उज्जैन संभाग के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए देश का पहला ‘टेंपल बॉन्ड’ इसी माह होगा लांच


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। श्री महाकाल महालोक के बाद अब उज्जैन संभाग के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए देश का पहला ”टेंपल बान्ड” लांच होने जा रहा है। प्रशासन ने 31 जुलाई के आसपास 200 करोड़ रुपये के टेंपल बान्ड जारी करने का लक्ष्य तय किया है।

इसके साथ ही 1100 करोड़ रुपये की समग्र धार्मिक अधोसंरचना योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बॉन्ड आधारित फंडिंग का यह देश का पहला मॉडल होगा, जिसे अन्य राज्य भी अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बॉन्ड जारी करने से जुड़ी सभी औपचारिकताएं समय-सीमा में पूरी की जाएं ताकि निर्धारित तिथि पर इसका शुभारंभ किया जा सके। योजना के तहत उज्जैन और आगर-मालवा के 11 प्रमुख धार्मिक स्थलों का व्यापक कायाकल्प किया जाएगा।

इनमें श्री कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनी आश्रम, गढ़कालिका मंदिर, सिद्धवट, नवग्रह शनि मंदिर, अंगारेश्वर महादेव, भूखी माता मंदिर, 84 महादेव मंदिर श्रृंखला तथा आगर-मालवा का प्रसिद्ध बगलामुखी माता मंदिर प्रमुख हैं। इन स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने के साथ मंदिर परिसरों का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

परियोजना में पार्किंग, यात्री सुविधा केंद्र, आधुनिक विश्राम गृह, डिजिटल कतार प्रबंधन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था, पहुंच मार्ग और अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में सहायक धार्मिक स्थलों को भी आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना आवश्यक हो गया है, ताकि श्रद्धालुओं का दबाव विभाजित हो और धार्मिक पर्यटन का लाभ पूरे संभाग तक पहुंचे।

यदि टेंपल बॉन्ड सफल रहता है तो धार्मिक परियोजनाओं के लिए बॉन्ड आधारित फंडिंग का यह देश का पहला माडल होगा। इससे उज्जैन संभाग के मंदिरों का विकास सरकारी बजट पर निर्भर रहने के बजाय निवेश आधारित माडल पर आगे बढ़ेगा और धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

फैक्ट फाइल

  • 1100 करोड़ का वित्तीय ब्लूप्रिंट
  • 200 करोड़ रुपये – 10 वर्ष अवधि के टेंपल बान्ड से जुटाए जाएंगे।
  • 625 करोड़ रुपये – बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से फंडिंग।
  • 275 करोड़ रुपये – अर्बन चैलेंज फंड से उपलब्ध होंगे।

इन मंदिरों की बदलेगी तस्वीर

  • कालभैरव
  • मंगलनाथ
  • सांदीपनी आश्रम
  • गढ़कालिका
  • सिद्धवट
  • नवग्रह शनि मंदिर
  • अंगारेश्वर महादेव
  • भूखी माता मंदिर
  • 84 महादेव मंदिर श्रृंखला
  • बगलामुखी माता (आगर-मालवा) सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल।

तीन अहम सवाल

  • टेंपल बॉन्ड में निवेश करने वालों को कितना रिटर्न मिलेगा और इसकी गारंटी कौन देगा तथा क्या इसमें आम नागरिक भी निवेश कर सकेंगे।
  • बॉन्ड लांच होने के बाद पहले चरण के विकास कार्य कब शुरू होंगे और 11 मंदिरों का कायाकल्प पूरा करने की समय-सीमा क्या तय की गई है।
  • क्या इस योजना में केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण होगा या पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन, स्थानीय रोजगार, व्यापार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए भी अलग कार्ययोजना बनाई गई है।

645 करोड़ का बैंक कर्ज लेने को प्रस्ताव आमंत्रित

1100 करोड़ रुपये की परियोजना में 625 करोड़ रुपये बैंक फंडिंग से जुटाए जाने हैं। इसी के तहत उज्जैन विकास प्राधिकरण ने 645 करोड़ रुपये तक के टर्म लोन के लिए बैंकों से प्रस्ताव मांगे हैं। उद्देश्य सिंहस्थ-2028 से पहले महाकाल क्षेत्र और मंदिरों से जुड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए समय पर धन उपलब्ध कराना है।

क्यों खास है ”टेंपल बॉन्ड” मॉडल

अब तक देश में मंदिरों के विकास के लिए सरकारी बजट, दान और ट्रस्ट की आय पर ही निर्भरता रही है। उज्जैन का टेंपल बान्ड माडल पहली बार पूंजी बाजार आधारित वित्त जुटाने की पहल है। सफल होने पर धार्मिक शहरों के विकास के लिए यह देशभर में नया वित्तीय मॉडल बन सकता है और सरकारों की बजटीय निर्भरता भी घटा सकता है।



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