आरएफआइडी बैंड से रखेंगे श्रद्धालुओं पर नजर, भीड़ में अपनों के बिछड़ने की नहीं रहेगी चिंता
इस तरह की व्यवस्था प्रयागराज कुंभ में भी नहीं थी। वहां भी लोग अपनों को खोजने के लिए काफी परेशान हो रहे थे। …और पढ़ें

HighLights
- आरपीएफ व महाराष्ट्र का एनजीओ बना रहा योजना, मिलेगी लाइव लोकेशन
- बच्चे व बुजुर्ग गुमशुदा ना हो इसके लिए रहेगी खास व्यवस्था
- प्रयागराज के कुंभ में भी नहीं थी यह व्यवस्था, नि:शुल्क रहेगी सुविधा
अमित कसेरा, उज्जैन, नईदुनिया। सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। भीड़ में लोगों को अपनों के बिछुड़ने की सबसे अधिक चिंता रहती है। खासताैर पर बच्चों व बुजुर्ग के गुम होने से लोग परेशान होते हैं। यह अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर व अन्य जानकारियां भी नहीं दे पाते हैं।
इस समस्या को दूर करने के लिए आरपीएफ अब महाराष्ट्र के एनजीओ के साथ मिलकर योजना बना रहा है। जिसके तहत स्टेशन पर उतरते ही श्रद्धालु अपने साथ आए छोटे बच्चों व बुजुर्गों की जानकारियां दर्ज करवाकर रेडिया फ्रीक्वेंसी आइडी (आरएफआइडी) बैंड हाथों में बंधवा सकता है। पूरे सिंहस्थ क्षेत्र में ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। जिससे अगर कोई बच्चा या वृद्ध गुम होता है तो एक क्लिक पर उसकी लोकेशन मिल जाएगी। जिससे उसे तलाशना बहुत ही आसान हो जाएगा।
पूरी तरह नि:शुल्क रहेगी सुविधा
आरपीएफ पोस्ट प्रभारी नरेंद्र कुमार यादव का कहना है कि आरएफआइडी लगाने व लोगों को तलाशने की पूरी व्यवस्था नि:शुल्क रहेगी। एनजीओ ही इस कवायद में आने वाला खर्च उठाएगा। हालांकि रेलवे इसे लेकर कुछ सुविधा जरूर दे सकता है। यात्रियों के लिए यह आवश्यक नहीं हैं, यात्री अपनी इच्छा होने पर इसका उपयोग कर सकेंगे। यादव का कहना है कि एनजीओ से चर्चा की जा रही है। जल्द ही इसे अमलीजामा पहनाने पर अनुमति मिल जाएगी। सिंहस्थ में बनाए जाने वाले गुमशुदा केंद्रों पर एनजीओ के कर्मचारी मौजूद रहेंगे। शिकायत मिलने पर तत्काल संबंधित व्यक्ति को तलाशने का काम शुरू हो जाएगा।
प्रयागराज कुंभ में भी नहीं थी यह व्यवस्था
खास बात यह है कि इस तरह की व्यवस्था प्रयागराज कुंभ में भी नहीं थी। वहां भी लोग अपनों को खोजने के लिए काफी परेशान हो रहे थे। खासतौर पर मोबाइल का उपयोग नहीं करने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था काफी मददगार रहेगी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि नासिक में वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ मेले में एनजीओ इसका प्रयोग करेगा। वहां प्रयोग सफल होने पर उज्जैन में भी इसे लागू किया जाएगा।