उज्‍जैन में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्था जोड़ी का कारोबार, वन विभाग ने दबोचा कारोबारी


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के नाम पर प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंगों का अवैध कारोबार करने वाले एक युवक को वन विभाग ने गिरफ्तार किया है। आरोपित हरसिद्धि क्षेत्र में दुकान संचालित कर कथित रूप से हत्था जोड़ी बेच रहा था।

वन विभाग की टीम ने ग्राहक बनकर कार्रवाई करते हुए उसकी दुकान से सात हत्था जोड़ी बरामद की है। मामले में आरोपी का मोबाइल भी जब्त किया गया है, जिसमें मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर विभाग पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुट गया है।

वन मंडल अधिकारी अनुराग तिवारी ने बताया कि विभाग को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि हरसिद्धि मंदिर क्षेत्र के सामने स्थित एक दुकान से तंत्र-मंत्र में उपयोग होने वाली प्रतिबंधित सामग्री बेची जा रही है। सूचना की पुष्टि के लिए विभाग ने एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर दुकान पर भेजा।

सौदा तय होते ही टीम ने दबिश दी और दुकान से सात हत्था जोड़ी बरामद कर ली। प्रारंभिक जांच में जब्त सामग्री मानिटर छिपकली गोह के अंग होने की आशंका जताई जा रही है। मानिटर छिपकली वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची 1 में शामिल है। यह देश के सर्वाधिक संरक्षित वन्य जीवों में एक है।

एक आरोपित गिरफ्तार किया गया

कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार ने अपना नाम यश पुत्र जगदीश शर्मा उम्र 35 वर्ष निवासी हरसिद्धि की पाल बताया है। पूछताछ में उसने बताया कि वह बीडीएमएस कर रहा है।

वन विभाग ने उसका मोबाइल फोन भी जांच के लिए जब्त किया गया है। प्रारंभिक जांच में मोबाइल से वन्यजीवों से जुड़े कई आर्टिफैक्ट्स की तस्वीरें, व्हाट्सएप चैट और लेन-देन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।

अधिकारियों का मानना है कि आरोपित काफी समय से इस कारोबार में सक्रिय था और उसके संपर्क अन्य राज्यों तक भी हो सकते हैं।

वन विभाग ने बरामद सामग्री को परीक्षण के लिए जबलपुर स्थित वन्यजीव फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि जब्त सामग्री संरक्षित वन्यजीवों से संबंधित है या नहीं।

विभाग अब यह भी पता लगा रहा है कि आरोपी को यह सामग्री कहां से प्राप्त होती थी और किन लोगों तक इसकी आपूर्ति की जाती थी।

वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 39, 49, 50 और 51 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

अधिकारियों के अनुसार यदि फोरेंसिक जांच में सामग्री का संबंध संरक्षित गोह (मॉनिटर लिजार्ड) से होना प्रमाणित होता है तो मामले में और गंभीर धाराएं जोड़ी जाएंगी।



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