मास्टर प्लान… बदलेगा उज्जैन के प्रमुख मंदिरों का स्वरूप, कालभैरव से मंगलनाथ और सांदीपनि आश्रम तक के लिए योजना तैयार
धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 को लेकर शहर में चल रही अधोसंरचना परियोजनाओं के बीच अब उज्जैन के प्रमुख मंदिरों के कायाकल्प की व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने सात प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि मंदिरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित धार्मिक परिसरों में बदलना है, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं को सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था मिल सके।
शासन द्वारा तैयार की जा रही इस योजना में श्री कालभैरव मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर, श्री सिद्धवट, श्री अंगारेश्वर मंदिर, श्री सांदीपनि आश्रम, श्री भूखी माता मंदिर और श्री नवग्रह शनि मंदिर को शामिल किया गया है। प्रत्येक मंदिर के आसपास उपलब्ध भूमि, श्रद्धालुओं की संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखकर अलग-अलग विकास योजनाएं बनाई जा रही हैं।
योजना का सबसे बड़ा हिस्सा मंदिर परिसरों के विस्तार से जुड़ा है। कई प्रमुख मंदिरों में वर्तमान में सीमित जगह होने के कारण पर्व और विशेष अवसरों पर भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। ऐसे में जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त भूमि जोड़कर खुले और बड़े परिसर विकसित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्थित भीड़ से राहत देने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही व्यवस्थित कतार प्रबंधन और पर्याप्त प्रतीक्षा क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, ताकि दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और समयबद्ध बन सके।
मास्टर प्लान में मंदिरों के आसपास बड़े पार्किंग हब और फेसिलिटी सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। इनमें शौचालय, पेयजल, प्रसाद केंद्र, विश्राम स्थल और सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
सुविधाओं और सुरक्षा पर विशेष फोकस
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को भी योजना का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। मंदिर परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन निकास मार्ग विकसित किए जाएंगे, ताकि सिंहस्थ और बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों में मंदिरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्यों में पारंपरिक स्थापत्य और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इसी बढ़ती धार्मिक पर्यटन गतिविधि को देखते हुए अब अन्य प्रमुख मंदिरों को भी विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। यदि योजना तय समय पर पूरी होती है, तो सिंहस्थ-2028 तक उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी होगी।
मास्टर प्लान की 7 मुख्य बातें
- मंदिर परिसरों का विस्तार और अतिरिक्त भूमि का उपयोग।
- प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग तथा सहज दर्शन व्यवस्था।
- बड़े पार्किंग हब और आधुनिक फेसिलिटी सेंटर।
- शौचालय, पेयजल, प्रसाद केंद्र और विश्राम सुविधाएं।
- सीसीटीवी, नियंत्रण कक्ष और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था।
- हरित एवं पर्यावरण अनुकूल विकास पर जोर।
- धार्मिक और पारंपरिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए निर्माण कार्य।