उज्जैन में सिंहस्थ को दो साल से भी कम समय बचा, 111 में से केवल 42 परियोजनाओं पर हो रहा काम
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल इस महापर्व के लिए अब दो साल से भी कम समय बचा है, लेकिन तैयारियों की रफ्तार चिंता बढ़ाने वाली है। सिंहस्थ के लिए अब तक 9319 करोड़ रुपये की 111 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इनमें से केवल 42 परियोजनाएं ही धरातल पर उतर पाई हैं।
शेष 69 परियोजनाएं अभी भी फाइलों, स्वीकृतियों, निविदाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी हुई हैं। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) के समक्ष होने वाली रिपोर्ट में इन आंकड़ाें का उल्लेख मिलता है। सरकार सिंहस्थ-2028 में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान लगा रही है।
इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सड़क, पुल, घाट, पेयजल, सीवरेज, पार्किंग और आवागमन की व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। दिशा बैठक के एजेंडे में शामिल प्रगति रिपोर्ट से साफ है कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अभी शुरुआती चरण में ही हैं।
778 करोड़ रुपये स्वीकृत
सबसे बड़ी परियोजनाओं में शिप्रा नदी पर 22 नए पुलों के निर्माण के लिए 853 करोड़ 46 लाा रुपये और 29 किलोमीटर नए घाटों के लिए 778 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन दोनों परियोजनाओं पर अभी अपेक्षित गति नहीं दिख रही है। 1133 करोड़ 67 लाख रुपये की जल संवर्धन परियोजना और 1462 करोड़ रुपये की उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन परियोजना भी पूरी तरह रफ्तार नहीं पकड़ सकी हैं।
445 करोड़ रुपये की सीवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल प्रदाय योजना निर्माणाधीन है और इसे मई-2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 284 करोड़ रुपये का यूनिटी माल करीब 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है और दूसरी बार बढ़ाई समय-सीमा अक्टूबर-2026 तक इसके पूर्ण होने का लक्ष्य है। वहीं 220 करोड़ रुपये की भगवान श्रीकृष्ण प्रतिमा एवं परिसर विकास परियोजना अभी प्रारंभिक चरण में है।
पिछली सिंहस्थ से अलग तस्वीर
वर्ष 2016 की सिंहस्थ में अधिकांश प्रमुख निर्माण कार्य आयोजन से काफी पहले पूरे कर लिए गए थे। इससे व्यवस्थाओं की टेस्टिंग और सुधार के लिए पर्याप्त समय मिल गया था। इस बार स्थिति अलग है। कई परियोजनाओं के टेंडर तक अंतिम रूप नहीं ले पाए हैं, जबकि कुछ कामों पर निर्माण शुरू होने के बावजूद गति संतोषजनक नहीं है।
समय पर काम नहीं हुए तो बढ़ेंगी मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजनाओं में देरी का सीधा असर श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर पड़ेगा। सड़क, पार्किंग, पेयजल और घाट जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर तैयार नहीं हुईं तो महापर्व के दौरान व्यवस्थाओं पर भारी दबाव पड़ सकता है। भूमि विवाद, धीमी निविदा प्रक्रिया, विभागों के बीच समन्वय की कमी और समयबद्ध क्रियान्वयन की चुनौती प्रशासन के सामने खड़ी है।
सिंहस्थ की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन तैयारियों की वर्तमान रफ्तार यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या अगले डेढ़-दो वर्षों में प्रशासन फाइलों में कैद 69 परियोजनाओं को धरातल पर उतारकर दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक के लिए जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर पाएगा।