सिंहस्थ के लिए उज्जैन में होगा 37 पुलों का नेटवर्क, 350 किमी सड़क निर्माण और चौड़ीकरण से बदल जाएगी रफ्तार


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सात लाख की आबादी वाला उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के साथ देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलावों में से एक का गवाह बनने जा रहा है। अगले दो वर्षों में शहर 15 से बढ़कर 37 पुलों के नेटवर्क वाला शहर होगा, वहीं शहर के भीतर करीब 350 किलोमीटर सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण का काम भी साथ-साथ चल रहा है।

रेलवे ओवरब्रिज, रिवर ओवरब्रिज, नए लिंक ब्रिज और चौड़ी सड़कों का यह नेटवर्क केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की निर्बाध आवाजाही के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों तक उज्जैन की ट्रैफिक व्यवस्था और शहरी विकास की नई रीढ़ बनने जा रहा है। धार्मिक आयोजन की जरूरतों को ध्यान में रखकर किसी मझोले शहर में इतने बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास देश में विरले ही देखने को मिलता है।

सिंहस्थ-2028 को लेकर इस बार तैयारी का केंद्र सिर्फ घाटों का विस्तार या अस्थायी व्यवस्थाएं नहीं हैं। पूरा फोकस स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर है। सरकार का लक्ष्य ऐसा सड़क और पुल नेटवर्क विकसित करना है, जो सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही संभालने के साथ आने वाले वर्षों में भी शहर की बढ़ती जरूरतों को पूरा करे। इसी सोच के तहत शिप्रा नदी पर 22 नए पुल प्रस्तावित हैं। इनके बनने के बाद शहर में पुलों की संख्या 15 से बढ़कर 37 हो जाएगी। इन परियोजनाओं पर लगभग 853 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

पुल ही नहीं, पूरे शहर का ट्रैफिक मैप बदल रहा

उज्जैन की सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि रेलवे लाइन और शिप्रा नदी शहर को कई हिस्सों में बांटती हैं। कई स्थानों पर लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि पर्व और त्योहारों में यही मार्ग जाम का कारण बन जाते हैं। नए रेलवे ओवरब्रिज, रिवर ओवरब्रिज और लिंक ब्रिज इस समस्या का स्थायी समाधान बनेंगे। इसके साथ शहर के भीतर करीब 350 किलोमीटर सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का काम भी प्रगति पर है। इससे प्रमुख प्रवेश मार्गों से लेकर मेला क्षेत्र तक निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा।

रोजमर्रा की जिंदगी भी होगी आसान

इन परियोजनाओं का लाभ केवल 2028 तक सीमित नहीं रहेगा। हरिफाटक जैसे क्षेत्रों में वर्षों से रेलवे फाटक के कारण लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। नए पुलों से औद्योगिक क्षेत्रों, आवासीय कॉलोनियों, महाकाल मंदिर, शिप्रा घाटों और बाहरी बायपास के बीच यात्रा समय कम होगा। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं को भी तेज रास्ते मिलेंगे। पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

हर विभाग के लिए तय हुई समय सीमा

सिंहस्थ से जुड़ी सड़क और पुल परियोजनाओं की विभागवार समीक्षा की गई। कई परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है, कुछ टेंडर और तकनीकी स्वीकृति के अंतिम चरण में हैं, जबकि जिन कार्यों में प्रशासनिक अड़चनें हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। लक्ष्य साफ है- सिंहस्थ से पहले पूरा कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार करना।

देश के लिए बन सकता है माडल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल सिंहस्थ की तैयारी नहीं, बल्कि भविष्य के शहर की योजना है। देश में ऐसे बहुत कम उदाहरण हैं, जहां किसी सात लाख की आबादी वाले शहर में धार्मिक आयोजन को आधार बनाकर पुलों, सड़कों और कनेक्टिविटी का इतना व्यापक स्थायी नेटवर्क विकसित किया जा रहा हो। यदि तय समय में परियोजनाएं पूरी होती हैं तो उज्जैन भविष्य में बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

नए पुलों की स्थिति

  • सिंहस्थ-2028 तक 22 नए पुल बनेंगे, कुल संख्या 37 होगी
  • वर्तमान में यातायात के लिए शहर में उपलब्ध पुल 15
  • 19 पुलों का निर्माण धरातल पर चल रहा
  • तीन पुलों का निर्माण निविदा प्रक्रिया और कार्य आदेश प्रक्रिया में
  • शिप्रा नदी पर बनने वाले पुलों पर लगभग 853 करोड़ रुपये का निवेश।

चार साल से इंतजार : 2022 में शुरू हुआ, अब भी पूरा नहीं

शहर के महत्वपूर्ण रेलवे ओवरब्रिजों में शामिल एक परियोजना का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, लेकिन चार वर्ष बाद भी यह पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी। सिंहस्थ की उलटी गिनती शुरू होने के बीच अब प्रशासन का पूरा फोकस ऐसे लंबित प्रोजेक्ट समय पर पूरे कराने पर है, ताकि नई परियोजनाओं के साथ पुराने अधूरे काम भी शहर को राहत दे सकें।



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