मकर संक्रांति पर दो दिन का पर्वकाल, उज्जैन में शिप्रा स्नान के बाद दान पुण्य कर रहे श्रद्धालु


उज्जैन के त्रिवेणी संगम स्थित प्राचीन श्री नवग्रह शनि मंदिर में मकर संक्रांति का पर्व पिता पुत्र दिवस के रूप में मनाएंगे। दोपहर सूर्य देव की पालकी यात …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 14 Jan 2026 09:34:15 AM (IST)Updated Date: Wed, 14 Jan 2026 09:43:13 AM (IST)

मकर संक्रांति पर दो दिन का पर्वकाल, उज्जैन में शिप्रा स्नान के बाद दान पुण्य कर रहे श्रद्धालु
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ ने शिप्रा में फुटबाल से सुरक्षा रेखा बनाई है।

HighLights

  1. उज्जैन में बुधवार व गुरुवार को दो दिन पर्वकाल मनाया जा रहा है
  2. आस्थावान शिप्रा के घटों पर नर्मदा के साफ स्वच्छ जल में स्नान कर रहे
  3. भक्त मंदिरों तिल गुड़ के लड्डू तथा खिचड़ी का दान कर रहे हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। पंचांग की गणना में स्थानीय दिनमान के अनुसार बुधवार को दोपहर 3 बजकर 8 मिनट के बाद सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही श्रद्धालु स्नान, दान कर मकर संक्रांति मनाएंगे। वैसे कुछ श्रद्धालु सुबह से ही स्नान करने शिप्रा तट पर पहुंच हैं। हालांकि कुछ विद्वानों का मत है कि अगर सूर्यदेव दोपहर बाद मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो पर्वकाल अगले दिन सुबह अर्थात गुरुवार को मनाना चाहिए। ऐसे में मतांतर के चलते धर्मधानी उज्जैन में बुधवार व गुरुवार को दो दिन पर्वकाल मनाया जा रहा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति पर तीर्थ स्नान तथा दान पुण्य की परंपरा है। इस बार दो दिन पर्वकाल होने से श्रद्धालु आज शिप्रा स्नान करने के बाद दान पुण्य कर रहे हैं, इसके साथ ही कल गुरुवार को भी स्नान करने पहुचेंगे। शासन, प्रशासन द्वारा मकर संक्रांति पर्व स्नान के लिए शिप्रा में नर्मदा का जल प्रवाहित किया है। आस्थावान शिप्रा के घटों पर नर्मदा के साफ स्वच्छ जल में स्नान कर रहे हैं।

पश्चात तीर्थ पर वैदिक ब्राह्मणों को दान पुण्य किया जा रहा है। भक्त मंदिरों तिल गुड़ के लड्डू तथा खिचड़ी का दान कर रहे हैं। गायों को चारा तथा भिक्षुकों को भोजन कराने का विधान भी शास्त्र में बताया गया है। मकर संक्रांति सूर्य साधना का दिन है इस दिन केडी पैलेस तथा कर्कराज के समीप स्थित सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना की जा रही है।

नवग्रह शनि मंदिर से निकलेगी सूर्यदेव की सवारी

आध्यात्मिक संत कृष्णा गुरुजी आज शिप्रा के त्रिवेणी संगम स्थित प्राचीन श्री नवग्रह शनि मंदिर में मकर संक्रांति का पर्व पिता पुत्र दिवस के रूप में मनाएंगे। दोपहर 2.45 बजे सूर्य देव की पालकी यात्रा निकाली जाएगी। शंख, घंटे, घड़ियाल व ढोल ढमकों की मंगल ध्वनि के साथ सूर्यदेव की पालकी यात्रा नगर भ्रमण पर निकलेगी। इसमें नवग्रहों की ध्वजा के साथ 111 वेदपाठी बटुक धर्म ध्वजा लेकर निकलेंगे। दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर शनि मंदिर में सूर्यदेव को विराजित कर पूजा अर्चना की जाएगी।

भगवान को तिल गुड़ का भोग लगाया जाएगा। मंदिर परिसर में कोणार्क के सूर्य मंदिर से लाई गई अर्क मिट्टी में शमी तथा मदार का पौधा लगाया जाएगा। पश्चात हवन अनुष्ठान होगा शनि मंत्रों के साथ तिल तथा सूर्य के मंत्रों के साथ गुड़ तथा दोनों ग्रहों से संबंधित वनस्पति तथा औषधियों की आहुति दी जाएगी।

शहर में पतंग उत्सव की धूम

मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव मनाया जाएगा। सुबह से शाम तक पतंग उड़ाई जाएगी। घर की छतों पर डीजे की मस्ती में युवाओं की टोली पतंग उड़ते नजर आएंगी। शासन, प्रशासन ने चाइना की प्राण घातक डोर से पतंग उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। मंगलवार को दिनभर युवा कपास के धागे से बनी पारंपरिक डोर तैयार कराते नजर आए। शाम के समय तोपखाना, मदारगेट, शहीद पार्क आदि स्थानों पर लगी दुकानों पर युवा देर रात तक पतंग खरीदते देखे गए।

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