उज्जैन में 1 करोड़ की मोबाइल चोरी मामले में मुंबई पहुंची पुलिस, लेकिन कोई सुराग नहीं..दावा- पूरी तैयारी के साथ आए थे चोर
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 01:58:33 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 01:58:33 PM (IST)
MP डेस्क, उज्जैन. स्मार्ट सिटी उज्जैन के फ्रीगंज इलाके में हुई करोड़ों रुपए की हाई-टेक मोबाइल चोरी के मामले में पुलिस मुंबई तक पहुंच चुकी हैं। वहां से दो सगे भाइयों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। हालांकि, पूछताछ के बाद पुलिस को उन्हें छोड़ना पड़ा।
इस जांच में खुलासा हुआ कि चोरों ने वारदात के दौरान जिस मोबाइल और नंबर का इस्तेमाल किया था, वह असल में मुंबई की झुग्गी बस्ती में रहने वाले दो मजदूर भाइयों का था। यह मोबाइल पहले ही चोरी हो चुका था। इन मजदूरों ने इसकी शिकायत भी मुंबई पुलिस में दर्ज कराई हुई थी। फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी है।
10 जुलाई की रात हुई थी चोरी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 जुलाई की रात चोरों ने शहर के दो बड़े मोबाइल स्टोर्स को निशाना बनाया था। इसमें हाई च्वाइस मोबाइल और एसएस मोबाइल से 123 मोबाइल चोरी किए गए। CCTV फुटेज में चार शातिर बदमाश दिखाई दिए थे। इनमें से तीन चोर दुकानों का ताला तोड़कर अंदर चोरी कर रहे थे, जबकि चौथा साथी बाहर खड़ी कार में बैठकर पूरे इलाके की रेकी और निगरानी कर रहा था।
जंगल और कच्चे रास्तों से मुंबई भागे चोर
जांच में पता चला है कि चोरों को पुलिस की काम करने की शैली और साइबर ट्रैकिंग की पूरी जानकारी थी। उज्जैन में चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद चोर मुख्य हाइवे के बजाय जंगलों और ग्रामीण रास्तों से भागे।
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, चोर उज्जैन से निकलकर देवास, खातेगांव, कन्नौद, आष्टा, बैतूल और अठनेर के घने जंगलों के रास्ते महाराष्ट्र की सीमा में घुसे। इसके बाद अमरावती के देहाती इलाकों से होते हुए मुंबई पहुंचे। पूरे रास्ते में उन्होंने एक भी टोल नाके (Toll Plaza) का इस्तेमाल नहीं किया, ताकि CCTV कैमरों और फास्टैग (FASTag) से उनकी आवाजाही का कोई डिजिटल रिकॉर्ड तैयार न हो सके।
मास्क, ग्लव्ज और फर्जी नंबर प्लेट का खेल
पुलिस के मुताबिक चोरों ने पहचान छुपाने और सुराग न छोड़ने के लिए पूरी तैयारी की थी। उन्होंने फर्जी नंबर प्लेट, फिंगरप्रिंट और चेहरे छुपाए। चोरी के दौरान सभी ने हाथों में दस्ताने (Gloves) और चेहरे पर मास्क पहन रखा था। इसके अलावा वारदात के समय इस्तेमाल किए गए मोबाइल से एक भी फोन कॉल नहीं किया गया। इससे टावर डंप डेटा (Tower Dump Data) से भी उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।
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