उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर में खोदाई में मिले शिवलिंग पर संस्कृत व ब्राह्मी लिपि में लेख होने का अनुमान
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर चल रहे निर्माण के दौरान खोदाई में प्राचीन मंदिरों के अवशेष, शिवलिंग और मूर्तियां प्राप्त हो रही हैं। इससे प्राचीन सभ …और पढ़ें

HighLights
- पुराविद् बोले- आगे की खोदाई में इस तरह के कई और शिवलिंग व मूर्तियां मिलने की उम्मीद
- अंडरपास के लिए की जा रही खोदाई में भूगर्भ से शिवलिंग प्राप्त हुआ
- प्राचीन भारतीय सभ्यता, संस्कृति व इतिहास को जानने व समझने में यह शिवलिंग मील का पत्थर साबित हो सकता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाराजवाड़ा से मंदिर तक बनाए जा रहे अंडरपास के लिए की जा रही खोदाई में शुक्रवार सुबह भूगर्भ से शिवलिंग प्राप्त हुआ है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पुरातत्व वेत्ता तथा इतिहासकार प्रो.डा.रमण सोलंकी ने बताया महाकाल वन के कंकर-कंकर में शंकर का वास है। यह संपूर्ण परिक्षेत्र शिव साधकों का गढ़ रहा है।
सम्राट विक्रमादित्य जो कि स्वयं परम शिव और शक्ति के भक्त थे, उन्होंने अपने राज्य में अनेक मंदिरों का निर्माण कराया। बाद में आक्रांताओं ने इन मंदिरों को नष्ट भ्रष्ट कर जमींदोज कर दिया। नवनिर्माण के दौरान की जा रही खोदाई में उन प्राचीन मंदिरों के अवशेष, शिवलिंग और मूर्तियां हमें प्राप्त हो रहे हैं। प्राचीन भारतीय सभ्यता, संस्कृति व इतिहास को जानने व समझने में यह शिवलिंग मील का पत्थर साबित हो सकता है। शिवलिंग पर संस्कृत व ब्राह्मी लिपि में लेख होने का अनुमान है।
वैशाख पूर्णिमा पर शिवलिंग प्राप्त होना शुभ
जमीन से शिवलिंग निकलने के बाद महाकाल मंदिर के पुजारियों ने पूजा अर्चना की। आसपास हरने वाले श्रद्धालु भी पूजा अर्चना करने पहुंचे। पं.आकाश पुजारी ने बताया वैशाख पूर्णिमा के दिन भूगर्भ से शिवलिंग प्राप्त होना शुभ संकेत है। यह नगर की सुख, समृद्धि तथा उन्नति का संकेत दे रहा है। वैशाख में भगवान के जलाभिषेक का महत्व है, इसलिए विशेष पूजा अर्चना की गई है। फिलहाल शिवलिंग को सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया गया है।
एक हजार साल पुराने शिव मंदिर का निर्माण जारी
महाकाल मंदिर में नवनिर्माण के लिए की जा रही खोदाई में पुरातात्विक अवशेषों का मिलना जारी है। पांच साल पहले मंदिर परिसर में खोदाई के दौरान एक हजार साल पुराने शिव मंदिर का आधार भाग, भग्नावशेष, शिवलिंग तथा अनेक मूर्तियां प्राप्त हुई थी। मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा प्राप्त भग्नावशेषों से उसी स्थान पर शिव मंदिर का पुर्ननिर्माण कराया जा रहा है।