महाकाल की नगरी से तय होगा दुनिया का समय, ‘साइंस सेंटर’ बनेगा भविष्य की प्रयोगशाला


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। इतिहास गवाह है कि जब दुनिया समय को समझना सीख रही थी, तब उज्जैन का पंचांग ग्रहों की चाल बता रहा था। काल गणना की उसी गौरवशाली विरासत को आधुनिक विज्ञान से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव बसंत विहार में 15 करोड़ 20 लाख रुपये से बने ‘उज्जैन साइंस सेंटर’ का लोकार्पण करेंगे।

यह केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि अवंतिका को पुनः दुनिया का ‘टाइम स्केल सेंटर’ (समय गणना केंद्र) बनाने का शंखनाद है। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास शेन्डे का कहना है कि उज्जैन की महिमा ‘महाकाल’ से है, जिन्हें काल का स्वामी माना जाता है। अब यह आधुनिक साइंस सेंटर उसी आध्यात्मिक सत्य को वैज्ञानिक प्रमाण देगा।

उज्जैन साइंस सेंटर की की अत्याधुनिक गैलरी और आउटडोर साइंस पार्क विद्यार्थियों के लिए किताबी ज्ञान को धरातल पर उतारेंगे। सेंटर में उपग्रह (सैटेलाइट) निर्माण और रिमोट कंट्रोल प्लेन बनाने जैसी कार्यशालाएं होंगी, जो मालवा के युवाओं को सीधे इसरो और नासा के सपनों से जोड़ेंगी।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल : द मास्टर आफ टाइम’ में जुटने आए दुनिया के दिग्गज विज्ञानी

मुख्यमंत्री, उज्जैन साइंस सेंटर के उद्घाटन समारोह में ही तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर आफ टाइम’ का शुभारंभ भी करेंगे। इसमें शामिल होने कई दिग्गज विज्ञानी उज्जैन आ चुके हैं। सम्मेलन में मुख्य रूप से इसरो, डीआरडीओ और नीति आयोग के महारथी शामिल होंगे।

80 से अधिक विशेषज्ञों का यह जमावड़ा भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक एस्ट्रोफिजिक्स के बीच सेतु बनेगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उज्जैन के डोंगला गांव को ‘ग्लोबल मेरिडियन’ के रूप में स्थापित करना है, ताकि दुनिया का समय ग्रीनविच के बजाय भारत के शून्य देशांतर से तय हो सके।

डोंगला : जहां से गुजरती है विज्ञान की रेखा

उज्जैन के पास स्थित डोंगला गांव कोई साधारण स्थान नहीं है। यहां से कर्क रेखा गुजरती है, जो इसे खगोलीय गणना के लिए दुनिया का सबसे सटीक बिंदु बनाती है। 15 करोड़ के इस प्रोजेक्ट और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से सरकार का संकल्प है कि डोंगला को वैश्विक मानचित्र पर ‘प्राइम मेरिडियन’ के रूप में पेश किया जाए।

आम जन के लिए खास होगी ब्रह्मोस और स्पेस प्रदर्शनी

इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण वह भव्य प्रदर्शनी होगी, जहां आम लोग ब्रह्मोस मिसाइल के माडल और इसरो के अंतरिक्ष अभियानों को करीब से देख सकेंगे। यह प्रदर्शनी केवल तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत’ की उस स्पेस इकोनामी की झलक है, जिसमें उज्जैन अब एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र बनने जा रहा है।

निष्कर्ष : उज्जैन के लिए केवल ये एक उद्घाटन का अवसर नहीं है; यह उस ‘समय’ की वापसी है जब उज्जैन दुनिया को वक्त बताता था। 3 अप्रैल को बसंत विहार से शुरू होने वाली यह वैज्ञानिक यात्रा डोंगला की वेधशाला तक जाएगी, जो भारत को फिर से विश्व गुरु की वैज्ञानिक पहचान दिलाएगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *