यहीं रहेंगे या नए स्थान पर विराजेंगे खड़े हनुमान, उज्जैन में असमंजस में सरकार, उमड़ा आस्था का ज्वार
नईदुनिया प्रतनिधि, उज्जैन : छत्री चौक के समीप स्थित खड़े हनुमान मंदिर को पुनर्स्थापित करने का मामला दस दिन बाद भी अनिर्णय की स्थिति में है। शासन अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि खड़े हनुमान को वर्तमान स्थान से हटाकर नए स्थान पर विराजित किया जाए या जनभावना को देखते हुए उन्हें यहीं रहने दिया जाए।
जनश्रुति है कि मूर्ति को हटाने का प्रयास करते समय कुछ चमत्कारी अनुभव के कारण अनहोनी के डर से भी जिम्मेदार उचित निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। इधर विस्थापन में हो रही देरी के बीच मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। सुबह से देर रात तक सैकड़ों भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर के बाहर हनुमान चालीसा व रामायण पाठ जारी है। श्रद्धालुओं का कहना है कि खड़े हनुमान जहां विराजमान हैं, वहीं रहने दिया जाएं।
सिंहस्थ महाकुंभ के लिए कंठाल चौराहा से छत्रीचौक तक मार्ग चौड़ीकरण की जद में आए करीब आधा दर्जन मंदिरों को पुनर्स्थापित करने का काम चल रहा है। इन्ही मंदिरों में से एक खड़े हनुमान का मंदिर है। बताया जाता है सड़क के मध्य में स्थित यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है।
करीब दस दिन पहले प्रशासन ने खड़े हनुमान को नए स्थान पर विराजित करने की तैयारी शुरू की थी। अब तक मंदिर का शिखर तथा आसपास का भाग हटाया जा चुका है। लेकिन अब तक मूर्ति को स्थानांतरित करने में सफलता नहीं मिल सकी है। जानकार बताते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से मूर्ति को सुरक्षित तरीके से नए स्थान पर स्थापित किया जा सकता है, लेकिन निर्णय नहीं हो पाने के कारण मामला लगातार लंबा खींचता जा रहा है।
जनभावना से बढ़ी सरकार की चिंता
खड़े हनुमान के विस्थापन को लेकर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी से ज्यादा जनभावना की दिखाई दे रही है। मंदिर से जुड़ी आस्था और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लगातार पहुंचने के कारण सरकार किसी भी निर्णय को लेकर सावधानी बरत रही है।
माना जा रहा है कि प्रशासन यह भी देख रहा है कि मूर्ति को हटाने की स्थिति में धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया क्या होगी? इधर मंदिर के आसपास धार्मिक गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। रामायण का पाठ भी चल रहा है। मंदिर परिसर के आसपास आस्था का वातावरण बन गया है। इससे आने वाले दिनों में मामला और संवेदनशील होने की आशंका बढ़ रही है।
पुरातत्त्वविदों का कहना- तकनीक का सहारा ले सकते हैं
इस बीच पूरे मामले में पुरातत्त्वविदों का कहना है कि खड़े हनुमान की मूर्ति को विस्थापित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। मूर्ति की संरचना और जमीन के भीतर उसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्कैनिंग तकनीक उपलब्ध है। इससे अलावा विज्ञानियों ने जीपीआर (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) तकनीक के उपयोग की भी सलाह दी है। इस तकनीक में जमीन की सतह से रेडियो तरंगे भेजकर उसके परावर्तन का अध्ययन किया जाता है। इसमें बिना खोदाई किए भूमिगत संरचनाओं- परतों और संभावित अवरोधों की स्थिति तथा अनुमानित गहराई का आकलन किया जा सकता है।
कई बार प्रयास, फिर भी नहीं निकली मूर्ति
मंदिर के पुजारी हवन कुमार के अनुसार पिछले दस दिनों में सरकार और प्रशासन की ओर से कई बार मूर्ति को विस्थापित करने का प्रयास किया जा चुका है, लेकिन सफलता नहीं मिली। उनका कहना है कि लगातार प्रयास के बावजूद खड़े हनुमान को हटाया नहीं जा सका है। मूर्ति की गहराई नापने के लिए आसपास तीन चार गड्ढें किए गए हैं। मूर्ति यहीं रहेगी या अन्यत्र स्थानांतरित होगी यह तो प्रशासन ही बता पाएगा
यह भी जानिए
- पुरातत्व के स्थानीय विद्वान बताते हैं खड़े हनुमान की मूर्ति परमार काल की होकर करीब एक हजार साल पुरानी है।
- उस काल खंड में मूर्तियों को इंटरलॉकिंग तकनीक से स्थापित किया गया है।
- इस पद्धति में एक बड़ी शिला अंदर होती है और उसके साथ मूर्ति के निचले हिस्से की शिला को इंटरलॉकिंग के माध्यम से जोड़ा जाता है।
- पुरातत्त्वविदों के अनुसार इस संरचना को वैज्ञानिक तरीके से समझकर प्रतिमा को निकाला जा सकता है।
उत्तरमुखी हो जाएंगे खड़े हनुमान
इस बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े हनुमान मंदिर में डेरा डाले हुए हैं। भक्त खड़े हनुमान की मूर्ति हटाने को शुभ- अशुभ की दृष्टि से भी देख रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि वर्तमान में खड़े हनुमानजी की मूर्ति का मुख दक्षिण दिशा में हैं।
यह दिशा संकट की मानी जाती है, इस और देखते हुए हनुमानजी अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि स्थानांतरण के बाद प्रशासन ने मूर्ति की स्थापना के लिए टंकी चौराहा पर मंदिर के लिए जो स्थान दिया है, वहां मूर्ति स्थापित होने के बाद भगवान का मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा, जो विपरीत फल प्रदान कर सकता है।
गहराई नापने के लिए परीक्षण कराएंगे
भगवान खड़े हनुमानजी की मूर्ति को नए स्थान पर विराजित करने के लिए सुरक्षित तरीका अपनाया जाएगा। इसके लिए कुछ विशेषज्ञों को बुलाया गया है। और अधिक परीक्षण कर मूर्ति की गहराई नापेंगे। -संतोष टैगोर, अपर आयुक्त, नगर निगम
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