मानकों पर खरी नहीं उतर रही उज्जैन के महाकाल मंदिर की वेबसाइट, श्रद्धालु बोले- यह पारदर्शी नहीं
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति हाल ही में एआई आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली के लिए मिले भारत सरकार के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार मिलने पर अपनी पीठ थपथपा रही है। दूसरी ओर समिति की आधिकारिक वेबसाइट ही भारत सरकार की जीआईजीडब्ल्यू 3.0 गाइडलाइन के कई अनिवार्य मानकों पर खरी नहीं उतर रही है।
देश विदेश के भक्तों को पारदर्शी ऑनलाइन सुविधा तथा उनके डिजिटल डेटा की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में अफसर जवाब नहीं दे रहे हैं। बताया जाता है मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट पर पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक जानकारियां स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।
जानकारों का कहना है कि ऐसे में वेबसाइट की विश्वसनीयता और डिजिटल सुशासन के दावों पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर समिति भस्म आरती सहित अन्य सेवाओं के लिए भक्तों से आधार कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज अपलोड कराती है।
ऐसी स्थिति में वेबसाइट पर डेटा संरक्षण, गोपनीयता नीति, डेटा संग्रहण की अवधि और सुरक्षा संबंधी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होना चाहिए। वेबसाइट विजिटर्स के इन सवालों का मंदिर समिति के पास कोई जवाब नहीं है। नईदुनिया ने श्रद्धालुओं द्वारा उठाए जा रहे इन महत्वपूर्ण सवालों से मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक तथा मंदिर की आईटी शाखा के प्रभारी अधिकारी दीपक परमार को अवगत कराते हुए स्थिति स्पष्ट करने को कहा, लेकिन पांच दिन बीतने को आए जिम्मेदारों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।
क्या है जीआईजीडब्ल्यू 3.0 नियम
भारत सरकार द्वारा शासकीय वेबसाइटों को सुरक्षित, पारदर्शी तथा उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने के लिए जीआइजीडब्ल्यू 3.0 (गाइड लाइन फार इंडियन गवर्नमेंट वेबसाइट) मानक तय किए हैं। महाकाल मंदिर समिति शासन के अधीन है और यहां की व्यवस्थाओं का संचालन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है। इसलिए मंदिर की वेबसाइट के लिए इस नियम का पालन अनिवार्य है।
यह एक संपूर्ण नियमावली है, जो वेबसाइट को पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाती है। जानकारों का मानना है कि महाकाल मंदिर के लिए तो इस प्रकार के मानकों का पालन करना नितांत अनिवार्य है। क्यों कि यहां भस्म आरती, संध्या आरती, शयन आरती, प्रोटोकाल दर्शन आदि के लिए प्रतिदिन हजारों भक्तों का आधार कार्ड, फोटो आइडी लिया जाता है।
जानिए क्यों उठे सवाल…
महाकाल मंदिर में भस्म आरती की संपूर्ण दर्शन व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। पहले भक्तों को मंदिर के काउंटर से 300 ऑफलाइन अनुमति मिल जाती थी, लेकिन अब उन्हें भी ऑनलाइन कर दिया गया है। समिति ऑनलाइन 400 सीट की बुकिंग दो माह पहले करती है लेकिन 300 सीटों की बुकिंग तत्काल में एक दिन पहले की जाती है।
मंदिर की वेबसाइट पर भस्म आरती के इन दोनों प्रारूप की भक्तों को कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। संध्या और शयन आरती बुकिंग व्यवस्था में भी पारदर्शिता नहीं है। श्रद्धालुओं ने जब इन सवालों के जवाब ढूंढना शुरू किए तो, बड़ी खामी सामने आई।
अफसरों के पास नहीं इन सवालों के जवाब
- 1 – क्या महाकाल मंदिर समिति की वेबसाइट गाइडलाइन फॉर इंडियन गवर्नमेंट वेबसाइट 3.0 के अनुरूप है।
- 2 – क्या डाटा सुरक्षा में कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम इंडिया के मानकों का पालन हो रहा है।
- 3 – मंदिर समिति ने यह वेबसाइट शासन की किसी एजेंसी से बनवाई है या किसी प्राइवेट वेंडर से।
- 4 – वेबसाइट का सर्वर डोमेन और डेटा किसके नियंत्रण में है।
- 5 – क्या वेबसाइट का सुरक्षा ऑडिट हुआ है।
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