उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन का भूमि पूजन 19 अप्रैल को, डिलाइन बदलकर 450 करोड़ बचाने की कोशिश


नईदुनिया प्रतिनिधि,उज्जैन। मालवा की बहुप्रतीक्षित उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना को आखिरकार जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम उठने जा रहा है। 19 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन में इस 98.41 किमी लंबे मार्ग का भूमि पूजन करेंगे।

लंबे समय से भूमि अधिग्रहण, मुआवजा विवाद और डिजाइन संशोधन के चलते अटकी इस परियोजना के लिए प्रशासन ने अब दोनों छोर से काम शुरू करने की रणनीति बनाई है। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग को समयसीमा में पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती और प्राथमिकता बन गया है।

यहा पड़ रहा प्रभाव

संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने उज्जैन और रतलाम कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भूमि मुआवजा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी अब स्वीकार नहीं होगी। लगभग 430 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए 49 गांव (उज्जैन) और 12 गांव (रतलाम) प्रभावित हो रहे हैं।

हालांकि, तय समयसीमा 30 अक्टूबर 2025 तक मुआवजा वितरण पूरा नहीं हो सका, जिससे 1 अप्रैल 2026 से कार्य शुरू करने का लक्ष्य भी विफल रहा। अब प्रशासन दोनों छोर से निर्माण शुरू करने के लिए तेजी से अधिग्रहण और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है।

किसानों का विरोध और मुआवजा विवाद बना बड़ी बाधा

परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती किसानों का विरोध रहा है। 29 मार्च 2026 और इसके पहले भी दो बार किसानों ने एमपीआरडीसी कार्यालय में प्रदर्शन कर अधिकारियों को घेर लिया था। किसानों का आरोप है कि उन्हें 6–8 लाख रुपये प्रति बीघा का प्रस्ताव दिया जा रहा है, जबकि बाजार मूल्य 25–50 लाख रुपये प्रति बीघा है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मुआवजा निर्धारण पारदर्शी तरीके से और किसानों को विश्वास में लेकर किया जाएगा।

डिजाइन बदला, लागत में 450 करोड़ तक की बचत संभव

किसानों के विरोध और तकनीकी पुनर्मूल्यांकन के बाद हाईवे के एलिवेशन को कम किया है। यानी अब उऊंचाई की बजाय सतही स्तर पर ही फोरलेन सड़क मार्ग बनेगा, जिससे गांवों का सीधे इस सड़क से जुड़ाव होगा। इससे कुल लागत करीब 2400 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 1950 करोड़ रुपये रह जाएगी। संशोधित डिजाइन से खेतों तक पहुंच, सिंचाई और ग्रामीण मार्गों पर प्रभाव भी कम होगा।

सिंहस्थ 2028 के लिए लाइफलाइन बनेगा मार्ग

यह ग्रीनफील्ड फोरलेन मार्ग न केवल उज्जैन–जावरा की दूरी कम करेगा, बल्कि दिल्ली–मुंबई कॉरिडोर और महू–नीमच मार्ग से कनेक्टिविटी भी मजबूत करेगा। सिंहस्थ 2028 के दौरान यह मार्ग करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक रूट प्रदान करेगा, जिससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और भीड़ प्रबंधन आसान होगा। मां शिप्रा में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम और तेज यातायात सुविधा मिलेगी, वहीं राजस्थान, दिल्ली और मुंबई से सड़क मार्ग से पहुंच भी आसान हो जाएगी।

प्रोजेक्ट पूरा करने की टाइमलाइन 30 नवंबर 2027

प्रशासन ने परियोजना को 30 नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। एमपीआरडीसी द्वारा 2025 में टेंडर जारी कर निर्माण एजेंसी का चयन भी किया जा चुका है, लेकिन जमीनी काम अब तक शुरू नहीं हो पाया था। अब साप्ताहिक मानिटरिंग, इंडिपेंडेंट इंजीनियर की नियुक्ति (11.75 करोड़ रुपये) और तकनीकी समन्वय के जरिए परियोजना को गति देने का दावा किया जा रहा है।

कहा जा रहा है कि उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि मालवा के औद्योगिक, पर्यटन और धार्मिक विकास की धुरी है। मुख्यमंत्री के भूमि पूजन के साथ अब उम्मीद जगी है कि वर्षों से अटकी यह परियोजना धरातल पर उतरकर सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को नई कनेक्टिविटी और गति दे सकेगी।

दो साल में पूरा होना था, अब भी शुरुआत बाकी

  • 7 मार्च 2024 : प्रशासकीय स्वीकृति
  • 28 अगस्त 2025 : टेंडर प्रक्रिया पूर्ण
  • 1 अप्रैल 2026 : कार्य शुरू करने की डेडलाइन फेल
  • 19 अप्रैल 2026 : भूमि पूजन प्रस्तावित



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