उज्जैन एयरपोर्ट बनाने को लेकर छह कंपनियाें ने दिखाई दिलचस्पी


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में एयरपोर्ट बनाने के लिए डीआरए इंफ्राकान, रवि इन्फ्राबिल्ड, गावर कंस्ट्रक्शन और अशोका बिल्डकान सहित छह निर्माण कंपनियों ने इच्छा जाहिर कर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) को निविदा प्रस्ताव दिए हैं। निविदा प्रस्ताव का तकनीकी और वित्तीय परीक्षण अभी किया जा रहा है। शर्ताें पर खरी उतरी इनमें से एक कंपनी को महीने-दो महीने में कार्य आदेश जारी कर काम शुरू कराने की उम्मीद है।

विमानन विभाग के मुताबिक 147 करोड़ 36 लाख रुपये से वर्तमान दताना-मताना हवाई पट्टी का पूरी तरह कायाकल्प किया जाएगा। मौजूदा पुराने और कमजोर पेवमेंट को हटाकर पूरी तरह नया रनवे 13/31 बनाया जाएगा। इसकी लंबाई 1800 मीटर प्रस्तावित है, जिससे एटीआर-72 जैसे व्यावसायिक विमान उतर सकेंगे।

सुरक्षा के लिहाज से 7.8 किलोमीटर (7835 मीटर) लंबी आपरेशनल बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी। इसमें सुरक्षा के लिए कंक्रीटिना काइल और कंटीले तार लगाए जाएंगे। विमानों के मुड़ने और खड़े होने के लिए लिंक टैक्सीवे, एप्रन और आइसोलेशन बे का निर्माण होगा। साथ ही एयरपोर्ट के अंदरूनी हिस्से में ‘पेरिफेरल रोड’ बनाई जाएगी। निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए एक वर्ष की निश्चित समय सीमा निर्धारित की गई है, ताकि सिंहस्थ से पहले ट्रायल लैंडिंग सुनिश्चित हो सके।

टेंडर में ”डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड” को दो साल रखा गया है, यानी निर्माण के बाद दो साल तक मरम्मत का जिम्मा ठेकेदार कंपनी का होगा। रनवे और एप्रन पर लगने वाली आधुनिक एलईडी लाइटों के लिए पांच साल की वारंटी और मेंटेनेंस अनिवार्य की गई है। एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग के जरिए एयरपोर्ट को नाइट लैंडिंग के योग्य बनाया जाएगा। निर्माण शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच के लिए कड़े मापदंड तय किए गए हैं। इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, फायर स्टेशन और अंडरग्राउंड वाटर टैंक के लिए कम से कम 10 मीटर की गहराई तक बोरहोल कर मिट्टी का परीक्षण किया जाएगा।

सिंहस्थ में एयरपोर्ट ‘गेम चेंजर’ साबित होगा

सिंहस्थ-2028 के दौरान आने वाले 15 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए यह एयरपोर्ट ”गेम चेंजर” साबित होगा। 147 करोड़ के इस शुरुआती निवेश से उज्जैन में न केवल हवाई यातायात शुरू होगा, बल्कि यह आपदा प्रबंधन और वीआइपी मूवमेंट का मुख्य केंद्र भी बनेगा। प्रशासनिक स्तर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से अब तय हो गया है कि अगले कुछ महीनों में दताना हवाई पट्टी पर निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो जाएगा, जो उज्जैन के विकास को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो सिंहस्थ से काफी पहले उज्जैन के आसमान में बड़े विमानों की गूंज सुनाई देगी, जो मालवा क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

उज्जैन एयरपोर्ट के लिए 590 करोड़ हो चुके मंजूर

उज्जैन एयरपोर्ट के लिए मध्य प्रदेश मंत्रीमंडल पिछले महीने 590 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत कर चुका है। राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले ”सिंहस्थ कुंभ” से पहले इस एयरपोर्ट को पूर्णतः क्रियाशील बनाना है। इस राशि से टर्मिनल बिल्डिंग का विस्तार, आधुनिक एटीसी टावर, फायर स्टेशन और यात्रियों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

यह निवेश उज्जैन को मालवा क्षेत्र के एक प्रमुख लाजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट हब के रूप में स्थापित करेगा। राज्य सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि उज्जैन अब केवल एक धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि भविष्य का एक आधुनिक ‘स्मार्ट एविएशन हब’ बनने की ओर अग्रसर है। अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से करीब 30 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। सिंहस्थ 2028 से पहले इस हवाई अड्डे का विस्तार उज्जैन में पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खोलेगा।

दूसरे चरण में 125 करोड़ से अंतरराष्ट्रीय स्तर डोमेस्टिक टर्मिनल भवन बनेगा, टेंडर जारी

उज्जैन एयरपोर्ट पर दूसरे चरण में 125 करोड़ रुपये से अंतरराष्ट्रीय स्तर का डोमेस्टिक टर्मिनल भवन बनेगा। निर्माण के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने टेंडर जारी कर दिया है। परियोजना अंतर्गत 107 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों पर और 17.44 करोड़ रुपये अगले दस वर्षों के रखरखाव पर खर्च किए जाएंगे। 15 महीने की समय सीमा में यहां एक भव्य डोमेस्टिक टर्मिनल बिल्डिंग के साथ नया एटीसी टावर, तकनीकी ब्लॉक और अत्याधुनिक फायर स्टेशन का निर्माण किया जाएगा।

यात्रियों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट पर उन्नत आइटी और सुरक्षा सिस्टम के साथ-साथ शानदार पार्किंग और एप्रोच रोड विकसित की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए इस प्रोजेक्ट को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के तहत तैयार किया जाएगा। निर्माण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर पखवाड़े ड्रोन या उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो के जरिए प्रगति की निगरानी होगी।

केंद्र के फैसले के बाद सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन में एयरपोर्ट ‘मिशन मोड’ में



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