कि सामुदायिक संस्थाओं को जिम्मेदारी देकर आर्थिक गतिविधियों का सफल संचालन किया जा सकता है।

वहीं ‘प्रोजेक्ट स्वाध्याय’ के तहत नौ हजार विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण देकर ग्रामीण क्षेत्रों को भविष्य की तकनीक से जोड़ने का प्रयास भी राज्य वित्त आयोग को प्रभावित करने वाले प्रमुख नवाचारों में शामिल रहा। राज्य वित्त आयोग की नजर अब ऐसे मॉडलों पर है, जो पंचायतों को सरकारी अनुदान की निर्भरता से बाहर निकालकर आत्मनिर्भर बना सकें।

उज्जैन ने अपने प्रयोगों से यह संदेश दिया है कि बेहतर प्रबंधन, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, तकनीक और जनभागीदारी के दम पर गांवों की आर्थिक तस्वीर बदली जा सकती है। यदि आयोग की अनुशंसाओं में इन मॉडलों को स्थान मिलता है तो आने वाले वर्षों में प्रदेश की पंचायतों के विकास का नया अध्याय उज्जैन से लिखे जाने की संभावना मजबूत हो जाएगी।

उज्जैन के चार मॉडल, जिन पर पूरे मध्य प्रदेश की नजर

  • नरवर पंचायत : एक वर्ष में एक करोड़ रुपये से अधिक कर संग्रह कर स्व-राजस्व का रिकॉर्ड।
  • सोलर पंचायतें : जिले की सभी ग्राम पंचायतें सौर ऊर्जा से जुड़ीं।
  • कायथा टोल प्लाजा : महिला समूह ने तीन वर्ष में 1.80 करोड़ रुपये की आय अर्जित की।
  • गांवों में एआई : ‘प्रोजेक्ट स्वाध्याय’ के तहत 9 हजार विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण।

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