12 की बजाय 13 महीने का होगा हिंदू नववर्ष रौद्र संवत्सर, वैश्विक तनाव की बनेगी स्थिति; भारत होगा मजबूत
पंचांग की गणना के अनुसार यह वर्ष राजनैतिक और वैश्विक तनाव, प्राकृतिक असंतुलन, महंगाई, विश्व युद्ध, राजनीतिक षड्यंत्र, रासायनिक तनाव, गृह युद्ध वाला रह …और पढ़ें

HighLights
- नए साल का तीसरा माह ज्येष्ठ अधिकमास अर्थात पुरुषोत्तम मास होगा
- नए साल में ग्रहों की स्थिति तथा उनकी युति उथल पुथल मचा सकती है
- जुलाई, अगस्त में भारतीय रणनीति अपनी सफलता के चरणों पर आगे बढ़ेगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर गुड़ी पड़वा पर रौद्र नव सवंत्सर का आरंभ होगा। इस बार ज्येष्ठ अधिकमास होने से हिंदू नववर्ष 12 की बजाय 13 माह का रहेगा। संवत्सर का आरंभ गुरुवार के दिन होने से वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति रहेंगे। धरतीपुत्र मंगल मंत्री होंगे। नया साल में वैश्विक तनाव, विश्व युद्ध, महंगाई तथा जनता के गुस्से से विश्व में सत्ता परिवर्तन के योग बन रहे हैं।
महाकालेश्वर विद्वत परिषद के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुड़ी पड़वा से हिन्दू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस बार 19 मार्च गुरुवार के दिन रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी। नए साल का तीसरा माह ज्येष्ठ अधिकमास अर्थात पुरुषोत्तम मास होने से नया साल 12 की बजाया तेरह महीने का रहेगा।
सत्ता में परिवर्तन का बन सकता है कारण
पंचांग की गणना के अनुसार यह वर्ष राजनैतिक और वैश्विक तनाव, प्राकृतिक असंतुलन, महंगाई, विश्व युद्ध, राजनीतिक षड्यंत्र, रासायनिक तनाव, गृह युद्ध वाला रहेगा। इस साल महंगाई अपने चरम पर होगी। इसके कारण जनता का रौद्र रूप सत्ता में परिवर्तन का कारण भी बन सकता है। रौद्र संवत्सर में ब्राह्मण, संत, विद्वतजन अपमानित हो सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया हिन्दू नववर्ष रौद्र संवत्सर में ग्रहों की स्थिति तथा उनकी युति उथल पुथल मचा सकती है। वर्तमान में कुंभ राशि पर मंगल, राहु, बुध की युति बनी हुई है। मंगल, राहु एक साथ होने पर अंगारक योग बनाते हैं। नए साल में इसका प्रभाव विश्व में उथल-पुथल के रूप में नजर आएगा।