उज्जैन में 350 छात्राओं ने खोला मोर्चा, स्कूल को शहर से दूर स्थानांतरित करने पर कलेक्ट्रेट में रो पड़ीं छात्राएं, कहा- भविष्य खराब मत करो


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन के सराफा बालिका विद्यालय को शहर से करीब 12 से 15 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी में स्थानांतरित किए जाने के प्रशासनिक निर्णय के खिलाफ भारी जनआक्रोश देखने को मिला। शुक्रवार को करीब 300 से 350 छात्राओं ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी के दौरान परिसर में अफरा-तफरी मच गई और भीषण गर्मी व तनाव के बीच दो छात्राएं बेसुध होकर गिर पड़ीं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।

प्रदर्शन के दौरान एक व्यथित छात्रा ने रोते हुए प्रशासन से गुहार लगाई कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ न किया जाए। छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि इतनी दूर स्कूल शिफ्ट होने से सुरक्षा, परिवहन और रोजाना के आवागमन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होंगी।

छात्राओं व अभिभावकों की सुरक्षा और आवागमन को लेकर चिंताएं

कलेक्ट्रेट पहुंची छात्राओं ने प्रशासन के इस रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए ‘दाऊदखेड़ी नहीं जाएंगे’ और ‘प्रशासनिक मनमानी नहीं चलेगी’ के नारे लगाए। अभिभावकों ने बताया कि कई छात्राएं भैरूगढ़ और जयसिंहपुरा जैसे सुदूर क्षेत्रों से आती हैं। नए प्रस्तावित स्थल के आसपास का माहौल सुरक्षित नहीं है और वहां शराब की दुकानें भी मौजूद हैं, जिससे छात्राओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

अभिभावकों ने सवाल उठाया कि रोज 25-30 किलोमीटर की दूरी तय करने में अत्यधिक समय और पैसा खर्च होगा। दैनिक मजदूरी, ऑटो चालन या भट्ठों पर काम करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों को इतनी दूर रोज छोड़ना और लाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

6 शैक्षणिक संस्थानों के 2,500 से अधिक विद्यार्थी होंगे प्रभावित

‘स्कूल बचाओ समिति’ से जुड़े अधिवक्ता जितेंद्र सेंगर के अनुसार, इस स्थानांतरण प्रक्रिया से क्षेत्र के लगभग 6 प्रमुख विद्यालयों के 2,500 से 2,600 छात्र-छात्राएं सीधे प्रभावित होंगे।

  • सराफा कन्या विद्यालय (9वीं से 12वीं): लगभग 300-350 छात्राएं।
  • महाकाल मैदान स्थित प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालय (1ली से 8वीं): करीब 350 छात्राएं।
  • अन्य प्रभावित संस्थान: महाराजवाड़ा, सीएम राइज, नूतन और माधवेंद्र स्कूलों के विद्यार्थी।

अधिवक्ता सेंगर ने स्पष्ट किया कि कई विद्यार्थी पहले से ही 15 से 25 किलोमीटर दूर ग्रामीण इलाकों से चारधाम मंदिर या अन्य मुख्य केंद्रों तक पहुंचते हैं और वहां से बस पकड़ते हैं। सुबह 7 बजे घर से निकलने वाले बच्चे शाम 7 बजे तक ही वापस लौट पाते हैं। ऐसे में दूरी और बढ़ाना अन्यायपूर्ण है।

RTE (शिक्षा का अधिकार) नियमों के उल्लंघन का आरोप

शिक्षा संघर्ष समिति ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए इस फैसले को गैर-कानूनी बताया।

  • प्राथमिक स्तर: स्कूल की दूरी 1 से 3 किमी होनी चाहिए।
  • माध्यमिक स्तर: अधिकतम दूरी 5 किमी निर्धारित है।
  • माध्यमिकोत्तर (10वीं तक): स्कूल 8 किलोमीटर के दायरे में होना अनिवार्य है।

12 से 15 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी में स्कूल स्थापित करना सीधे तौर पर इन राष्ट्रीय मानकों की अवहेलना है। सूत्रों के मुताबिक, स्कूल प्रशासन, शिक्षक और प्राचार्य भी निजी स्तर पर बच्चों की शिक्षा के नुकसान को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन विभागीय दबाव के कारण खुलकर बोलने से हिचकिचा रहे हैं।

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जिला शिक्षा अधिकारी का रुख

मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) महेंद्र खत्री ने स्पष्ट किया कि यह राज्य शासन का नीतिगत निर्णय है। उन्होंने बताया कि संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं और सराफा विद्यालय को स्थानांतरित करने के विषय पर अंतिम फैसला जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति द्वारा लिया जाएगा।



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