उज्जैन में एआई और डिजिटल ट्विन तकनीक से लैस होगा सिंहस्थ, भीड़-ट्रैफिक से सुरक्षा तक सब पर रहेगी लाइव नजर


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 इस बार सिर्फ आस्था का महासंगम नहीं, बल्कि देश का सबसे बड़ा ‘स्मार्ट महाकुंभ’ भी बनने जा रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़, ट्रैफिक जाम, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश सरकार पहली बार एआई, डिजिटल ट्विन और स्मार्ट मानिटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने जा रही है। कोशिश यह है कि श्रद्धालुओं को कम भटकाव, कम अव्यवस्था और पहले से ज्यादा सुरक्षित व व्यवस्थित अनुभव मिल सके।

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और गूगल क्लाउड इंडिया के अधिकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में सिंहस्थ को तकनीक-सक्षम आयोजन में बदलने का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया। इसके तहत रियल टाइम क्राउड मैनेजमेंट, एआई आधारित ट्रैफिक कंट्रोल, डिजिटल ट्विन माडल, स्मार्ट इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम और ‘सहायक’ नाम के बहुभाषीय एआई एप जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने की योजना बनाई गई है।

सबसे अहम तकनीक होगी रियल टाइम क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम। सिंहस्थ क्षेत्र के घाटों, मार्गों और प्रमुख स्थानों पर हाई रिजोल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे। ये कैमरे एआइ सिस्टम से जुड़े होंगे, जो हर पल यह विश्लेषण करेगा कि किस क्षेत्र में कितनी भीड़ है। यदि किसी घाट पर दबाव बढ़ेगा तो सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेगा। साथ ही श्रद्धालुओं को मोबाइल एप, डिजिटल स्क्रीन और घोषणाओं के जरिए दूसरे मार्ग या घाट की जानकारी दी जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि भगदड़ जैसी स्थिति बनने से पहले ही भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा।

ट्रैफिक पुलिस से पहले एआई बताएगा रास्ता

ट्रैफिक व्यवस्था में पहली बार एआइ आधारित सिस्टम लागू होगा। लाइव ट्रैफिक डेटा, जीपीएस और कैमरों की मदद से यह जाम वाले मार्ग, खाली पार्किंग और एंबुलेंस के लिए सबसे तेज रास्ते की जानकारी देगा। इससे ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था कम करने में मदद मिलेगी।

सिंहस्थ में पहली बार इस्तेमाल होंगी ये हाईटेक तकनीकें

  • रियल टाइम क्राउड मैनेजमेंट
  • एआइ ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम
  • सहायक एआइ एप
  • डिजिटल ट्विन टेक्नोलाजी
  • स्मार्ट इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम
  • एआई आधारित सुरक्षा निगरानी

कैसे काम करेगा एआइ क्राउड सिस्टम?

  • तकनीक: कैमरे सेंसर एआइ विश्लेषण
  • क्या होगा: भीड़ का लाइव आंकलन, ज्यादा दबाव वाले क्षेत्र की पहचान, वैकल्पिक मार्ग की सूचना
  • फायदा: भगदड़ की आशंका कम, धक्का-मुक्की से राहत, प्रशासन को तुरंत अलर्ट

सहायक बनेगा डिजिटल गाइड

एप पर क्या मिलेगा: किस घाट पर कम भीड़, मेडिकल सहायता, बस-रेल जानकारी, खोए व्यक्ति की सूचना, पार्किंग और मार्गदर्शन

खास बात: आवाज से सवाल पूछ सकेंगे श्रद्धालु।

पहले कंप्यूटर पर चलेगा सिंहस्थ, फिर जमीन पर

क्या है डिजिटल ट्विन टेक्नोलाजी: पूरे सिंहस्थ क्षेत्र का वर्चुअल माडल कंप्यूटर पर तैयार होगा।

क्या होगा: पहले से भीड़ का आकलन, बारिश या हादसे की स्थिति का अनुमान, ट्रैफिक और सुरक्षा की पूर्व तैयारी

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