उज्जैन में सबसे ज्यादा गृहस्थ महामंडलेश्वर, नाती पोते खिलाते देखे जा सकते हैं


अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.महेश पुजारी ने कहा कि सनातन धर्म परंपरा में साधु-संतों को अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 18 Mar 2026 01:56:27 PM (IST)Updated Date: Wed, 18 Mar 2026 02:03:40 PM (IST)

कालनेमी अभियान : उज्जैन में सबसे ज्यादा गृहस्थ महामंडलेश्वर, नाती पोते खिलाते देखे जा सकते हैं
महंत रविंद्रपुरी महाराज ने कालनेमी अभियान चलाने की घोषणा की है, इस पर पं.महेश पुजारी ने उन्हें धन्यवाद पत्र लिखा है।

HighLights

  1. अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने रविंद्रपुरी महाराज को लिखा धन्यवाद पत्र
  2. गृहस्थ महामंडलेश्वरों के खिलाफ कार्रवाई को बताया स्वागत योग्य
  3. अखाड़ों की पुरातन परंपरा टूटती जा रही है, गृहस्थों को बनाया महामंडलेश्वर

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी महाराज को धन्यवाद पत्र लिखा है। महासंघ का कहना है कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कालनेमी साधु-संतों तथा गृहस्थ महामंडलेश्वरों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है, जो स्वागत योग्य है।

महासंघ के अनुसार अखाड़ा परिषद अध्यक्ष द्वारा उज्जैन की धर्मधरा पर यह घोषणा करना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि यहां सबसे ज्यादा गृहस्थ महामंडलेश्वर हैं, जो सहज ही नाती पोते खिलाते देखे जा सकते हैं।

पुरानी परंपरा टूटती जा रही है

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.महेश पुजारी ने कहा कि सनातन धर्म परंपरा में साधु-संतों को अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। संन्यास दीक्षा में ब्रह्मचर्य अनिवार्य अंग हैं, अखाड़ों में पहले इसका पालन भी कराया जाता था। लेकिन अब अखाड़ों की पुरातन परंपरा टूटती जा रही है और गृहस्थ आश्रम में रहने वालों को महंत, मंडलेश्वर बनाया जा रहा है।

उज्जैन में सबसे ज्यादा गृहस्थ महंत व महामंडलेश्वर हैं, जो परिवार के साथ रह रहे हैं। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष का ध्यान सिंहस्थ से पहले कालनेमी साधु संत और विकृत होती अखाड़ों की परंपरा पर गया है, यह भगवान महाकाल का कृपा प्रसाद है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष अब अखाड़ों की परंपराओं के परिष्कार में पीछे नहीं हटना चाहिए।

रविंद्रपुरी ने कहा था-बीवी बच्चे पालना साधु संतों का काम नहीं

बीते दिनों नगर प्रवास पर आए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी महाराज ने मीडिया से चर्चा में कहा था कि कथित साधु संतों के खिलाफ कालनेमी अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि साधु संतों का काम जप,तप अनुष्ठान करना है, बीवी बच्चे पालना नहीं।

जो साधु संत ऐसा कर रहे हैं उन्हें अखाड़ों से बाहर किया जाएगा। हालांकि उज्जैन के कुछ गृहस्थ साधुओं को रविंद्रपुरीजी ने ही महामंडलेश्वर बनाया है। इस विषय पर उनका ध्यान आकर्षित कराए जाने पर उन्होंने यू टर्न लेते हुए कहा था कि कुछ मामलों में समझौता करना पड़ता है।



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