ये किसी दूरस्थ गांव की नहीं, उज्जैन शहर की सड़कें हैं, कई जगह घुटनों तक गड्ढे और कीचड़, मुश्किलों में जिंदगी जीने को मजबूर लोग


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ये तस्वीरें किसी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र की नहीं, बल्कि स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल उज्जैन शहर के महेश नगर और सुदामा नगर की है। जहां घुटनों तक कीचड़, पानी से भरे गड्ढे और हाथ में लाठी लेकर रास्ता तलाशते लोग साफ दिखाई दे रहे हैं। ये दृश्य शहर की चमक-दमक के पीछे छिपे अधूरे विकास की वाे कहानी बयां कर रहा है जिसमें लोगों का दर्द छुपा है और जान-माल के खतरे की संभावना।

ये हालात शहर की 450 में से 150 कालोनियों में बने हुए है जहां के लोगों के लिए घर से निकलना जोखिम भरा हो गया है, जबकि मानसून की अभी औपचारिक दस्तक भी नहीं हुई है। करीब चार इंच बरसात ने ही नगर निगम प्रशासन की सफाई, स्वच्छता और सड़क सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन सड़कों की मरम्मत मई अंत तक पूरी हो जानी चाहिए थी, वे आज भी अधूरी पड़ी हैं। कई क्षेत्रों में सीवेज पाइपलाइन डालने के लिए खोदी गई सड़कें अब दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। महेश नगर, मोहन नगर, कंचनपुरा, लक्ष्मीनगर, अरिहंत धाम, सुदामा नगर, महालक्ष्मी नगर और देवास रोड से जुड़े क्षेत्रों में नागरिक सबसे अधिक परेशानी झेल रहे हैं।

बुजुर्ग, महिलाएं और स्कूली बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालकर इन रास्तों से गुजर रहे हैं। बरसात के कारण सड़कों पर जमा मिट्टी और पानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कई स्थानों पर दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं तो कहीं चारपहिया वाहन कीचड़ में धंस रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के बाद कई गलियां पूरी तरह आवागमन के लायक नहीं बची हैं।

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महेश नगर की स्थिति। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

108 मिमी बारिश में ही चरमराई व्यवस्था

शासकीय जीवाजी वेधशाला के अनुसार सीजन में अब तक 108 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है। सोमवार को ही 9 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। यह प्री मानसून की स्थिति है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि इतनी कम बारिश में ही सड़कें जवाब दे रही हैं तो जुलाई-अगस्त की तेज बारिश में हालात कितने गंभीर होंगे।

धंस रही री-फिलिंग, बढ़ रहा हादसों का खतरा

देवास रोड स्थित कावेरी रिजेंसी पहुंच मार्ग, नक्षत्र होटल-उंडासा मार्ग, डिवाइन सिटी और अन्य क्षेत्रों में री-फिलिंग धंसने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई जगह कचरा वाहन, डंपर और ट्रैक्टर तक फंस रहे हैं। इसी रास्ते से स्कूली बसें भी गुजरती हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायतों और निर्देशों के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। लोगों की मांग है कि अधूरे निर्माण कार्यों को तत्काल पूरा किया जाए, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाए और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि बारिश का मौसम लोगों के लिए मुसीबत नहीं, राहत लेकर आए।फैक्ट फाइल

महापौर ने कंट्रोल रूम पहुंच शिकायतों का त्वरित समाधान करने के दिए निर्देश

महापौर मुकेश टटवाल ने सोमवार को नगर निगम कंट्रोल रूम पहुंच वहां प्राप्त शिकायतों और उनकी मानिटरिंग व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वर्षाकाल के दौरान कंट्रोल रूम पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए। जलभराव जैसी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।

बरसात सिर पर, उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएं अब भी अधूरी, बढ़ाएंगी परेशानी



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