चित्रों में जीवंत हो रहे 18 महापुराण, उज्जैन के श्री महाकाल महालोक में बस रहा सनातन का चित्रलोक
धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। महापुराणों को अब केवल पढ़ना ही नहीं बल्कि उनके पात्रों, प्रसंगों और कथाओं को आंखों के सामने सजीव होते देखा जा सकेगा। उज्जैन स्थित श्री महाकाल महालोक में जल्द ही ऐसा अद्भुत अनुभव मिलने वाला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में उल्लेखित 18 महापुराण चित्र परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।
वर्ष 2019 से चल रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 18 महापुराणों को 18 भारतीय पारंपरिक चित्र शैलियों में करीब 2500 चित्रों के माध्यम से साकार किया गया है। इन चित्रों के लिए श्री महाकाल महालोक परिसर स्थित त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय में विशेष चित्रदीर्घा तैयार की जा रही है।
देश के प्रतिष्ठित कलाकार पुराणों के ज्ञान को कैनवास में दे रहे आकार
छह वर्षों की साधना के बाद यह परियोजना अब श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के सामने एक ऐसे ‘सनातन चित्रलोक’ के रूप में आने वाली है, जहां पुराणों का ज्ञान केवल शब्दों से नहीं बल्कि रंगों, रेखाओं और दृश्य कथाओं के माध्यम से जीवंत होगा। सृष्टि की उत्पत्ति, अवतार कथाओं, धर्म, नीति, संस्कृति और जीवन-दर्शन से जुड़े प्रसंगों को देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी विशिष्ट शैली में कैनवास पर साकार कर रहे हैं।
ओड़िया चित्र शैली में विष्णु पुराण को उकेरा
चित्रों के माध्यम से महापुराणों को समझाने का यह अनूठा प्रयास माना जा रहा है। इससे पद्मश्री और राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित चित्रकार भी जुड़े हैं। आंध्र प्रदेश के विश्वनाथ रेड्डी ने ब्रह्म पुराण को पारंपरिक कलमकारी शैली में चित्रित किया है। राजस्थान के जयशंकर शर्मा श्रीमद् ब्रह्मवैवर्त पुराण को बूंदी शैली में साकार कर रहे हैं।
ओडिशा के वरिष्ठ कलाकार प्रहलाद महाराणा ने विष्णु पुराण को पारंपरिक ओड़िया चित्र शैली में उकेरा है। कई कलाकारों ने इन चित्रों में सोना, चांदी, खनिज, पत्थरों और वनस्पतियों से तैयार प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया है, जिससे उनकी दीर्घायु और कलात्मक गरिमा बनी रहेगी।
डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित की जा रही है
चित्रदीर्घा की पहली मंजिल पर प्रत्येक महापुराण के लिए अलग प्रदर्शन कक्ष, विशेष प्रकाश व्यवस्था और डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित की जा रही है। इससे श्रद्धालु और पर्यटक उनसे जुड़ी कथाओं, प्रसंगों और सांस्कृतिक संदर्भों को भी सहजता से समझ सकेंगे। इसे श्री महाकाल महालोक के सांस्कृतिक विस्तार के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ये हैं 18 पुराण
ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण (शिव पुराण), भागवत पुराण (देवीभागवत पुराण), नारद पुराण, मार्कण्डेय पुराण, अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, लिङ्ग पुराण, वाराह पुराण, स्कन्द पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण, ब्रह्मांड पुराण।