अंध‍विश्वास के चक्कर में तीन सियारों को बेरहमी से मारा, वीडियो भी बनाया; उज्जैन पुलिस ने पकड़ा


उज्जैन में अंधविश्वास के चलते तीन सियारों को बेरहमी से मारने का मामला सामने आया है। जीवाजीगंज पुलिस ने आरोपी युवक मिथुन को हिरासत में लेकर वन विभाग को…और पढ़ें

Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 11:18:48 AM (IST)Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 11:27:48 AM (IST)

अंध‍विश्वास के चक्कर में तीन सियारों को बेरहमी से मारा, वीडियो भी बनाया; उज्जैन पुलिस ने पकड़ा
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।

HighLights

  1. आरोपी युवक ने वारदात में साथ देने वाला का नाम भी बताया
  2. सियार को मारते हुए उसका वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल
  3. आरोपी पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ केस

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। जीवाजीगंज पुलिस ने वन्य जीवों को मारने के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया है। मामले की तफ्तीश के लिए उसे वन विभाग को भी सौंपा गया। विभाग ने मामले की विवेचना में पाया की आरोपी ने तीन सियारों को बेरहमी से मारा है। विभाग को वारदात के पीछे संगठित अपराधियों का पूरा गिरोह होने का शक है, उसी दिशा में जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

यह भी सामने आया है कि इन्होंने अंधविश्वास की वजह से इस घटना को अंजाम दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह जिला वन मंडल अधिकारी को पुलिस ने जानकारी दी कि एक युवक उनकी गिरफ्त में है, जिस पर वन्य प्राणियों को मारने का आरोप है। युवक के मोबाइल में इसके वीडियो भी उपलब्ध हैं।

मामले की पड़ताल के लिए विभाग उसे अपनी अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करें। इस पर वन विभाग का अमला जीवाजीगंज थाने पहुंचा और युवक को अपनी अभिरक्षा में लिया, इसके बाद डीएफओ अनुराग तिवारी की मौजूदगी में युवक से पूछताछ की गई।

आरोपी ने इस घटना में साथ देने वाले का नाम कबूला

इस पर उसने सियारों को पकड़ना और मारना कुबूल किया। आरोपित ने वन्य प्राणियों की हत्या में उसका सहयोग देने वाले व्यक्ति का नाम भी बताया है। मामले में आरोपित मिथुन के विरुद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम-1972 की धारा-2 (16) 9, 39, 50, 31 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

जांच दल में एडीओ विक्रम सिंह, डिप्टी रेंजर जोगेंद्र सिंह जाटवा, डिप्टी रेंजर अनिल सेन, डिप्टी रेंजर रजनी चौहान शामिल थे। वन्य प्राणियों की हत्या एक गंभीर अपराध है और उक्त धाराओं में आराेपितों को 3 से 7 वर्ष का कारावास तथा 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया जा सकता है।



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