रिटायर होने के बाद भी दो साल ज्यादा कराई नौकरी, सातवें वेतमान का लाभ भी दिलवाया; उज्जैन के अधिकारियों पर बैठी जांच
दो कर्मचारियों से रिटायरमेंट की उम्र 60 साल पूरी होने के बाद भी दो साल तक नौकरी कराई गई और उन्हें सातवें वेतनमान का अवैध लाभ दिलवाया गया।

HighLights
- प्यून शंकर सिंह चौहान और डाटा एंट्री ऑपरेटर आरएस गिल को 62 साल की उम्र में रिटायर किया गया
- सातवें वेतनमान का प्रस्ताव बढ़ाकर 17 लाख रुपये से ज्यादा का आर्थिक लाभ दिलवाया
- इस मामले में तत्कालीन डीईओ आनंद शर्मा और एडीपीसी गिरिश तिवारी पर जांच बैठ गई है
डिजिटल डेस्क, उज्जैन। उज्जैन में शिक्षा विभाग में दो कर्मचारियों से उनकी रिटायरमेंट के बाद भी 2 साल नौकरी करवाने और उन्हें सातवें वेतनमान का अवैध लाभ दिलवाने के मामले में तत्कालीन अधिकारियों पर जांच बैठ गई है। यह मामला 2016 का है, जिसमें तत्कालीन डीईओ आनंद शर्मा और एडीपीसी गिरिश तिवारी पर भी जांच के आदेश दिए गए है।
जिन दो कर्मचारियों से रिटायरमेंट की उम्र 60 साल हो जाने के बाद भी दो साल तक काम करवाया गया, वो प्रतिनियुक्ति पर यहां आए थे। अधिकारियों ने उन्हें सातवें वेतनमान का अवैध लाभ दिलवाकर 17 लाख रुपये से ऊपर का आर्थिक लाभ भी दिलवाया था।
प्यून शंकर सिंह चौहान के साथ डाटा एंट्री ऑपरेटर आरएस गिल को 62 साल की उम्र में रिटायर किया गया। जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने जांच कराए बिना इन्हें सातवें वेतनमान दिए जाने का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया था।
इस मामले में अब शिक्षा विभाग मुख्यालय से दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। तत्कालीन डीईओ और एसडीपीसी के खिलाफ लापरवाही बरतने का आरोप है। इसके साथ ही कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद भी नौकरी पर रखकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप है।
विधानसभा तक पहुंची थी शिकायत
उज्जैन में शिक्षा विभाग में यह लापरवाही सामने आने का मामला विधानसभा में भी उठा था। इस दौरान जनवरी 2025 में दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था। इसके बाद दोनों से मिले जवाब से संतृष्ट नहीं होने पर लोक शिक्षण संचालनलय द्वारा आगे की कार्रवाई की गई।