विशेषज्ञों की टीम तय करेगी उज्जैन में खड़े हनुमान विस्थापित होंगे या नहीं, प्रशासन ने कहा- अभी तक मूर्ति हटाने के कोई प्रयास नहीं किए


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : धर्मनगरी उज्जैन के छत्रीचौक के समीप स्थित खड़े हनुमान मंदिर की मूर्ति विस्थापन का मामला जटिल होता जा रहा है। मार्ग चौड़ीकरण की जद में आ रहे मंदिर को तोड़े जाने के बाद हनुमानजी की मूर्ति नए तय स्थल पर स्थानांतरित नहीं की जा सकी है। इस बीच जन आस्था विराट होती जा रही है और भक्तों का कहना है कि यह हनुमानजी की मर्जी है कि वे यहीं रहें।

हालांकि प्रशासन ने बुधवार को यह स्पष्ट किया कि उनकी ओर से अभी तक मूर्ति स्थानांतरित करने के प्रयास नहीं हुए हैं और इंटरनेट मीडिया पर चल रहे प्रशासनिक प्रयासों संबंधी समाचार भ्रामक हैं। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने नईदुनिया से चर्चा में बताया कि विशेषज्ञों की टीम से मूर्ति व उसकी गहराई आदि का परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद आगे निर्णय लेंगे।

उल्लेखनीय है कि सिंहस्थ महाकुंभ के लिए कंठाल चौराहा से छत्रीचौक तक मार्ग चौड़ीकरण कर इसे पुनर्निर्मित किया जा रहा है। योजना के तहत विस्तारित सड़क के मध्य आने वाले धार्मिक स्थलों को भी स्थानांतरित किया जा रहा है। खड़े हनुमान का मंदिर इन्हीं में से एक हैं।

गत शुक्रवार (4 सितंबर) को नगर निगम-प्रशासन की टीम ने मंदिर का स्ट्रक्चर तोड़ दिया था। तय योजना के तहत हनुमानजी की मूर्ति टंकी चौक पर पुनर्स्थापित की जानी थी। बताया जाता है कि उसी दिन मूर्ति हटाने के भी प्रयास हुए, किंतु गहराई अधिक होने से इस निर्णय को टाल दिया गया। बाद में देव स्थल पर टेंट लगा दिया गया ताकि भक्तों को दर्शन सुलभ रहें।

राजसी सवारी मार्ग में स्थित हैं खड़े हनुमान मंदिर

खड़े हनुमान मंदिर बाबा महाकाल की राजसी सवारी मार्ग पर स्थित है। 4 सितंबर को कार्रवाई हुई। 7 सितंबर को राजसी सवारी थी। प्रशासन ने राजसी सवारी निकालने को प्राथमिकता दी। इस मध्य खड़े हनुमान मंदिर पर आस्था का ज्वार उमड़ने लगा। भक्तों ने दावा किया कि प्रशासन मूर्ति नहीं हटवा पाया है। मामला इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हो गया। रोजाना महाआरती होने लगी।

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खड़े हनुमान के दर्शन के लिए दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। (नईदुनिया)

हजारों श्रद्धालु आने लगे। भक्तों की मांग उठी कि खड़े हनुमान को कहीं अन्यत्र नहीं ले जाना चाहिए। कई भक्तों ने कहा कि अगर मूर्ति को कुछ हुआ तो इसका जिम्मेदार प्रशासन होगा। हिन्दूवादी संगठनों सहित कई लोग भी मौके पर पहुंचे। मामले की संवेदनशीलता और लोगों की आस्था को देखते हुए आखिरकार प्रशासन को यह निर्णय लेना पड़ा कि विशेषज्ञों की राय के बाद ही मूर्ति विस्थापित करने का निर्णय लिया जाएगा।

राजनीतिक रंग भी

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मूर्ति विस्थापन का विरोध करते कांग्रेस कार्यकर्ता। (नईदुनिया)

इस बीच यह मामला लगातार सुर्खियों में होने के कारण राजनीतिक भी बनता जा रहा है। बुधवार को कांग्रेस जिला अध्यक्ष महेश परमार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता भी खड़े हनुमान स्थल पहुंचे और प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यहा हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। बुधवार शाम को भक्तों द्वारा इस स्थान पर हनुमान अंश फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

मंदिर 170 साल पुराना, मूर्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

खड़े हनुमान मंदिर को करीब 170 वर्ष पुराना बताया जाता है और इसके इतिहास को 1857 के आसपास से जोड़ा जाता है। लेकिन मंदिर की स्थापना और मूर्ति की उम्र अलग-अलग विषय हैं। प्रतिमा की शिल्प शैली और निर्माण को लेकर इसे कहीं अधिक प्राचीन होने के दावे भी सामने आए हैं। पुरातत्वविद् रमण सोलंकी बताते हैं कि यह मूर्ति परमारकाल, राजा भोज के समय की हो सकती है। यानी करीब एक हजार साल पहले की। यदि पुरातात्विक जांच में इसकी पुष्टि होती है तो मूर्ति का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी बढ़ जाएगा।

इंटरलॉकिंग तकनीक से बनी हो सकती है नींव

प्रारंभिक तौर पर यह संभावना जताई जा रही है कि प्रतिमा के नीचे पुराने समय की इंटरलॉकिंग तकनीक से बनी संरचना हो सकती है। पुरातत्वविद् रमण सोलंकी बताते हैं इस तरह की निर्माण पद्धति राजा भोज के काल में प्रचलित थी। इसके अंतर्गत पत्थरों या अन्य संरचनात्मक हिस्सों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि उनका आपसी भार और पकड़ पूरी संरचना को मजबूती प्रदान करे। यदि खड़े हनुमान की मूर्ति के नीचे भी ऐसी ही संरचना मिली तो यह उसकी मजबूती का महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। हालांकि, इसे अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। खुदाई और तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रतिमा का आधार वास्तव में किस तकनीक से बना है।

विशेषज्ञों की टीम इसलिए जरूरी

विशेषज्ञ यह देख सकते हैं कि मूर्ति का भार, आधार, नींव और आसपास की जमीन किस स्थिति में है तथा उसे स्थानांतरित करने पर संरचना पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? यदि विशेषज्ञों को लगता है कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया जा सकता है तो प्रशासन आगे की प्रक्रिया तय कर सकता है। इसके विपरीत यदि विस्थापन जोखिमपूर्ण पाया जाता है तो यथास्थान संरक्षण का विकल्प भी सामने आ सकता है। बुधवार को चर्चा रही कि आइआइटी, इंदौर की टीम इसकी जांच कर रही है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी यह तय नहीं किया गया है।

अब आगे तीन संभावनाएं

  • सुरक्षित शिफ्टिंग: विशेषज्ञ अनुमति दें तो तकनीकी तरीके से नई जगह स्थापित करना।
  • यथास्थान संरक्षण: मूर्ति को नहीं छेड़ना और आसपास का प्लान बदलना।
  • सड़क का नया अलाइनमेंट: तकनीकी जोखिम अधिक होने पर रोड डिजाइन में बदलाव करना।

…तो यहां विराजेंगे खड़े हनुमान

खड़े हनुमान की मूर्ति को छत्रीचौक के समीप टंकी चौराहा पर विस्थापित करने की योजना है। प्रशासन ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए नए स्थान पर मंदिर भी बना दिया गया है। हालांकि भक्तों का यह भी कहना है कि वर्तमान में भगवान खड़े हनुमान जहां और जिस प्रकार विराजित हैं, उनका मुख दक्षिण दिशा की और है। लेकिन अगर मूर्ति का विस्थापन होता है और भगवान को नए स्थान पर विराजित किया जाता है, तो उनका मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा। कई भक्तों को इस पर ऐतराज है।



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