उज्जैन में 14वीं शताब्दी का महाकाल द्वार ढहा, नया रास्ता बनाने के लिए चल रही खुदाई में लापरवाही से हुई घटना
Mahakal Gate Collapse: निर्माण के दौरान मिट्टी की कटाई करते समय ढलान को थामने के लिए न तो रिटेनिंग वॉल खड़ी की गई और ना ही ऐतिहासिक संरचना की मजबूती क…और पढ़ें

HighLights
- कहानी और किंवदंतियों में द्वार की परंपरा 2600 साल पुरानी है
- महाकाल मंदिर के समीप उक्त महाकाल द्वार अत्यंत प्राचीन है
- उज्जैन में इस द्वार ने अशोक मौर्य का शासनकाल भी देखा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर के उत्तर में स्थित 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक ‘महाकाल द्वार’ शनिवार-रविवार की दरमियानी रात जमींदोज हो गया। जिस विरासत को सहेजने के नाम पर महज तीन साल पहले (वर्ष 2021-22 में) स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दो करोड़ रुपये से अधिक फूंक दिए गए थे, वह अधिकारियों और ठेकेदारों की घोर लापरवाही की बलि चढ़ गया। अधिकारियों का कहना है कि अब इसका नवनिर्माण कराया जाएगा।
बता दें कि पर्यटन विभाग के ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल’ पहुंच मार्ग और वीआइपी मूवमेंट के सुगम आवागमन के लिए पुराने महाकाल थाना भवन को तोड़कर 77 मीटर लंबा और 3.74 मीटर चौड़ा मार्ग बनाया जा रहा है। इस निर्माण के दौरान महाकाल द्वार से सटाकर बिना किसी सुरक्षात्मक उपाय के भारी-भरकम जेसीबी मशीनों से गहरी खोदाई कर दी गई।
निर्माण के दौरान मिट्टी की कटाई करते समय ढलान को थामने के लिए न तो रिटेनिंग वॉल खड़ी की गई और ना ही ऐतिहासिक संरचना की मजबूती का तकनीकी आकलन किया। परिणामस्वरूप, जरा सी बारिश और मिट्टी के कटाव से सदियों पुराना बसाल्ट पत्थर और ईंटों का यह ढांचा धराशायी हो गया।
सीधे सवाल जो प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा करते हैं
- तीन साल में ही भ्रष्टाचार का पोल खुलना : 2021-22 में 2 करोड़ रुपये खर्च कर कैसा ‘जीर्णोद्धार’ किया गया था जो पहली खुदाई भी न झेल सका?
- बिना एसेसमेंट अंधी खोदाई : हेरिटेज प्रॉपर्टी के ठीक नीचे बिना किसी ‘सुरक्षा कवर’ के इतनी गहरी खुदाई की अनुमति किस जिम्मेदार अफसर ने दी?
2600 साल पुरानी द्वार परंपरा, 1732 में पुनर्निर्माण
प्रसिद्ध पुराविद् डा.रमण सोलंकी ने बताया कहानी और किंवदंतियों में उज्जैन में द्वार की परंपरा 2600 साल पुरानी है। समय-समय पर इसके पुरातात्विक प्रमाण भी मिलते रहे हैं। महाकाल मंदिर के समीप उक्त महाकाल द्वार अत्यंत प्राचीन है। राजा चंद्रप्रद्योत के शासन काल में भी यह वैभवशाली रहा होगा। किंवंदितयों के अनुसार राजा महाराज शिप्रा स्नान के बाद इसी द्वार से महाकाल दर्शन करने महाकालेश्वर मंदिर आया करते थे।
इस द्वार ने अशोक मौर्य का शासनकाल भी देखा है। सम्राट विक्रमादित्य के काल में भी महाराजवाड़ा के साथ यह भव्य द्वार रहा होगा। राजा भोज जब उज्जैन के शासक हुए तब यह द्वार इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ। उस समय राजा की पेशवाई इसी द्वार से मंदिर आया करती थी। सन 1232 ई. के आसपास मुस्लिम आक्रांता अल्तमश के द्वारा द्वार को तोड़ दिया गया था। सन 1732 के आसपास सिंधिया राज परिवार के सचिव बाबा रमाचंद्र शैणवीने इस द्वार का जीर्णोद्धार करा कर पुनर्स्थापित किया।
नव निर्माण कराएंगे
महाकाल द्वार मार्ग चौड़ा करने हेतु आसपास के पुराने निर्माण व होटल हटाए गए थे। दो दिल लगातार बरसात भी हुई, जिससे ढांचा कमजोर होने से यह हादसा हुआ। अन्य बिंदुओं पर भी जांच करवाएंगे। स्मार्ट सिटी द्वारा द्वार का नव-निर्माण कराया जाएगा।” – संदीप शिवा, सीईओ, उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड
पुन: स्थापित किया जा सकता है
महाकाल द्वार परमार कालीन एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। समय के अंतराल में क्षतिग्रस्त हुई ऐसी प्राचीन संरचनाओं को पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में तकनीकी रूप से पुनः स्थापित किया जा सकता है। — डॉ. रमन सोलंकी, पुरातत्वविद, उज्जैन
नेहा जैन नई सीईओ नियुक्त
इस बीच उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड की सीईओ नेहा जैन नियुक्त कर दी गई है। शनिवार शाम को ही राज्य शासन द्वारा ये आदेश जारी हुए थे। जैन सोमवार को पदभार संभाल सकती हैं। फिलहाल संदीप शिवा का नया पदांकन आदेश शासन ने जारी नहीं किया है।