शनि प्रदोष पर भगवान महाकाल ने रखा उपवास, गर्भगृह में पुजारी, पुरोहितों ने किया रुद्रपाठ
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में शनिवार को प्रदोष पर भगवान महाकाल ने उपवास रखा। सुबह 10.30 बजे भोग आरती में भगवान को फलाहार के रूप में मीठे केसरिया दूध का भोग लगाया गया। शाम को संध्या आरती में भगवान को दाल, चावल, रोटी, सब्जी, मिष्ठान का नैवेद्य लगा। पुजारियों द्वारा अपराह्न में रूद्रपाठ किया गया।
पं. महेश पुजारी ने बताया महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में शनि प्रदोष का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान महाकाल उपवास रखते हैं। आमतौर पर प्रतिदिन सुबह 10.30 बजे भोग आरती में भगवान को दाल, चावल, रोटी, सब्जी, मिष्ठान का नैवेद्य लगता है। वहीं संध्या आरती में भगवान को केसरिया मीठे दूध का भोग लगाया जाता है।
शनि प्रदोष के दिन भगवान सुबह फलाहार के रूप में दूध तथा शाम को संध्या आरती में भोजन ग्रहण करते हैं। बता दें महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल की सेवा पूजा एक राजा रूप में की जाती है, इसीलिए पूजन में लौकिक जगत की परंपराएं शामिल हैं।
तांबे के कलशों से होगा भगवान जगन्नाथ का महाअभिषेक
उज्जैन : ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सोमवार को कार्तिक चौक स्थित श्री जगदीश मंदिर में स्नान यात्रा महोत्सव होगा। करीब 500 महिला, पुरुष भगवान जगन्नाथ का तांबे के कलश द्वारा शिप्रा जल से अभिषेक करेंगे। सुबह 7.30 बजे शिप्रा के रामघाट से कलश यात्रा का शुभारंभ होगा। बैंड बाजों के साथ निकलने वाली यात्रा में सैकड़ों भक्त शामिल होंगे।
ट्रस्ट सचिव अधिवक्ता मिश्रीलाल चौधरी ने बताया जगदीश मंदिर में रथ यात्रा की परंपरा 110 साल से अधिक पुरानी है। यात्रा से 15 दिन पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ का महाअभिषेक किया जाता है। मंदिर की परंपरा के अनुसार भगवान को स्नान कराने के लिए तांबे के पात्र का उपयोग होता है। प्रतिवर्ष करीब 400 से 500 महिलाएं यात्रा में शामिल होती हैं, समाज द्वारा इन्हें तांबे के लोटे उपलब्ध कराए जाते हैं।
महिलाएं भगवान को स्नान कराने के बाद लोटे अपने घर लेकर जाती हैं, मान्यता है यह अक्षय पात्र हैं और भगवान जगन्नाथ की कृपा से घर परिवार में सुख समृद्धि प्रदान करते हैं।ढाई घंटे चलेगा अभिषेक, पूजन29 जून की सुबह 7.30 बजे शिप्रा के रामघाट स्थित शिप्रा-गंगा माता मंदिर में पूजा अर्चना व कलश पूजन के बाद यात्रा शुरू होगी, जो रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक होते हुए जगदीश मंदिर पहुंचेगी।
सुबह करीब 11 बजे महाअभिषेक शुरू होगा, दोपहर डेढ़ बजे तक अभिषेक,पूजन का क्रम चलेगा। इसके बाद भगवान को सत्तू, लड्डू, माखन, मिश्री, दूध मलाई आदि का भोग लगाकर महाआरती की जाएगी। पश्चात महाभोज का आयोजन होगा।इस्कान में भी शुरू हुई तैयारी27यूजेजे-15 इस्कान मंदिर में अभिषेक के लिए बनाया जा रहा मंच।इस्कान मंदिर में भी 29 जून को आयोजित होने वाले स्नान यात्रा महोत्सव के लिए तैयारी की जा रही है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव शामिल होंगे। इस दिन मध्य प्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन भी होगा।
उज्जैन में महापर्वों की तरह हरसिद्धि चौराहा से शुरू की भगवान महाकाल के दर्शन की व्यवस्था