मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट स्थित आरती स्थल से ध्वनि विस्तारक यंत्र निकाल ले गया प्रशासन, तीर्थ पुरोहित नाराज
मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट के समीप आरती स्थल से ध्वनि विस्तारक यंत्रों को निकाल दिया गया है। मामले में तीर्थपुरोहित का कहना है कि प्रशासन घाट पर कान…और पढ़ें

HighLights
- तीर्थ पुरोहित बोले- प्रशासन व्यवस्था बनाने के बजाय, धार्मिक कार्य में व्यवधान ला रहा
- चार दिन पहले शिप्रा आरती स्थल पर दो पंडित व दीपक बेचने वाली महिलाओं के बीच विवाद हुआ था
- वीडियो सामने आने के बाद बुधवार सुबह प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आरती स्थल से ध्वनि विस्तारक यंत्रों को जब्त कर लिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट के समीप आरती स्थल से ध्वनि विस्तारक यंत्रों को निकाल दिया गया है। मामले में तीर्थपुरोहित का कहना है कि प्रशासन घाट पर कानून व व्यवस्था बनाने की बजाय धार्मिक कार्य में व्यवधान उत्पन्न कर रहा है। इस संबंध में गुरुवार शाम तीर्थ पुरोहित बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार करेंगे।
चार दिन पहले रामघाट के समीप शिप्रा आरती स्थल पर दो पंडित व दीपक बेचने वाली महिलाओं के बीच विवाद हुआ था। मामले में पुलिस ने प्रकरण भी दर्ज कर लिया था। लेकिन इंटरनेट माध्यमों पर विवाद व मारपीट का वीडियो बहु प्रसारित होने के बाद मामला मीडिया की सुर्खी बन गया।
वीडियो सामने आने के बाद बुधवार सुबह प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आरती स्थल से ध्वनि विस्तारक यंत्रों को जब्त कर लिया। कार्रवाई से क्षुब्ध श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पं. राजेश त्रिवेदी आमवाला पंडा ने बताया कि विवाद हमारे आरती स्थल के समीप हुआ था। इस संपूर्ण घटनाक्रम से हमारा कोई सरोकार नहीं है, लेकिन प्रशासन ने घाट पर कानून व्यवस्था बनाने के बजाय हमारी अनुपस्थिति में आरती में उपयोग होने वाले हमारे ध्वनि विस्तारक यंत्रों को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई पूरी तरह दुर्भावना पूर्ण व अनुचित है।
दो माह से कर रहे शिकायत, नहीं सुनी
पं. राजेश त्रिवेदी आमवाला पंडा ने बताया शिप्रा के घाट पर आरती के समय सैकड़ों लोग कागज के दोनों में एक दीपक व थोड़े से फूल रखकर बेच रहे हैं। श्रद्धालु आरती के बाद इन दोनों को शिप्रा में विसर्जित कर देते हैं, इससे शिप्रा प्रदूषित हो रही है। शिप्रा की दुर्दशा देख तीर्थ पुरोहित आहत है, हम लगातार दो माह से नगर निगम आयुक्त, सहायक आयुक्त सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से शिप्रा किनारे अतिक्रमण कर बेची जा रही सामग्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन किसी भी अधिकारी ने हमारी नहीं सुनी।