भगवान महाकाल के आंगन में फिर आकार ले रहा है एक हजार वर्ष पुराना शिव मंदिर, खोदाई के दौरान मिला था
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में विकास एवं निर्माण कार्यों के दौरान मिले करीब एक हजार साल पुराने शिव मंदिर के अवशेष अब फिर से आकार ल…और पढ़ें

HighLights
- खोदाई में मिले पुरावशेषों के आधार पर पुरातत्व विभाग ने शुरू कराया पुनर्निर्माण, राजस्थान से बुलाए कारीगर
- पुरातत्व विभाग ने इन अवशेषों को सुरक्षित करते हुए उनका क्रमवार वर्गीकरण और नंबरिंग की थी
- अवशेषों के अध्ययन में मंदिर के भूमिज शैली में निर्मित होने के प्रमाण मिले
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में विकास एवं निर्माण कार्यों के दौरान मिले करीब एक हजार साल पुराने शिव मंदिर के अवशेष अब फिर से आकार लेने जा रहे हैं।
वर्ष 2020-21 में मंदिर परिसर में की गई खोदाई के दौरान भूमि के नीचे से प्राचीन मंदिर का आधार भाग, गर्भगृह के अवशेष, शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा, शार्दूल सहित कई महत्वपूर्ण प्रतिमाएं और स्थापत्य खंड मिले थे। पुरातत्व विभाग ने इन अवशेषों को सुरक्षित करते हुए उनका क्रमवार वर्गीकरण और नंबरिंग की थी।
अवशेषों के अध्ययन में मंदिर के भूमिज शैली में निर्मित होने के प्रमाण मिले। साथ ही भारवाही कीचक, कपोतिका, कुंभ भाग, स्तंभ, आमलक आदि स्थापत्य अवशेष भी मिले। पुरातत्व विशेषज्ञों के परीक्षण के बाद इन्हें एक ही स्थान पर संरक्षित कर रखा गया है। विभाग का मानना है कि इन अवशेषों के आधार पर प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण किया जा सकता है। मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए पुरातत्व विभाग ने निर्माण समिति का गठन किया है।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अवशेषों की नंबरिंग के आधार पर उन्हें जोड़कर मंदिर का मूल स्वरूप तैयार किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार क्षतिग्रस्त पत्थरों के स्थान पर उसी प्रकृति के पत्थर लगाए जाएंगे। इसके लिए राजस्थान से विशेष कारीगर भी बुलाए गए हैं। विभाग को राजस्थान में मंदिर निर्माण में उपयोग होने वाला इसी प्रकृति का काला पत्थर मिला है।
36 से 37 फीट ऊंचाई का प्रस्तावित मंदिर
योजना के अनुसार पुनर्निर्मित मंदिर की ऊंचाई करीब 36 से 37 फीट रहेगी। निर्माण में करीब 8 से 10 माह से लेकर डेढ़ वर्ष तक का समय लगने का अनुमान बताया गया है। विभिन्न चरणों में निर्माण लागत करीब 65 से 90 लाख रुपये आंकी गई है। पुरातत्व विभाग के अनुसार यह कार्य केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि महाकाल मंदिर के गौरवशाली प्राचीन इतिहास को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।