उज्जैन में 22 सितंबर को डोल ग्यारस पर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे भगवान कालभैरव


Kaal Bhairav Sawari Ujjain: भगवान महाकाल के सेनापति कालभैरव की सवारी मंदिर से शुरू होकर सवारी नया बाजार, भैरवगढ़ नाका, माणक चौक, महेंद्र मार्ग होते हु…और पढ़ें

Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 12:03:10 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 12:10:12 PM (IST)

उज्जैन में 22 सितंबर को डोल ग्यारस पर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे भगवान कालभैरव
भगवान कालभैरव को भगवान महाकाल का सेनापति और उज्जैन का नगर कोतवाल माना जाता है। – फाइल फोटो

HighLights

  1. 22 सितंबर को निकलेगी सेनापति की सवारी
  2. काल भैरव मंदिर प्रशासन ने शुरू की तैयारी
  3. जेल तिराहे और सिद्धवट पर होगा पूजन

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। भगवान महाकाल के सेनापति कालभैरव 22 सितंबर को डोल ग्यारस पर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। मंदिर की परंपरा अनुसार शाम 4 बजे राजसी वैभव के साथ सेनापति की सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना होगी। मंदिर प्रशासन द्वारा सवारी को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है।

मंदिर प्रशासक संध्या मार्कंडेय ने बताया मंदिर की परंपरा अनुसार शाम 4 बजे कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा पालकी में विराजित भगवान कालभैरव के रजत मुखारविंद व चरण पादुकाओं का पूजन कर पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना करेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र बल की टुकड़ी सेनापति को गार्ड ऑफ ऑनर देगी। इसके बाद कारवां नगर भ्रमण के लिए रवाना होगा।

सवारी में पुलिस का सशस्त्र बल, बैंड, धार्मिक झांकियां, अखाड़े, हाथी-घोड़े और भक्त शामिल होंगे। कालभैरव मंदिर से शुरू होकर सवारी नया बाजार, भैरवगढ़ नाका, माणक चौक, महेंद्र मार्ग होते हुए केंद्रीय जेल तिराहे पहुंचेगी।

यहां जेल अधीक्षक द्वारा भगवान की पालकी का पूजन किया जाएगा। इसके बाद सवारी सिद्धवट पहुंचेगी। यहां वैकुंठ द्वार पर पुजारी शिप्रा जल से बाबा कालभैरव और चरण पादुकाओं का पूजन करेंगे। इसके बाद सवारी ब्रजपुरा, जेल तिराहा होते हुए रात करीब 7.30 बजे वापस मंदिर पहुंचेगी।

साल में दो बार निकलती है कालभैरव की सवारी

भगवान कालभैरव को भगवान महाकाल का सेनापति और उज्जैन का नगर कोतवाल माना जाता है। वर्ष में दो बार उनकी सवारी निकलती है। पहली सवारी मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी यानी भैरव अष्टमी पर भगवान के जन्मोत्सव के अगले दिन तथा दूसरी भाद्रपद शुक्ल एकादशी यानी डोल ग्यारस पर निकलती है। दोनों सवारियों में भगवान चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं।



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