सिंहस्थ में कचरे का पहाड़ नहीं बनने देने की चुनौती, देश के 50 मॉडल शहरों में उज्जैन भी शामिल


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालु आएंगे तो उनके साथ कचरे का बोझ भी बढ़ेगा। घाटों पर पूजन सामग्री, सड़कों पर भोजन के पैकेट, प्लास्टिक और अस्थायी बसाहटों से निकलने वाला अपशिष्ट। इस भीड़ के बीच शहर को साफ रखना नगर निगम के सामने बड़ी चुनौती होगी।

इसी चुनौती से निपटने के लिए उज्जैन को केंद्र सरकार की ‘प्रगति 50’ पहल में देश के 50 मॉडल शहरों में शामिल किया गया है। अब लक्ष्य सिंहस्थ को ‘जीरो वेस्ट इवेंट’ बनाने का है, यानी कचरे का ढेर लगाने के बजाय उसका व्यवस्थित संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण करना।

महापौर मुकेश टटवाल का कहना है कि मॉडल शहरों में चयन का मतलब सिर्फ एक नई पहचान नहीं, बल्कि स्वच्छता के तय मानकों पर बेहतर परिणाम देने की जिम्मेदारी भी है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए शहर की सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालयों, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा घाटों की स्वच्छता को मजबूत करने की तैयारी होगी। हालांकि, यह लक्ष्य कितना हासिल होगा, यह कार्ययोजना, संसाधनों और जमीन पर होने वाले काम से तय होगा।

चयन से क्या बदलेगा, क्या करना होगा

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत शुरू की गई ‘प्रगति 50’ पहल का उद्देश्य स्वच्छता और सेनिटेशन के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल करना है। उज्जैन को इसके तहत एक माडल शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें केवल नई सुविधाएं बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनका नियमित संचालन, सफाई और नागरिकों की संतुष्टि भी महत्वपूर्ण होगी।

सिंहस्थ 2028 के लिए घाटों, मंदिरों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता व्यवस्था तैयार करनी होगी। कचरे को स्रोत पर अलग करना, उसका समय पर संग्रहण और प्रसंस्करण करना होगा। सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ उपयोग के बाद निकलने वाले पानी का प्रबंधन भी करना होगा।

सिंहस्थ में इन चुनौतियों से निपटना होगा

  • करोड़ों लोगों का कचरा कहां जाएगा : सिंहस्थ के दौरान अस्थायी बसाहटों, भोजन स्थलों, बाजारों और घाटों से बड़ी मात्रा में कचरा निकलेगा। इसके संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए पर्याप्त क्षमता तैयार करना जरूरी होगा।
  • घाटों और मंदिरों की सफाई : शिप्रा के घाटों और प्रमुख मंदिरों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच लगातार सफाई बनाए रखना चुनौती होगी। पूजन सामग्री और दूसरे अपशिष्ट का अलग संग्रहण करना होगा, ताकि वह नदी और आसपास के क्षेत्रों में न पहुंचे।
  • शौचालयों और गंदे पानी का प्रबंधन : श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से सार्वजनिक शौचालयों की उपलब्धता, नियमित सफाई, पानी की आपूर्ति और अपशिष्ट जल के निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी।
  • कचरे का सिर्फ उठाव नहीं, निस्तारण भी : कचरा उठाकर दूसरी जगह जमा कर देना जीरो वेस्ट का लक्ष्य पूरा नहीं करेगा। इसके लिए कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण, कम्पोस्टिंग और दूसरे तरीकों से प्रसंस्करण जरूरी होगा।
  • सिंहस्थ के बाद भी व्यवस्था कायम रखना : आयोजन के लिए तैयार की गई सुविधाएं और स्वच्छता व्यवस्था बाद में भी शहर के काम आएं, यह सुनिश्चित करना होगा।

प्रदर्शन के आधार पर मिला चयन

उज्जैन का चयन स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रदर्शन, गारबेज फ्री सिटी (जीएफसी) स्टार रेटिंग, घर-घर कचरा संग्रहण, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, एमआरएफ प्लांट, कम्पोस्टिंग और अपशिष्ट प्रसंस्करण की क्षमता के आधार पर किया गया है। 29 सितंबर को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘प्रगति 50’ का राष्ट्रीय शुभारंभ किया। उज्जैन से महापौर मुकेश टटवाल, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, अपर आयुक्त पवन कुमार सिंह और उपायुक्त योगेन्द्र सिंह पटेल शामिल हुए।

अब कार्ययोजना और परिणाम पर नजर

‘प्रगति 50’ स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के लक्ष्यों को तेजी से हासिल करने की परिणाम आधारित पहल है। इसके तहत नियमित निगरानी, तय मानकों के अनुरूप काम और नागरिकों की भागीदारी पर जोर रहेगा। मध्यप्रदेश शासन और नगर निगम को निर्धारित एसओपी और केपीआई के अनुरूप समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर काम करना होगा। उज्जैन के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है। सिंहस्थ में करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच स्वच्छता बनाए रखना और आयोजन के बाद भी शहर को बेहतर सफाई व्यवस्था देना। मॉडल शहर का दर्जा मिलना शुरुआत है, असली परीक्षा सिंहस्थ के दौरान होगी।



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