उज्जैन में शनिश्चरी अमावस्या पर नर्मदा के जल से होगा त्रिवेणी स्नान, सूखी पड़ी है शिप्रा नदी


ज्येष्ठ अमावस्या पर 16 मई को शनिवार होने से शनिश्चरी अमावस्या का महासंयोग बन रहा है। इस दिन शिप्रा के त्रिवेणी संगम पर स्नान तथा शनिदेव के दर्शन का वि …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 09 May 2026 11:39:10 AM (IST)Updated Date: Sat, 09 May 2026 11:39:10 AM (IST)

उज्जैन में शनिश्चरी अमावस्या पर नर्मदा के जल से होगा त्रिवेणी स्नान, सूखी पड़ी है शिप्रा नदी
शिप्रा के त्रिवेणी घाट से पहले कान्ह नदी का गंदा पानी रोकने के लिए बन रहा स्टाप डैम। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. ज्येष्ठ अमावस्या पर 16 मई को शनिवार होने से शनिश्चरी अमावस्या का महासंयोग
  2. मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में निर्णय, गर्मी के मद्देनजर विशेष इंतजाम होंगे
  3. इस दिन शिप्रा के त्रिवेणी संगम पर स्नान तथा शनिदेव के दर्शन का विशेष महत्व

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। शनिश्चरी अमावस्या पर 16 मई को शिप्रा के त्रिवेणी संगम पर नर्मदा के जल से पर्व स्नान होगा। शुक्रवार को एसडीएम पवन बारिया की अध्यक्षता में हुई मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बता दें वर्तमान में घाट तथा पुल निर्माण के चलते शिप्रा में जगह-जगह अस्थाई पाल बनाकर शिप्रा का पानी रोका गया है, इससे त्रिवेणी घाट पर शिप्रा सूखी पड़ी है।

ज्येष्ठ अमावस्या पर 16 मई को शनिवार होने से शनिश्चरी अमावस्या का महासंयोग बन रहा है। इस दिन शिप्रा के त्रिवेणी संगम पर स्नान तथा शनिदेव के दर्शन का विशेष महत्व है। देशभर से हजारों श्रद्धालु त्रिवेणी स्नान के लिए शिप्रा तट पहुंचेंगे। महापर्व पर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधापूर्वक स्नान तथा शनिदेव के दर्शन पूजन कराने के लिए प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है।

घाट पर स्नान के लिए फव्वारे लगवाने का लिया निर्णय

शुक्रवार को मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष एसडीएम पवन बारिया ने मंदिर कार्यालय में बैठक कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया। समिति सदस्य व पुजारियों के साथ बैठक में एसडीएम ने पर्व स्नान के लिए शिप्रा नदी में नर्मदा का शुद्ध जल प्रवाहित करने तथा घाट पर स्नान के लिए फव्वारे लगवाने का निर्णय लिया। शिप्रा के त्रिवेणी घाट पर एक दो दिन में जलभंडारण की शुरुआत हो जाएगी।

महिला तथा पुरुष घाट पर अलग-अलग इंतजाम होंगे

महिला तथा पुरुष घाट पर अलग-अलग इंतजाम होंगे। वस्त्र बदलने के लिए काटेज लगाए जाएंगे। श्रद्धालुओं के पैर ना जले इसके लिए मेटिन बिछाई जाएगी। पीने के लिए पानी, अस्थाई शौचालय, साफ सफाई तथा पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था रहेगी। गर्मी को देखते हुए घाट व मंदिर परिक्षेत्र में चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। बैठक में समिति सदस्य वीरेंद्र आंजना, कमल बैरवा, महंत राकेश बैरागी, पं.शैलेंद्र डब्बावाला तथा पं. जानकीदास बैरागी मौजूद थे।

पहली बार चलायमान होंगे अभिषेक, दर्शन

naidunia_image

इस बार शनिश्वरी अमावस्या पर भक्त भगवान शनिदेव का सुविधापूर्वक तेलाभिषेक व दर्शन कर सकेंगे। मंदिर समिति ने पुजारियों के सुझाव पर विशेष इंतजाम करने का निर्णय लिया है। अब तक महापर्वों के समय भगवान शनिदेव का तेलाभिषेक करने के लिए पात्र मूर्ति के सामने लगा दिया जाता था, इससे अभिषेक व दर्शन करने वाले श्रद्धालु काफी देर तक गर्भगृह के समाने खड़े रहते थे इससे दर्शन में समय लगता था।

नई व्यवस्था में तेल पात्र को प्रवेश द्वार के समीप लगाया जाएगा। श्रद्धालु पात्र में तेल अर्पित करते हुए आगे बढ़ेंगे तथा भगवान के दर्शन कर बाहर निकलते जाएंगे। इस व्यवस्था से चलायमान अवस्था में अभिषेक तथा दर्शन होंगे। फिलहाल ऐसी व्यवस्था श्री महाकालेश्वर मंदिर में है।

27 साल बाद ज्येष्ठ अधिकमास में शनिश्चरी अमावस्या का महासंयोग, शनिदेव की आराधना से मुश्किलें होंगी दूर



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *