उज्जैन में शिप्रा घाटों के समानांतर नो कंस्ट्रक्शन जोन में 200 के बजाय 100 मीटर की सड़क बनाने की तैयारी
शिप्रा नदी के 29 किमी नए सहित अन्य घाट को जोड़ने के लिए बनाई जाने वाली समानांतर सड़क के प्लान में जिम्मेदारो ने बदलाव की तैयारी कर ली है। जो सड़क नदी …और पढ़ें

HighLights
- अफसरों ने प्लान बदलने का मन बनाया, लिखित आदेश बाकी
- जो सड़क नदी के ग्रीन बेल्ट 200 मीटर छोड़कर बनाई जाना थी, उसे नदी से 70-100 मीटर की दूरी पर निर्माण का नया प्लान बन गया है
- एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों के तहत नदी के ग्रीन बेल्ट में स्थाई पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। शिप्रा नदी के 29 किमी नए सहित अन्य घाट को जोड़ने के लिए बनाई जाने वाली समानांतर सड़क के प्लान में जिम्मेदारो ने बदलाव की तैयारी कर ली है। जो सड़क नदी के ग्रीन बेल्ट 200 मीटर छोड़कर बनाई जाना थी, उसे होल्ड करते हुए नदी से 70-100 मीटर की दूरी पर पक्की सड़क निर्माण का नया प्लान बन गया है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों के तहत नदी के ग्रीन बेल्ट में स्थाई पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता।
किसानों के लिए यह नियम कड़ाई से लागू भी हैं, लेकिन अब शासन-प्रशासन ही एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में पक्की सीसी रोड बनाने की तैयारी में है। प्लान में बदलाव पर सारी चर्चा हो चुकी है, बस शासन स्तर से लिखित पत्र आना बाकी है। इधर, सड़क की दूरी घटाने की चर्चा सामने आते ही क्षेत्र के किसानों में आक्रोश बढ़ने लगा है। सड़कों के लिए जमीन देने के बाद भी किसानों को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा।
पक्के घाट बनाकर पहले ही नदी का स्वरूप बिगाड़ा
पर्यावरण विशेषज्ञ ने बताया कि शिप्रा पर इतने लंबे घाट बनाकर पहले ही प्राकृतिक रूप से नदी की हत्या कर दी गई है। इससे नदी की जैव विविधता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। क्योंकि नदी के तटों पर पानी व मिट्टी में रहने वाले जीव-जंतु के कारण होने वाला परकोलेशन पूरी तरह से बंद हो जाएगा। नदी से 70-100 मीटर दूरी पर 30 मीटर चौड़ी सड़क बन जाने से ग्रीन बेल्ट भी खत्म हो जाएगा।
मास्टर प्लान-2035 में 200 मीटर दूर है सड़क
उज्जैन विकास योजना (मास्टर प्लान-2035) में नदी के लिए घोषित ग्रीन बेल्ट 200 मीटर के बाद ही सड़क बनाई जाना प्रस्तावित है। यह सड़क 30 मीटर चौड़ी रहेगी। अफसरों ने इसी मास्टर प्लान के तहत ही 200 मीटर दूर 30 मीटर चौड़ी सीसी रोड बनाने का निर्णय लिया। बाकायदा निर्माण एजेंसी यूडीए ने प्रस्तावित सड़क के लिए जमीन अधिगृहीत करते हुए निशानदेही भी कर ली। लेकिन अब ऐनवक्त पर इस प्लान में बदलाव किया जा रहा है।
इसलिए बनाई जा रही है समानांतर सड़क
सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं को नदी घाट तक पहुंचाने के लिए समानांतर सड़क बनना है। 193.3 करोड़ रुपए से बनने वाली इस सड़क को मास्टर प्लान में एमआर-22 नाम दिया है। जो नदी के पश्चिमी हिस्से में बनना है। यह सड़क सिंहस्थ बायपास से मेला क्षेत्र को जोड़ते हुए नदी किनारे स्थित मंदिर (शनि मंदिर, भूखी माता मंदिर, रणजीत हनुमान मंदिर, काल भैरव मंदिर) और सभी घाटों को आपस में जोड़ेगी। सिंहस्थ के दौरान इसका उपयोग बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी) के रूप में भी किया जा सकेगा।
ग्रीन बेल्ट में पक्के निर्माण प्रतिबंधित
उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के पर्यावरण और उसके प्रवाह को सुरक्षित रखने के लिए ग्रीन बेल्ट और निर्माण नियमों को लेकर कड़े प्रावधान हैं। मास्टर प्लान-2035 और एनजीटी ने शिप्रा नदी के दोनों किनारों (तटों या घाटों के बेस पॉइंट) से 200 मीटर तक का इलाका ग्रीन बेल्ट घोषित किया है। इस क्षेत्र में पक्के निर्माण पूर्ण प्रतिबंधित हैं।
किसानों को होगा नुकसान
200 मीटर दूर बनने वाली सड़क की दूरी घटाई तो ज्यादा नुकसान किसानों को होगा। क्योंकि नदी से 200 मीटर दूर तक का इलाका पहले से ग्रीन बेल्ट घोषित होने के कारण वे पक्का निर्माण नहीं करवा सकते। 200 मीटर दूर सड़क बन जाती, तो सड़क के बाद किसानों की जमीन की वैल्यू बढ़ जाती। सड़क बनने से किसान जमीन का व्यावसायिक उपयोग कर सकते। सड़क दूर बनने से न तो किसानों की जमीन की वैल्यू बढ़ेगी और न ही वे व्यवसाय शुरू कर पाएंगे।
बर्दाश्त नहीं करेंगे
समानांतर सड़क नदी तट से 200 मीटर दूर ग्रीन बेल्ट के बाद ही बनना चाहिए। जो मास्टर प्लान-2035 में शामिल है। जानकारी लगी है कि कुछ उद्योगपति व होटल माफिया को फायदा दिलाने के लिए अफसर प्लान को बदलकर 70-100 मीटर दूरी ग्रीन बेल्ट में ही पक्की सीसी रोड बना रहे हैं, जो गलत है। इससे एनजीटी के नियमों का उल्लंघन तो होगा ही, साथ ही क्षेत्र के किसानों को नुकसान होगा, जो बर्दाश्त नहीं करेंगे। – कमलसिंह आंजना, प्रदेशाध्यक्ष भारतीय किसान संघ