उज्जैन के पवित्र ‘सप्त सागरों’ में छह का पानी नहाने लायक भी नहीं, इनमें सीवेज मिलने के संकेत
Sapt Sagar Ujjain: एनजीटी ने उज्जैन के पवित्र सप्त सागरों में सीवेज प्रदूषण पर सख्ती दिखाई है। रिपोर्ट में सामने आया कि 7 में से 6 कुंडों का पानी स्ना…और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उज्जैन के पवित्र सप्तसागरों में सीवेज प्रदूषण पर सख्ती दिखाई है। अधिकरण ने पाया कि वहां के सात में से छह प्रमुख कुंडों का पानी स्नान योग्य भी नहीं बचा है। भगवान महाकाल के भक्त उसी पानी से पूजा-अर्चना करने को विवश हैं। एनजीटी ने कहा कि यह श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और उनकी धार्मिक आस्था दोनों के साथ खिलवाड़ है।
एनजीटी की सेंट्रल बेंच में प्रशांत मौर्य और बकीर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पानी की गुणवत्ता संबंधी अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें सामने आया कि सप्त सागरों में से गोवर्धन सागर, विष्णु सागर, पुरुषोत्तम सागर, क्षीर सागर, रुद्र सागर और पुष्कर सागर का पानी ‘डी’ श्रेणी का पाया गया, जो स्नान के लिए भी उपयुक्त नहीं है।
30 दिनों में जल गुणवत्ता सुधारने के निर्देश
इन जलाशयों में फीकल कोलीफार्म और टोटल कोलीफार्म की मात्रा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों से अधिक मिली, जो जल में सीवेज की मौजूदगी का संकेत देती है। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकरण ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) और उज्जैन नगर निगम आयुक्त को 30 दिनों के भीतर जल गुणवत्ता सुधारने, प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई करने तथा प्रदूषण फैलाने वालों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश दिए हैं।
स्पष्ट किया कि सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन से पहले सप्तसागरों की सफाई और संरक्षण केवल औपचारिकता नहीं हो सकती। मामले की अगली सुनवाई चार सितंबर को होगी।
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