‘पुष्पा’ का स्वांग रचकर महाकाल के द्वार पर पहुंचा युवक, रील बनाने के टशन में करते हैं तरह-तरह के जतन


महाकाल मंदिर में समय-समय पर कई लोग विशिष्ट वेषभूषा में भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर आते हैं, दिलचस्प बात यह है कि हर बार मंदिर के कर्मचारी ऐसे लोग …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 11:38:31 AM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 11:38:31 AM (IST)

‘पुष्पा’ का स्वांग रचकर महाकाल के द्वार पर पहुंचा युवक, रील बनाने के टशन में करते हैं तरह-तरह के जतन
पुष्पा का स्वांग रचकर महाकाल पहुंचा श्रद्धालु। (वीडियो ग्रेब)

HighLights

  1. कर्मचारियों ने फोटो खिंचवाई, सुपरवाइजर पर कार्रवाई
  2. एक व्यक्ति फिल्म पुष्पा के मुख्य किरदार का स्वांग रचकर महाकाल मंदिर पहुंचा
  3. कर्मचारी बहरूपिए से इतने प्रभावित हुए कि उसे वीआईपी गेट से एंट्री करा दी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में सोमवार को एक व्यक्ति फिल्म पुष्पा के मुख्य किरदार का स्वांग रचकर महाकाल मंदिर पहुंचा। गेट पर तैनात कर्मचारी बहरूपिए से इतने प्रभावित हुए कि उसे वीआईपी गेट से एंट्री करा दी। बताया जाता है दर्शनार्थी के साथ कुछ कर्मचारियों ने फोट भी खिंचवाए। मामले में सुपरवाइजर पर कार्रवाई भी की गई है।

महाकाल मंदिर में समय-समय पर कई लोग विशिष्ट वेषभूषा में भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर आते हैं, दिलचस्प बात यह है कि हर बार मंदिर के कर्मचारी ऐसे लोगों के साथ फोटों खिचवाते हैं और मंदिर समिति उन पर कार्रवाई करती है।

कुछ समय पहले एक बॉडी बिल्डर भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचा था। उसने नीलकंठ द्वार पर शारीरिक प्रदर्शन करते हुए रील बनाई, उस समय भी गार्डों ने उसके साथ फोटो खिंचवाई थी। बाद में मंदिर प्रशासन ने मामले में अनुशासनहीनता करने वाले गार्डों को नौकरी से हटा दिया था। सोमवार को भी पुष्पा के किरदार का रूप धारण कर मंदिर पहुंचे व्यक्ति के साथ फोटो खिंचवाने व वीआईपी ट्रीटमेंट देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

धर्म के नाम पर भजन करो विभाजन नहीं : अभयमुनि

नागदा जंक्शन। जीवन तभी धन्य बनता है, जब जीवन में सकारात्मक कार्य करे, धर्म से जोड़ें। तप, अहिंसा और भक्ति का मार्ग अपनाने वाला धन्य बनता है। जहां हिंसा होती है वहां शांति नहीं होती। मन में किसी के प्रति गलत सोच और दुर्भावना हो वहां शांति नहीं। धर्म के नाम लोगों को विभाजित मत करो। यह बात संत अभयमुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।



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